सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE से छूट देने वाले 2014 के प्रामति जजमेंट पर उठाए सवाल
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सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE से छूट देने वाले 2014 के प्रामति जजमेंट पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के प्रामति जजमेंट पर सवाल उठाए, जिसमें अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE एक्ट से छूट दी गई थी। कोर्ट ने शिक्षा के समावेशी दृष्टिकोण को कमजोर करने और असमानता बढ़ाने की चिंता जताई। मामला अब चीफ जस्टिस को भेजा गया है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह — edited by कुलदीप सिंह
Sep 2, 2025, 07:36 am IST
in भारत
supreme court

सुप्रीम कोर्ट

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने 2014 के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट, 2009 से पूरी तरह छूट दी गई थी। यह मामला तब सामने आया जब कोर्ट एक अन्य मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की अनिवार्यता पर बहस हो रही थी। कोर्ट ने इस छूट को लेकर गंभीर चिंता जताई और कहा कि यह शिक्षा के सार्वभौमिक और समावेशी दृष्टिकोण को कमजोर कर सकता है। इस मामले को अब विस्तृत विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजा गया है।

2014 का प्रामति जजमेंट क्या था?

2014 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने प्रामति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट मामले में फैसला सुनाया था। इस फैसले में कहा गया कि RTE एक्ट का सेक्शन 12(1)(c), जो स्कूलों को कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करने का निर्देश देता है, अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए लागू नहीं होगा। कोर्ट का तर्क था कि यह नियम अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता और उनके संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत दिए गए हैं। इस अनुच्छेद में धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार है। इस फैसले ने अल्पसंख्यक स्कूलों को RTE के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया, जिसका मतलब था कि उन्हें न तो 25% आरक्षण लागू करना था और न ही RTE के अन्य नियमों का पालन करना था।

सुप्रीम कोर्ट की चिंताएं

1 सितंबर, 2025 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने इस छूट पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि RTE से अल्पसंख्यक स्कूलों को पूरी तरह बाहर रखने से शिक्षा का वह सामान्य दृष्टिकोण कमजोर होता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21A में सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की बात कहता है। जस्टिस दत्ता ने लिखा कि यह छूट शिक्षा के समावेशी और एकजुट करने वाले लक्ष्य को तोड़ती है। उनका कहना था कि यह समाज में जाति, वर्ग, धर्म और समुदाय के आधार पर बच्चों को बांटने का काम करता है, जो RTE का मूल उद्देश्य नहीं था। कोर्ट ने यह भी देखा कि इस छूट का दुरुपयोग हो रहा है। कई स्कूल RTE के नियमों से बचने के लिए अल्पसंख्यक दर्जा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) की एक स्टडी का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि इस छूट ने शिक्षा व्यवस्था में असमानता को बढ़ावा दिया है।

TET और अल्पसंख्यक स्कूल

यह मामला तब सामने आया जब बॉम्बे और मद्रास हाई कोर्ट के परस्पर विरोधी फैसलों की वजह से अल्पसंख्यक स्कूलों में TET की अनिवार्यता पर सवाल उठे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2017 में कहा था कि अल्पसंख्यक स्कूलों में भी TET अनिवार्य है, जबकि मद्रास हाई कोर्ट का रुख अलग था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निर्देश दिए कि जिन शिक्षकों को 5 साल से कम सेवा बची है, उन्हें TET पास करने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य रहेगा। जिन शिक्षकों को 5 साल से ज्यादा सेवा बची है, उन्हें दो साल में TET पास करना होगा, वरना उनकी नौकरी जा सकती है।

संवैधानिक टकराव

कोर्ट ने इस मामले को संवैधानिक टकराव के रूप में देखा। एक तरफ अनुच्छेद 21A सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार देता है, वहीं अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी संस्थाएं चलाने की आजादी देता है। कोर्ट ने चार सवाल उठाए, जिनमें यह पूछा गया कि क्या RTE को पूरी तरह अल्पसंख्यक स्कूलों से अलग रखना सही है, या इसे केवल कमजोर वर्ग के अल्पसंख्यक बच्चों तक सीमित करना चाहिए था। यह मामला अब बड़े बेंच के पास जाएगा, जो इस छूट की वैधता पर फिर से विचार करेगा।

Topics: TET अनिवार्यताSupreme CourtPramati Judgmentसुप्रीम कोर्टRTE Actinclusive educationMinority Schoolsशिक्षा का अधिकारArticle 21ARight to EducationArticle 30प्रामति जजमेंटTET CompulsoryRTE एक्टConstitutional Conflictअल्पसंख्यक स्कूलअनुच्छेद 21Aअनुच्छेद 30
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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