दिल्ली दंगे में उमर खालिद की जमानत याचिका फिर खारिज, कपिल सिब्बल के प्रयास विफल, 10 प्वाइंट में समझें पूरा 'इकोसिस्टम'
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दिल्ली दंगे में उमर खालिद की जमानत याचिका फिर खारिज, कपिल सिब्बल के प्रयास विफल, 10 प्वाइंट में समझें पूरा ‘इकोसिस्टम’

उमर खालिद का नाम अमेरिका की यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) की वेबसाइट पर 'धार्मिक स्वतंत्रता के शिकार' के रूप में सूचीबद्ध है। जबकि भारतीय अदालतों में वह अभी भी आरोपी है, जिसे बार-बार प्रयासों के बाद भी जमानत नहीं मिल रही।

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु' — edited by Sudhir Kumar Pandey
Sep 4, 2025, 08:59 am IST
inभारत, दिल्ली
उमर खालिद, दिल्ली दंगे का आरोपी

उमर खालिद, दिल्ली दंगे का आरोपी

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश’ मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य सात आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की भूमिका ‘गंभीर’ है और वे दंगों को भड़काने में शामिल थे। यह फैसला उमर खालिद के लिए एक और झटका है, जो सितंबर 2020 से जेल में हैं। उनके वकील कपिल सिब्बल के बार-बार प्रयासों के बावजूद जमानत नहीं मिल पाई है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि अदालत के पास दिल्ली दंगों की साजिश में उनके खिलाफ मजबूत सबूत मौजूद हैं।

दिल्ली दंगे फरवरी 2020 में हुए थे, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे। उस समय पूरी दुनिया की मीडिया भारत पर केंद्रित थी। आरोप है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में कुछ लोगों ने साजिश रची और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काए, ताकि यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरे। पुलिस की चार्जशीट में दावा किया गया है कि उमर खालिद और अन्य ने भाषणों के जरिए हिंसा भड़काई और साजिश में शामिल थे। दंगों में 53 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए। यूएपीए के तहत दर्ज इस मामले में आरोपियों पर आतंकवादी गतिविधियों का आरोप है। उमर खालिद के मामले में दिलचस्प बात यह है कि उनके वकील कपिल सिब्बल जैसे अनुभवी अधिवक्ता, जो तीस्ता सीतलवाड़ समेत कई हाई-प्रोफाइल मामलों में आरोपियों को जमानत दिला चुके हैं, यहां लगातार असफल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि –

  1. सबसे पहले ट्रायल कोर्ट ने जमानत खारिज की।
  2. फिर हाई कोर्ट ने जमानत से इनकार किया।
  3. वे सुप्रीम कोर्ट गए।
  4. ट्रायल में देरी की गई।
  5. कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका वापस ली, क्योंकि वे जस्टिस बेला त्रिवेदी से छुटकारा नहीं पा सके (फोरम शॉपिंग का आरोप)।
  6. कहा कि वे निचली अदालत में ‘भाग्य आजमाएंगे’।
  7. फिर ट्रायल कोर्ट गए, जहां जमानत फिर खारिज हुई।
  8. ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
  9. हाई कोर्ट ने फिर जमानत खारिज की।
  10. अब वे फिर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

यह सूची दर्शाती है कि सिब्बल जानते हैं कि केस कमजोर है, लेकिन वे याचिकाएं दाखिल करते रहते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इसका मकसद कांग्रेस के इको-सिस्टम को सोशल मीडिया पर शोर मचाने के लिए सामग्री प्रदान करना है, भले ही याचिका खारिज हो जाए। हर असफलता के बाद सोशल मीडिया पर ‘न्याय की हत्या’ जैसे नैरेटिव चलाए जाते हैं, जो राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल होते हैं।

उमर खालिद के मामले में विदेशी हस्तक्षेप

दूसरी ओर, उमर खालिद का नाम अमेरिका की यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) की वेबसाइट पर ‘धार्मिक स्वतंत्रता के शिकार’ के रूप में सूचीबद्ध है। जबकि भारतीय अदालतों में वह अभी भी आरोपी है, जिसे बार-बार प्रयासों के बाद भी जमानत नहीं मिल रही। यूएससीआईआरएफ की यह लिस्टिंग विवादास्पद है, क्योंकि यह अदालत के फैसलों से इतर है। आलोचक कहते हैं कि यह विदेशी हस्तक्षेप का उदाहरण है, जहां आरोपी को पीड़ित दिखाया जा रहा है।

If you want to understand why the Delhi High Court dismissed the bail pleas of Umar Khalid, Sharjeel Imam, and seven others in the 2020 Delhi riots “larger conspiracy” case — just go through @UnSubtleDesi’s timeline and listen carefully to former CJI DY Chandrachud.

The facts… pic.twitter.com/S29QzOmE17

— Amit Malviya (@amitmalviya) September 2, 2025

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट के ताजा फैसले में कहा गया कि विरोध प्रदर्शन की आजादी पर सीमाएं हैं, और आरोपियों ने इन्हें पार किया। उमर खालिद की साथी ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र विकल्प बचा है, और जेएनयूएसयू 13 सितंबर को मार्च निकालेगा। लेकिन अदालत के बार-बार इनकार से साफ है कि सबूत मजबूत हैं। ट्रायल में देरी के आरोप भी लगते हैं, लेकिन पुलिस का कहना है कि जांच जटिल है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहा केस

उमर खालिद का केस अब सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहा है, जहां पहले भी याचिका वापस ली गई थी। क्या इस बार नतीजा अलग होगा? यह देखना बाकी है।

 

Topics: कपिल सिब्बलयूएपीएशरजील इमामउमर खालिददिल्ली हाईकोर्ट
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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