भारत हिन्दू राष्ट्र है : RSS सरसंघचालक जी ने कहा- संघ में 3 चीजें छोड़कर सब कुछ बदल सकता है!
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भारत हिन्दू राष्ट्र है : RSS सरसंघचालक जी ने कहा- संघ में 3 चीजें छोड़कर सब कुछ बदल सकता है!

विज्ञान भवन में आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने समानता, हिंदू राष्ट्र और संघ में बदलाव पर दिया बड़ा बयान। जानिए शस्त्रबल, सनातन राष्ट्र और स्थिर विचारों पर क्या कुछ कहा.?

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 29, 2025, 10:05 pm IST
in भारत, संघ @100, दिल्ली

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के तृतीय और अंतिम दिवस पर ‘जिज्ञासा समाधान’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने समानता में विश्वास, हिंदू राष्ट्र के उद्बोधन, संघ में बदलाव को लेकर किए गए प्रश्नों का उत्तर दिया।

प्रश्न – भारत बुद्ध का देश है, इसलिए यहाँ शांति अपेक्षित है। तो फिर संघ युद्ध हेतु शस्त्र की बात क्यों करता है?

  • संघ समानता में विश्वास क्यों नहीं करता?
  • “हिंदू राष्ट्र” क्यों कहा जाता है, “सनातन राष्ट्र” क्यों नहीं?
  • क्या संघ अपने विचारों में समय के साथ बदलाव करता है? यदि हाँ, तो संघ के स्थिर विचार कौन से हैं और किन मुद्दों पर लचीलापन दिखाया जा सकता है?

उत्तर – सबसे पहले, भारत बुद्ध का देश है, यहाँ शांति अपेक्षित है और वास्तव में अपेक्षाकृत शांति है, और रहनी भी चाहिए। लेकिन बाकी सभी देश बुद्ध के देश नहीं हैं। जब वे युद्ध की भाषा बोलते हैं तो हमारे लिए भी शस्त्र आवश्यक हो जाते हैं। जैसे मैंने कल कहा था, हम व्यायाम किसी को पीटने के लिए नहीं करते, वैसे ही हम शस्त्रबल को बढ़ाते हैं तो किसी पर आक्रमण करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी रक्षा के लिए।

भारत का संयम और शस्त्रबल

यदि हम शस्त्र केवल आक्रमण के लिए रखते, तो अब तक यह स्पष्ट दिखाई देता। हमारे पास क्षमता होते हुए भी हमने बार-बार संयम रखा है, क्योंकि हम खून-खराबा नहीं चाहते, हम शांति चाहते हैं। हमारा देश बुद्ध का देश है। लेकिन जब अन्य देश युद्ध करेंगे, तो हमें कम से कम अपनी रक्षा के लिए तत्पर रहना ही पड़ेगा।

संघ की प्रार्थना और शक्ति का भाव

संघ की प्रार्थना में भी यही भाव है — “अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम” अर्थात हे प्रभु! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके। हमने यह कभी नहीं माँगा कि हम दूसरों को जीतने वाली शक्ति प्राप्त करें। इसलिए इतना आवश्यक तो है और उसका होना चाहिए।

समानता और विविधता पर संघ का दृष्टिकोण

जहाँ तक समानता का प्रश्न है, संघ समानता में विश्वास करता है। संघ मानता है कि समाज में विशिष्टता और विविधता है, और उन सबकी मान्यता स्वीकार्य है। परंतु इसके बावजूद हम सबकी एक समानता भी है। उसी के आधार पर हिंदुत्व है और उसी के आधार पर संघ है।

“हिंदू राष्ट्र” और “सनातन राष्ट्र” की अवधारणा

अब “हिंदू राष्ट्र” या “सनातन राष्ट्र” की बात पर— यदि हम “सनातन राष्ट्र” कहें तो लोग भ्रमित हो सकते हैं। जबकि “हिंदू राष्ट्र” कहने से बात तुरंत स्पष्ट हो जाती है, यह हमारा अनुभव है। इसलिए हम “हिंदू राष्ट्र” शब्द का प्रयोग करते हैं।

संघ के स्थिर और परिवर्तनशील विचार

संघ समय के साथ अपने विचारों में बदलाव करता है। लेकिन कुछ विचार स्थिर हैं-

  1. व्यक्ति निर्माण — व्यक्ति के निर्माण से समाज के आचरण में परिवर्तन संभव है, और यह संघ ने करके दिखाया है।
  2. समाज का संगठन — समाज को संगठित करो, बाकी परिवर्तन अपने आप होते हैं। गाड़ी हमेशा घोड़े के पीछे चलती है, घोड़े के आगे नहीं। पहले समाज बदलता है, तब व्यवस्थाएँ सुधरती हैं, क्योंकि व्यवस्था चलाने वाले लोग समाज से ही आते हैं और समाज के वातावरण का उन पर प्रभाव होता है।
  3. हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है।

इन तीन बातों को छोड़कर, बाकी सभी विषयों पर संघ समय और परिस्थिति के अनुसार बदलाव कर सकता है।

Topics: सनातन राष्ट्रसंघ बदलावमोहन भागवत भाषणसमानता पर मोहन भागवतRSSRSS विचारधारादिल्ली विज्ञान भवन कार्यक्रमRSS व्याख्यानमालाRSS हिंदू राष्ट्रसंघ समानता विचारसनातन राष्ट्र बनाम हिंदू राष्ट्रRSS बदलावहिंदू राष्ट्रमोहन भागवत समानतापाञ्चजन्य विशेषRSS स्थिर विचारसंघ शताब्दी वर्षसंघ शताब्दी कार्यक्रम
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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