सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE से छूट देने वाले 2014 के प्रामति जजमेंट पर उठाए सवाल
August 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE से छूट देने वाले 2014 के प्रामति जजमेंट पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के प्रामति जजमेंट पर सवाल उठाए, जिसमें अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE एक्ट से छूट दी गई थी। कोर्ट ने शिक्षा के समावेशी दृष्टिकोण को कमजोर करने और असमानता बढ़ाने की चिंता जताई। मामला अब चीफ जस्टिस को भेजा गया है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह — edited by कुलदीप सिंह
Sep 2, 2025, 07:36 am IST
inभारत
supreme court

सुप्रीम कोर्ट

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने 2014 के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट, 2009 से पूरी तरह छूट दी गई थी। यह मामला तब सामने आया जब कोर्ट एक अन्य मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की अनिवार्यता पर बहस हो रही थी। कोर्ट ने इस छूट को लेकर गंभीर चिंता जताई और कहा कि यह शिक्षा के सार्वभौमिक और समावेशी दृष्टिकोण को कमजोर कर सकता है। इस मामले को अब विस्तृत विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजा गया है।

2014 का प्रामति जजमेंट क्या था?

2014 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने प्रामति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट मामले में फैसला सुनाया था। इस फैसले में कहा गया कि RTE एक्ट का सेक्शन 12(1)(c), जो स्कूलों को कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करने का निर्देश देता है, अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए लागू नहीं होगा। कोर्ट का तर्क था कि यह नियम अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता और उनके संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत दिए गए हैं। इस अनुच्छेद में धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार है। इस फैसले ने अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया, जिसका मतलब था कि उन्हें न तो 25% आरक्षण लागू करना था और न ही RTE के अन्य नियमों का पालन करना था।

सुप्रीम कोर्ट की चिंताएं

1 सितंबर, 2025 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने इस छूट पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि RTE से अल्पसंख्यक स्कूलों को पूरी तरह बाहर रखने से शिक्षा का वह सामान्य दृष्टिकोण कमजोर होता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21A में सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की बात कहता है। जस्टिस दत्ता ने लिखा कि यह छूट शिक्षा के समावेशी और एकजुट करने वाले लक्ष्य को तोड़ती है। उनका कहना था कि यह समाज में जाति, वर्ग, धर्म और समुदाय के आधार पर बच्चों को बांटने का काम करता है, जो RTE का मूल उद्देश्य नहीं था। कोर्ट ने यह भी देखा कि इस छूट का दुरुपयोग हो रहा है। कई स्कूल RTE के नियमों से बचने के लिए अल्पसंख्यक दर्जा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) की एक स्टडी का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि इस छूट ने शिक्षा व्यवस्था में असमानता को बढ़ावा दिया है।

TET और अल्पसंख्यक स्कूल

यह मामला तब सामने आया जब बॉम्बे और मद्रास हाई कोर्ट के परस्पर विरोधी फैसलों की वजह से अल्पसंख्यक स्कूलों में TET की अनिवार्यता पर सवाल उठे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2017 में कहा था कि अल्पसंख्यक स्कूलों में भी TET अनिवार्य है, जबकि मद्रास हाई कोर्ट का रुख अलग था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निर्देश दिए कि जिन शिक्षकों को 5 साल से कम सेवा बची है, उन्हें TET पास करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य रहेगा। जिन शिक्षकों को 5 साल से ज्यादा सेवा बची है, उन्हें दो साल में TET पास करना होगा, वरना उनकी नौकरी जा सकती है।

संवैधानिक टकराव

कोर्ट ने इस मामले को संवैधानिक टकराव के रूप में देखा। एक तरफ अनुच्छेद 21A सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार देता है, वहीं अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी संस्थाएं चलाने की आजादी देता है। कोर्ट ने चार सवाल उठाए, जिनमें यह पूछा गया कि क्या RTE को पूरी तरह अल्पसंख्यक स्कूलों से अलग रखना सही है, या इसे केवल कमजोर वर्ग के अल्पसंख्यक बच्चों तक सीमित करना चाहिए था। यह मामला अब बड़े बेंच के पास जाएगा, जो इस छूट की वैधता पर फिर से विचार करेगा।

Topics: अल्पसंख्यक स्कूलअनुच्छेद 21Aअनुच्छेद 30TET अनिवार्यताSupreme CourtPramati Judgmentसुप्रीम कोर्टRTE Actinclusive educationMinority Schoolsशिक्षा का अधिकारArticle 21ARight to EducationArticle 30प्रामति जजमेंटTET CompulsoryRTE एक्टConstitutional Conflict
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

SC का बड़ा फैसला: जज बनने के लिए अब 3 नहीं, सिर्फ 1 साल की वकालत जरूरी

Supreme Court

उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, UGC बोला-नियमों पर हो रहा पुनर्विचार

सीजेपी के कथित आंदोलन नें स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस को करना पड़ा आंसू गैस का इस्तेमाल

CJP का कथित आंदोलन अपराधियों और असामाजिक तत्वों के नियंत्रण में आ गया था, दिल्ली पुलिस के हलफनामे में बड़ा दावा

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार की UAPA गवाह योजना को बताया परियों की कहानी, शाहिद खान केस में त्वरित सुनवाई का निर्देश

supreme court

तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका, फ्रीज खातों से राशि निकासी पर सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

महुआ मोइत्रा, तृणमूल नेता

‘महुआ मोइत्रा अंडों से डर रही हैं? स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खाई थीं’, टीएमसी नेता को SC से झटका

Load More

ताज़ा समाचार

आज का इतिहास

23 अगस्त का इतिहास: चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से मोबाइल सेवा की शुरुआत तक, जानें इस दिन की प्रमुख घटनाएं

रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो)

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ सुनवाई 23 सितंबर को

जनसांख्यिकी परिवर्तन (चित्र प्रतीकात्मक)

यूरोप का जनसांख्यिकीय चौराहा: आंकड़ों के पीछे छिपता जनसांख्यिकीय परिवर्तन

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

हिमाचल: कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालय से जुड़े मामले पर नहीं बुलाई बैठक,  हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, 5 लाख का जुर्माना

झारखंड में छात्रों का प्रदर्शन

‘कपड़े फाड़े, दुपट्टा खींचा’, झारखंड में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का पुलिस पर गंभीर आरोप

Rahul Gandhi

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम में छात्रों को पैसे बांटने का आरोप, मुख्यमंत्री ने कहा-छानबीन की जाएगी

बहुआयामी वीर सावरकर

बहुआयामी वीर सावरकर की लिपि-दृष्टि

अमित शाह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री

‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने की बैठक, घुसपैठ रोकने काे बनेगा त्रिस्तरीय सुरक्षा तंत्र

पूज्य सतगुरु लाल दास महाराज के 51वाँ निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

संतों का मार्गदर्शन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा, देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना प्राथमिकता : सीएम धामी

सज्जन कुमार (फाइल फोटो)

मौत से मिट नहीं जाता गुनाह का न्यायिक इतिहास!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies