देहरादून। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता में निकाह पंजीकरण को लेकर मुस्लिमों में उदासीनता दिख रही है। यूसीसी के प्रावधानों में मार्च 2010 के बाद जितने भी विवाह,आनंद कारज, निकाह अथवा शादी हुई हैं, उनका पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी में शादी पंजीकरण के लिए समय सीमा को आगे बढ़ाते हुए जनवरी 2026 कर दी है। जानकारी के मुताबिक राज्य में अब तक 381946 शादी के पंजीकरण हुए हैं। जिनमें से 90 फीसदी हिन्दू परिवारों ने विवाह पंजीकरण कराया है। केवल 8 प्रतिशत मुस्लिम परिवारों ने निकाह को यूसीसी पोर्टल पर पंजीकृत किया है। शेष 2 प्रतिशत में सिख पारसी बौद्ध परिवार शामिल हैं।
लिव इन रिलेशन में रहने वाले 55 जोड़ों ने यूसीसी में पंजीकरण करवाया है, जबकि विवाह विच्छेदन संबंधी 270 मामले भी दर्ज किए गए हैं। यूसीसी में विवाह पंजीकरण की अनिवार्यता है क्योंकि इसके बाद ही परिवारों में सम्पत्ति बंटवारे आदि के विषय निर्धारित किए जा सकते हैं।
उत्तराखंड की धामी सरकार यूसीसी में राज्य के सभी परिवारों का पंजीकरण करवाने की जागरूकता के लिए समय समय पर प्रचार अभियान शुरू करती है। सरकार ने हाल ही में सभी जिला अधिकारियों को दस-दस लाख रुपये यूसीसी पंजीकरण प्रचार के लिए जारी किए हैं।

















