लगातार बारिश और बाढ़ के कारण पंजाब के हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। गांव-गांव में पानी भरने से फसलें नष्ट हो रही हैं, घर क्षतिग्रस्त हैं और हजारों लोग संकट में हैं। इस स्थिति का जायजा लेने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को पंजाब पहुंचे।अमृतसर हवाई अड्डे पर उनका स्वागत राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया।
राज्यपाल ने उन्हें 5 जिलों— अमृतसर, पठानकोट, गुरदासपुर, तरनतारन और फिरोजपुर में हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।
प्रेस वार्ता करने के बाद कृषि मंत्री चौहान अजनाला इलाके के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों से सीधे संवाद किया। किसानों ने उन्हें फसलों की बरबादी और हालात की गंभीरता के बारे में बताया। उनके साथ कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग भी उपस्थित थे।
पानी में उतरकर ग्रामीणों से की बातचीत
इसके बाद चौहान डेरा बाबा नानक पहुंचे। यहां वे ट्रैक्टर पर सवार होकर गांव-गांव में गए। ट्रैक्टर खुद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ चला रहे थे। मंत्री चौहान ने बाढ़ के पानी में उतरकर ग्रामीणों से हालचाल लिया और भरोसा दिलाया कि इस आपदा की घड़ी में केंद्र सरकार उनके साथ खड़ी है।
कांग्रेस विधायक अरुणा चौधरी ने कहा कि यह समस्या हर वर्ष सामने आती है लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि तीन महीने के लिए अस्थायी पुल हटा दिए जाते हैं, जिससे लोगों का आवागमन बाधित हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेता और सांसद सनी देओल ने करीब एक करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन पुल अब तक तैयार नहीं हुआ।
शिवराज सिंह चौहान ने कही ये बड़ी बातें
अमृतसर में हुई प्रेस वार्ता और दौरे के दौरान कृषि मंत्री ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।
1. पंजाब देश का गौरव –
उन्होंने कहा कि पंजाब हमेशा देश की शान रहा है।Mजब भी राष्ट्र पर संकट आया, पंजाब ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर उसे झेला है।
2. 1400 गांवों पर असर –
चौहान ने बताया कि अब तक 1400 गांव बाढ़ से प्रभावित पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं प्रभावित गांवों में जाकर किसानों से संवाद करेंगे और फसलों व संपत्ति को हुए नुकसान का जायजा लेंगे।
3. केंद्र का पूरा सहयोग –
चौहान ने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्र सरकार पूरी तरह पंजाब के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी।
4. दो केंद्रीय टीमें सक्रिय –
उन्होंने जानकारी दी कि कृषि, ग्रामीण विकास, सड़क, ऊर्जा, वित्त और जल शक्ति मंत्रालयों के अधिकारियों की दो टीमें पंजाब पहुंच चुकी हैं। ये टीमें अलग-अलग इलाकों का सर्वेक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को सौंपेंगी।
गुरदासपुर में किसानों से संवेदना
गुरदासपुर में चौहान ने किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा- “जब फसल बर्बाद होती है तो केवल खेत ही नहीं उजड़ते, बल्कि किसान का पूरा जीवन प्रभावित होता है। उसके बच्चों की पढ़ाई, घर की रोटी और परिवार का भविष्य संकट में पड़ जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि बाढ़ से कई घरों को नुकसान हुआ है, मवेशी बह गए हैं और कुछ सीमा पार तक चले गए हैं “यह जल प्रलय जैसी स्थिति है। मैं यहां नेता बनकर नहीं बल्कि सेवक की तरह आया हूं। राहत कार्यों और समाधान में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।”
23 जिलों में बाढ़ का असर
फिलहाल पंजाब के 23 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर, बरनाला, बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला, लुधियाना, मलेरकोटला, मानसा, मोगा, पटियाला, रूपनगर, नवांशहर, मोहाली, संगरूर और मुक्तसर शामिल हैं।
अब तक 1655 गांव डूब चुके हैं। अकेले अमृतसर (390 गांव) और गुरदासपुर (324 गांव) में सबसे ज्यादा असर देखा गया है। लुधियाना (216), कपूरथला (178) और मानसा (114) गांव भी गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
जनहानि और आबादी पर असर
· बाढ़ से अब तक 3.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
· अमृतसर (1.75 लाख) और गुरदासपुर (1.45 लाख) सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं।
· 12 जिलों में अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है।
इनमें अमृतसर (4), बरनाला (5), बठिंडा (3), होशियारपुर (7), जालंधर (9), कपूरथला (3), पठानकोट (5) और संगरूर (1) शामिल हैं।पठानकोट जिले से 3 लोग लापता हैं। वहीं पशुधन हानि का सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन बड़ी संख्या में पशु बाढ़ की चपेट में आए हैं।
राहत एवं बचाव कार्य
अब तक 19,474 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
- · अमृतसर से 2734
- · बरनाला से 389
- · बठिंडा से 290
- · होशियारपुर से 3451
- · कपूरथला से 5615
- · जालंधर से 1428
- · मोगा से 195
- · रूपनगर से 615
- · पठानकोट से 1139
- · तरनतारन से 1234 लोग सुरक्षित लाए गए हैं।
राज्यभर में 167 राहत शिविर सक्रिय हैं, जिनमें 1557 लोग शरण लिए हुए हैं।
अमृतसर (381), बरनाला (390), फरीदकोट (796), कपूरथला (57), मानसा (15), मोगा (3), तरनतारन (10) और पठानकोट (47) लोगों को यहां रखा गया है।
सरकार का कहना है कि असली नुकसान का आकलन तब होगा जब पानी पूरी तरह उतर जाएगा। लेकिन अभी तक जनहानि, मकानों और पशुधन को बहुत बड़ी क्षति हो चुकी है।

















