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ट्रंप की भारत पर टैरिफ नीति: प्रभाव, प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीतियाँ

भारत के हितों की रक्षा के लिए व्यापार, निवेश, मुद्राओं, भू-राजनीतिक गठबंधनों पर दीर्घकालिक नीतिगत रूपरेखा तैयार करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

Written byके.ए. बद्रीनाथके.ए. बद्रीनाथ — edited by कुलदीप सिंह
Sep 2, 2025, 09:49 am IST
inविश्व, विश्लेषण
US President Donald Trump

डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को स्पष्ट तौर पर अस्थिर माना गया है। इससे अमेरिका और भारत के संबंध सबसे खराब स्थिति में हैं। ट्रंप की यह रणनीति उनके अड़ियल रवैये, अपने हितों को सर्वोपरि रखने और भारत पर दबाव बनाने की ओर इशारा करती है। अमेरिका ने अप्रैल 2025 में 10 प्रतिशत के न्यूनतम टैरिफ प्रस्ताव के साथ सबसे पसंदीदा व्यापारिक सहयोगी होने से लेकर, भारत को उन शत्रु देशों की सूची में डाल दिया गया है, जिन पर वह 50 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाते हैं।

नंबरों और आंकड़ों को छोड़ दें, तो पिछले कुछ दिनों में भारत में शाम के 4 बजते ही काफी शोर, घबराहट और बेचैनी का माहौल रहा है। यह लगभग उसी समय से है, जब ट्रंप ने पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की और फिर बाद में इसे दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया।

यह ट्रंप की पुरानी रणनीति का हिस्सा रहा है, जो वह इन दिनों व्यापारिक साझेदारों को निशाना बनाकर कर रहे हैं। अब उन्होंने इसके लिए भारत को चुना है। टैरिफ लागू करने के लिए 21 दिनों की समय-सीमा की घोषणा इस बात का संकेत है कि ट्रंप व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले बातचीत के लिए तैयार हैं। यह नई दिल्ली के वार्ताकारों पर एक ‘खराब व्यापार समझौते’ पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डालने का एक तरीका है, जिसका अर्थ है भारत में कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी क्षेत्र में अमेरिका को निर्बाध पहुंच प्रदान करना।

ट्रंप का 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाना अनुचित और गैरजरूरी: भारत

अमेरिका के राष्ट्रपति का व्यापारिक समझौता करने से पहले यह कहना, “अभी केवल आठ घंटे ही हुए हैं, देखते हैं क्या होता है। आपको और भी बहुत कुछ देखने को मिलेगा और कुछ अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगेंगे।” उनके ‘वेट, वॉच और स्ट्राइक वाले रवैये की ओर इशारा करती है। ट्रंप के भारत पर तीखे प्रहार और टैरिफ नीति पर उनके रवैये को लेकर पिछले एक पखवाड़े में संसद के भीतर और बाहर भारत की प्रतिक्रिया परिपक्व रही है। भारत ने ट्रंप के 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ संबंधी कार्यकारी आदेश को अनुचित और गैरजरूरी बताया है।

‘ट्रंप की टैरिफ नीति भारत के किसानों को प्रभावित करेगी’

इसको लेकर पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर स्पष्ट रूप से कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इसकी भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं। ट्रंप की टैरिफ नीति भारत के किसानों, कृषि, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण क्षेत्रों को प्रभावित करेंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह किसानों, ग्रामीणों के हितों और श्रम-प्रधान औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

इसके अलावा, वह राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करने और अमेरिका को लेकर विपक्षी दलों के अड़ियल रुख के कारण व्यक्तिगत रूप से बड़ी कीमत चुकाने को तैयार हैं। प्रधानमंत्री मोदी यह भली भांति जानते हैं कि कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलना न केवल आर्थिक रूप से अव्यवहारिक है, बल्कि हिंदुओं, संघ परिवार और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राजनीतिक रूप से भी अव्यावहारिक है। एक विश्लेषण के अनुसार, अगर इस वित्त वर्ष में टैरिफ 25 प्रतिशत पर ही रहे, तो मोदी सरकार को जीडीपी वृद्धि पर 0.2-0.4 प्रतिशत के प्रतिकूल प्रभाव का सामना करना पड़ेगा। जाने माने विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत से अमेरिका को होने वाला संपूर्ण 86.5 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक माल निर्यात गैर-प्रतिस्पर्धी या व्यावसायिक रूप से पूरा हो सकता है।

