भारत सरकार समय-समय पर देश के नागरिकों के लिए विभिन्न योजनाएं लेकर आती है, ताकि समाज के हर वर्ग का विकास सुनिश्चित किया जा सके। इन्हीं प्रयासों के तहत सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान देती है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण योजना है- लखपति दीदी योजना।
लखपति दीदी योजना क्या है- लखपति दीदी योजना की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं को उद्योग के क्षेत्र में आगे बढ़ाने और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना का लक्ष्य है कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। इस योजना के तहत सरकार महिलाओं को बिना ब्याज के 1 लाख से लेकर 5 लाख रुपये तक का लोन प्रदान करती है, जिससे वे अपना खुद का कोई छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें।
किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ- इस योजना का लाभ स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दिया जाता है। लेकिन इस योजना का लाभ पाने के लिए महिलाओं को कुछ पात्रताएं पूरी करनी होती हैं। मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं- महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य होनी चाहिए। महिला के परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। महिला की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। महिला को व्यवसाय करने की इच्छा और योजना होनी चाहिए। यदि कोई महिला इन सभी शर्तों को पूरा करती है, तो वह इस योजना के लिए आवेदन कर सकती है।
योजना का उद्देश्य- इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि महिलाएं खुद का व्यवसाय शुरू करें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारें। सरकार का लक्ष्य है कि देशभर में करीब 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी योजना से जोड़ा जाए। इसका मतलब है कि सरकार चाहती है कि 3 करोड़ महिलाएं सालाना कम से कम 1 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त करें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें।
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कैसे मिलेगा योजना का लाभ- सबसे पहले महिला को अपने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक बिजनेस प्लान तैयार करना होता है। यह प्लान किसी भी छोटे व्यवसाय का हो सकता है जैसे कि सिलाई, ब्यूटी पार्लर, डेयरी, कृषि आधारित व्यवसाय, कुटीर उद्योग आदि। तैयार किए गए बिजनेस प्लान को स्वयं सहायता समूह के जरिए संबंधित सरकारी विभाग को भेजा जाता है। सरकार के अधिकारी उस प्रस्ताव की जांच करते हैं। यदि बिजनेस प्लान व्यवहारिक और उचित होता है, तो उसे स्वीकृति दे दी जाती है। मंजूरी मिलने के बाद महिला को 1 लाख से 5 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। यह लोन बिना ब्याज के होता है, जो कि योजना की सबसे बड़ी विशेषता है। इसके साथ ही महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) भी दी जाती है, जिससे वे अपने व्यवसाय को अच्छी तरह से चला सकें। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलता है। बिना ब्याज का लोन मिलने से आर्थिक बोझ नहीं बढ़ता। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं। परिवार की आय बढ़ती है जिससे जीवन स्तर में सुधार होता है। महिलाएं समाज में अपनी एक पहचान बना पाती हैं।

















