Delhi Flood: दिल्ली में 1978 में आई थी भयंकर बाढ़, 168 साल पहले यमुना ने बदल लिया था रास्ता
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Delhi Flood: दिल्ली में 1978 में आई थी भयंकर बाढ़, 168 साल पहले यमुना ने बदल लिया था रास्ता

दिल्ली की अब तक की सबसे भयंकर बाढ़ 1978 में आई थी और संयोग से उस समय भी महीना सितंबर का ही था। यह बाढ़ सिर्फ दिल्ली हीं रही भारत के कई राज्योंमें भी भारी तबाही मचाई थी।

Written byMahak SinghMahak Singh
Sep 4, 2025, 05:24 pm IST
inदिल्ली
Delhi flood 1978

Delhi flood 1978

इन दिनों दिल्ली में यमुना का जलस्तर एक बार फिर खतरे के निशान को पार कर गया है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, यमुना का जलस्तर 207.48 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। बाढ़ का पानी दिल्ली सचिवालय के आसपास के इलाकों तक पहुंच चुका है और नोएडा के कई हिस्सों में भी पानी घुस गया है। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि क्या इससे पहले भी दिल्ली में ऐसी तबाही आई है?

दिल्ली की अब तक की सबसे भयंकर बाढ़ 1978 में आई थी और संयोग से उस समय भी महीना सितंबर का ही था। यह बाढ़ सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब में भी भारी तबाही मचाई थी। इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी बाढ़ों में से एक माना जाता है। 1978 में भारी बारिश हुई थी, खासकर हिमालयी क्षेत्रों में। इससे यमुना नदी के कैचमेंट एरिया (जहां से पानी इकट्ठा होकर नदी में आता है) में अचानक बहुत ज्यादा पानी आ गया। इसके अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी मूसलधार बारिश हुई, जिससे यमुना का जलस्तर और तेजी से बढ़ा। उस समय हथिनीकुंड बैराज (जिसे पहले ताजेवाला बैराज कहा जाता था) से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया। यह पानी सीधे दिल्ली की ओर आया, जिससे राजधानी में बाढ़ के हालात बन गए।

तबाही का मंजर- मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का पानी रातों-रात रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया था। कई घरों में पानी भर गया और लोग जान बचाने के लिए अपनी छतों पर चढ़ने को मजबूर हो गए। राहत और बचाव के साधन सीमित थे, इसलिए लोगों ने छतों पर ही कई दिनों तक डेरा डाले रखा। वे थोड़ी-बहुत रोटियां, आटा, पानी और दवाइयां इकट्ठा करके वहीं रहने लगे। दिल्ली का नया बना हुआ बांध उस समय कुछ हद तक मददगार साबित हुआ और बाढ़ की तबाही को थोड़ा रोका जा सका। लेकिन इसके बावजूद, हजारों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कई जगहों पर बिजली और पानी की आपूर्ति ठप हो गई थी।

राहत और पुनर्वास- बाढ़ का पानी दिल्ली में लगभग 5–6 दिनों तक जमा रहा हालांकि बारिश थम गई थी लेकिन पानी उतरने और हालात सामान्य होने में करीब 10–12 दिन लग गए। राहत और पुनर्वास कार्यों में भी समय लगा क्योंकि उस समय की व्यवस्थाएं आज जितनी विकसित नहीं थीं। सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी एक-दूसरे की मदद करने में जुटे रहे। नावों और ट्रैक्टरों की मदद से फंसे हुए लोगों को निकाला गया। कई स्वयंसेवी संगठनों ने भी खाना, पानी और दवाइयां पहुंचाने का काम किया।

https://panchjanya.com/2025/09/04/433366/bharat/delhi/delhi-flood-yamuna-bank-metro-station-closed-know-this-before-travelling/

पुराने समय में यमुना नदी का प्रवाह लाल किले के ठीक पीछे से होता था लेकिन समय के साथ, खासकर 1857 के बाद, दिल्ली के बुनियादी ढांचे में काफी बदलाव हुए। शहर के विकास और निर्माण कार्यों ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बदल दिया। अब यमुना दिल्ली में अधिक पूर्व की ओर बहती है। इस बदलाव का असर यह हुआ कि जब भी अधिक बारिश होती है या बैराज से ज्यादा पानी छोड़ा जाता है, तो यमुना का पानी उन इलाकों में भरने लगता है जो कभी नदी के बाढ़ क्षेत्र थे, लेकिन अब वहां बस्तियां और कार्यालय बन चुके हैं। 1978 की बाढ़ के गवाह रहे हैं, वे आज भी उस आपदा को याद करके सिहर उठते हैं। आज की स्थिति में भी जब यमुना खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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