अमेरिका भारत के लिए बड़ा बाजार

अमेरिका भारत के लिए बड़ा बाजार है और इसके वैश्विक वस्तु निर्यात में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देता है और सकल घरेलू उत्पाद में 2.2 प्रतिशत का योगदान देता है। निकट भविष्य में दोनों देशों के संबंधों में तनाव दिखाई देने लगा है। भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ प्रतिबद्धता को देखते हुए, भारतीय वार्ताकार राहत की सांस ले रहे हैं। ट्रंप की टैरिफ नीति के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं, भारत जो पहले अमेरिका से F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने वाला था उसे अब नहीं खरीदेगा। अब तक की वास्तविक स्थिति यह है कि अमेरिका द्वारा इन विमानों को बेचने की पेशकश के बाद, औपचारिक बातचीत अभी तक शुरू नहीं हुई है और ये शायद शुरू ही न हों।

भारत 28 अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने पर कर सकता है विचार

दूसरा, भारत अपने सेब और अखरोट सहित 28 अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है, जैसा कि 2019 में वाशिंगटन डीसी द्वारा भारतीय इस्पात और एल्यूमीनियम उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक शुल्कों के जवाब में किया गया था। तीसरा, भारत और अमेरिका के बीच तनाव तब तक बढ़ सकता है, जब तक कि अमेरिका अपनी व्यापार और टैरिफ नीतियों में सुधार नहीं करता। चौथा, सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादों, ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों और सेवाओं को अपनाने के लिए एक बड़े स्तर अभियान शुरू किया जा सकता है। पांचवां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में लोगों को ‘स्वदेशी’ अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

छठा, भारत के व्यापार, निवेश, आर्थिक और भू-रणनीतिक संबंधों को पुनर्गठित करना एक बड़ा विकल्प हो सकता है। रूस, चीन और अन्य देशों के साथ रिश्ते मजबूत किए जा सकते हैं। ब्राजील जैसे देशों के साथ मजबूत संबंध बनाना, जिन पर अमेरिका ने उच्च टैरिफ लगा रखा है, एक विकल्प हो सकता है। सातवां, वर्तमान घटनाक्रम भारत के आक्रामक और रक्षात्मक हितों की रक्षा के लिए विदेश नीति को विस्तार दे सकता है। यह दक्षिण-दक्षिण व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने का भी सही समय हो सकता है।

आठवां, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), क्वाड और ब्रिक्स के आगामी सम्मेलन भारत के लिए वैश्विक जुड़ाव के लिए अपनी नीतिगत रूपरेखा को और अधिक सुदृढ़ करने का अवसर हो सकते हैं।

नौवीं बात, एक स्वतंत्र वित्तीय संरचना विकसित करने, अमेरिकी डॉलर से अलग होने या भुगतान में विविधीकरण के लिए ब्रिक्स मुद्रा को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जा सकता है।

दसवीं बात, मुद्राओं और तेल पर मध्यम और दीर्घकालिक नीति लागू करना भारत के लिए फायदेमंद होगा।

(लेखक नई दिल्ली स्थित नॉन-पार्टिशन थिंक टैंक, सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड एंड होलिस्टिक स्टडीज के निदेशक और मुख्य कार्यकारी हैं)

 

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के स्वयं के विचार हैं। आवश्यक नहीं कि पाञ्चजन्य उनसे सहमत हो)

Topics: Donald Trump tariff policyIndia US tariff policyभारत पर अमेरिका की टैरिफ नीतिअतिरिक्त 50 प्रतिशत टैरिफडोनाल्ड ट्रंपअमेरिका टैरिफUS President Donald Trump
के.ए. बद्रीनाथ
के.ए. बद्रीनाथ
निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड एंड होलिस्टिक स्टडीज, नई दिल्ली [Read more]
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