रूस यूक्रेन का युद्ध 24 घंटे में समाप्त करने का दावा किया, लेकिन सात माह के बाद भी युद्ध रोकना तो दूर अस्थायी शांति बहाली तक नहीं करा पाए। नाकाम रहने के बाद ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने इसे मोदी का युद्ध करार दे दिया। इसके बाद इससे पल्ला झाड़ते हुए नॉर्थ कोरिया चले गए। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा फैसला लिया है। वे अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (Department of Defense) का नाम बदलकर ‘युद्ध मंत्रालय’ (Department of War) करना चाहते हैं। यह खबर 5 सितंबर 2025 को ‘द गार्जियन’ में छपी, जिसमें बताया गया कि ट्रम्प शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। यह कदम बिना कांग्रेस की मंजूरी के नाम बदलने की कोशिश है, जो पहले कभी नहीं हुआ। ट्रम्प का कहना है कि ‘युद्ध मंत्रालय’ नाम ज्यादा मजबूत और सटीक लगता है।
क्या है माजरा?
ट्रम्प का मानना है कि ‘रक्षा मंत्रालय’ नाम में वो ताकत नहीं झलकती, जो अमेरिका की सैन्य शक्ति को दिखानी चाहिए। उनका कहना है कि पुराना नाम ‘युद्ध मंत्रालय’, जो 1947 से पहले इस्तेमाल होता था, ज्यादा दमदार है। ट्रम्प ने अगस्त में ओवल ऑफिस में अपने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ इस आइडिया को पहली बार जाहिर किया था। उन्होंने कहा, “रक्षा मंत्रालय सुनने में अच्छा नहीं लगता। हमने पहला और दूसरा विश्व युद्ध जीता, तब इसे युद्ध मंत्रालय कहा जाता था।” ट्रम्प को लगता है कि यह नाम बदलना अमेरिका की सैन्य ताकत को और मजबूती से पेश करेगा।
कैसे होगा नाम बदलाव?
नाम बदलने के लिए सामान्य रूप से कांग्रेस की मंजूरी चाहिए, क्योंकि यह एक फेडरल एजेंसी है। लेकिन ट्रम्प इसे चतुराई से करने की कोशिश कर रहे हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि कार्यकारी आदेश के जरिए ‘युद्ध मंत्रालय’ को एक “सेकेंडरी टाइटल” के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब है कि आधिकारिक नाम बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी, और कांग्रेस की मंजूरी के बिना भी यह बदलाव लागू हो सकता है। ट्रम्प का कहना है, “हम इसे बस कर देंगे। मुझे नहीं लगता कि इसके लिए कांग्रेस की जरूरत पड़ेगी, लेकिन अगर पड़ी, तो वे साथ देंगे।”
ट्रम्प का तर्क और दृष्टिकोण
ट्रम्प का मानना है कि ‘रक्षा’ शब्द कमजोरी दिखाता है, जबकि ‘युद्ध’ शब्द ताकत और जीत का प्रतीक है। उन्होंने कई बार कहा कि पुराने नाम के साथ अमेरिका ने विश्व युद्ध जीते, और यह नाम उनकी सैन्य नीतियों को बेहतर तरीके से दर्शाएगा। उनके रक्षा सचिव पीट हेगसेथ भी इस विचार का समर्थन करते हैं। ट्रम्प का कहना है कि यह बदलाव सैन्य बल की छवि को और मजबूत करेगा, जो उनके प्रशासन का मुख्य लक्ष्य है।
पहले क्या थी स्थिति?
1947 से पहले अमेरिका में रक्षा मंत्रालय को ‘युद्ध मंत्रालय’ ही कहा जाता था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसे रक्षा मंत्रालय नाम दिया गया, ताकि शांति और सुरक्षा पर जोर दिया जाए। ट्रम्प अब इसे उलटना चाहते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह नाम उनकी नीतियों और अमेरिका की सैन्य ताकत के साथ ज्यादा मेल खाता है।

















