भारत और अमेरिका के बीच संबंध पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक हालिया रिपोर्ट ने इन तनावों की वजह को उजागर किया है। 17 जून 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई एक फोन कॉल ने दोनों नेताओं के बीच पहले से चली आ रही दोस्ती में दरार डाल दी। इस कॉल में ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष को सुलझाने का श्रेय लेते हुए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए समर्थन मांगा, जिसे मोदी ने साफ तौर पर खारिज कर दिया। इस घटना ने न केवल दोनों नेताओं के बीच तल्खी बढ़ाई, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों पर भी गहरा असर डाला।
फोन कॉल और नोबेल पुरस्कार की बात
NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जून को ट्रंप ने मोदी से फोन पर बात की, जब वह कनाडा में जी7 सम्मेलन से वाशिंगटन लौट रहे थे। इस 35 मिनट की बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन के सैन्य संघर्ष को खत्म करवाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने वाला है। ट्रंप का इशारा साफ था कि मोदी भी उनका समर्थन करें। लेकिन मोदी ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस संघर्ष विराम में अमेरिका का कोई योगदान नहीं था और यह भारत-पाकिस्तान के बीच सीधे बातचीत से हुआ।
ट्रंप ने पीएम मोदी को ले लिया हल्के में
मोदी का यह जवाब ट्रंप को नागवार गुजरा। NYT के अनुसार, ट्रंप ने मोदी की बात को हल्के में लिया, लेकिन इस असहमति ने दोनों नेताओं के बीच तनाव को बढ़ा दिया। भारत के लिए पाकिस्तान के साथ संबंध एक संवेदनशील मुद्दा है, और ट्रंप का बार-बार यह दावा करना कि उन्होंने इस मसले को सुलझाया, मोदी को अपमानजनक लगा। भारत ने पहले भी ट्रंप के दावों को खारिज किया था। जुलाई में संसद में बोलते हुए मोदी ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए किसी भी विश्व नेता ने उनसे संपर्क नहीं किया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी पुष्टि की कि संघर्ष विराम के लिए भारत और पाकिस्तान ने सीधे बातचीत की थी।
ट्रंप की नाराजगी और टैरिफ का दबाव
इस फोन कॉल के बाद दोनों नेताओं के बीच बातचीत बंद हो गई। ट्रंप ने अपनी नाराजगी को व्यापारिक नीतियों के जरिए जाहिर किया। जून के बाद, उन्होंने भारत के सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया और फिर रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ थोप दिया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। NYT का कहना है कि ये टैरिफ भारत को ट्रंप की बात न मानने की सजा की तरह थे। इसके अलावा, ट्रंप ने भारत आने की अपनी योजना भी रद्द कर दी, जो क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए थी। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है।
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पाकिस्तान का समर्थन और भारत की नाराजगी
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान ने ट्रंप के दावों का समर्थन किया और जून में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया। पाकिस्तान ने कहा कि ट्रंप की पीछे-पीछे कूटनीति ने संघर्षविराम में मदद की। लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह खारिज किया। भारत का मानना है कि पाकिस्तान के साथ उसका मसला द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं। मोदी ने ट्रंप को साफ कहा कि भारत कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा।
बिगड़ते रिश्तों का असर
यह पूरा प्रकरण भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। एक समय था जब मोदी और ट्रंप की दोस्ती को दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों का प्रतीक माना जाता था। लेकिन इस फोन कॉल और उसके बाद की घटनाओं ने इस रिश्ते को ठेस पहुंचाई। ट्रंप ने हाल के हफ्तों में मोदी से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने उनके फोन नहीं उठाए। जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर एलगेमाइन जायटुंग ने दावा किया कि मोदी ने ट्रंप के चार फोन कॉल्स को नजर अंदाज किया, जो उनके गुस्से और सावधानी को दर्शाता है।
वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति
भारत ने इस पूरे मामले में अपनी स्थिति मजबूत रखी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जब ट्रंप के नोबेल पुरस्कार के दावे पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, “इस सवाल को व्हाइट हाउस से पूछा जाए।” भारत ने साफ कर दिया कि वह अमेरिकी दबाव में नहीं आएगा और अपने हितों की रक्षा करेगा।

















