क्या है बेल होटल विवाद, क्यों चर्चा में ब्रिटेन का आप्रवासी संकट ?
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क्या है बेल होटल विवाद, क्यों चर्चा में ब्रिटेन का आप्रवासी संकट ?

बेल होटल विवाद में कोर्ट ने 138 प्रवासियों को रहने की अनुमति दी, जिससे एपिंग में तनाव बढ़ा। जानें सरकार और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की कहानी।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह — edited by कुलदीप सिंह
Aug 31, 2025, 06:39 am IST
inविश्व
UK Bell Hotel Despute

एपिक में प्रदर्शन करते ब्रिटिश नागरिक (फोटो साभार: GB News)

इंग्लैंड के एसेक्स में बसा छोटा-सा शहर एपिंग इन दिनों चर्चा में है, और वजह है वहां का प्रवासी संकट। बेल होटल में प्रवासियों को ठहराने को लेकर स्थानीय लोग और सरकार के बीच तनाव बढ़ गया है। हाल ही में कोर्ट ऑफ अपील ने एक फैसला सुनाया, जिसके बाद होटल में रह रहे 138 प्रवासियों को वहां रहने की इजाजत मिल गई। इस फैसले ने स्थानीय लोगों में गुस्सा पैदा किया है, जबकि होटल में रह रहे प्रवासियों ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को धन्यवाद कहा है।

क्या है बेल होटल का विवाद?

एपिंग का बेल होटल पिछले कुछ समय से प्रवासियों को ठहराने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। सरकार ने इसे अस्थायी तौर पर प्रवासियों के लिए आवास बनाया था, लेकिन स्थानीय लोगों को ये बात पसंद नहीं आई। उनका कहना है कि इससे इलाके की सुरक्षा और शांति पर असर पड़ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से लोग होटल के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, और कई बार ये प्रदर्शन हिंसक भी हो गए। जुलाई में एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर बोतलें और स्मोक फ्लेयर्स फेंके गए, जिसमें आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए। एक स्थानीय निवासी, सैम कॉलिंगवुड, जो 20 साल से एपिंग में रहते हैं, ने कहा, “ये हमारे लिए भयानक है। हम तनाव में हैं।”

प्रवासियों का पक्ष और कीर स्टार्मर को धन्यवाद

होटल में रह रहे प्रवासियों का कहना है कि वे यहां सुरक्षित जीवन की तलाश में आए हैं, न कि कोई परेशानी खड़ी करने। 24 साल के सोमालिया से आए खादर मोहम्मद ने बताया कि स्थानीय लोगों के लगातार प्रदर्शनों की वजह से वे डर के साये में जी रहे थे। कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने राहत की सांस ली और कहा, “मैं कीर स्टार्मर और उनकी सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं। ये खबर मेरे लिए बहुत बड़ी है।” खादर का कहना है कि वे अच्छे लोग हैं, अपराधी नहीं, और बस एक नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं।

स्थानीय लोगों और नेताओं की नाराजगी

दूसरी तरफ, स्थानीय लोग और कुछ राजनेता इस फैसले से बेहद नाराज हैं। रिफॉर्म यूके के नेता नाइजल फराज ने कहा, “सरकार ने यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स का इस्तेमाल एपिंग के लोगों के खिलाफ किया है।” कंजर्वेटिव नेता केमी बडेनॉक ने भी इसे एक झटका बताया, लेकिन हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि वे और कंजर्वेटिव काउंसिल इस लड़ाई को जारी रखेंगे। स्थानीय काउंसलर जेमी मैकइवर ने होटल को खाली करने की मांग की और कहा कि ये फैसला महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा है।

सरकार का रुख और भविष्य

कीर स्टार्मर की सरकार इस मुद्दे पर दबाव में है। एक तरफ, वे प्रवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं, दूसरी तरफ स्थानीय लोगों की चिंताओं को भी संबोधित करना जरूरी है। सरकार ने इराक के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत अवैध प्रवासियों को वापस भेजा जाएगा, लेकिन क्या ये कदम इस संकट को हल कर पाएंगे, ये देखना बाकी है।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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