चकराता। रुद्रसेना ने एक बार फिर जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर के जंगलों में मुस्लिम वन गुज्जरों की घुसपैठ पर अपना विरोध दर्ज कराया है। रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड हिमाचल लंबे समय से उत्तराखंड के अंदर अवैध कब्जों के खिलाफ आवाज उठा रही है तथा चकराता विधानसभा के तहसील त्युनी में जगभ जगह हूए कब्जे पर कानूनी कार्रवाई कर जमीन मुक्त कराना चाहती है।
कुछ दिनों पहले जिलाधिकारी देहरादून द्वारा वन गुज्जरों के अवैध जमीन मामले में एक संयुक्त जांच टीम बनाई गई थी, जिसमें 15 दिन का समय दिया गया था। लेकिन पांच माह से ऊपर हो गए हैं। रुद्रसेना के संयोजक राकेश उत्तराखंडी ने बताया कि अभी तक यह पता नहीं चला की जांच कहां तक पहुंची तथा कार्यवाही क्या हुई है यदि जांच हुई है तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
रुद्रसेना ने कहा कि मुस्लिम वन गुज्जरों द्वारा जनजाति क्षेत्रों के जंगल की जमीन कब्जाई गई है। कुछ लोगों को गेडी खता हरिद्वार में भी जमीन मिल चुकी है तथा वास्तविकता छुपाई जा रही है।
राकेश उत्तराखंडी बताते हैं कि कुछ लोगों को तहसील त्यूनी क्षेत्र में पट्टे मिल चुके थे। यह लोग खानाबदोश की श्रेणी में आते थे लेकिन जमीन मिलने के बाद ये जमींदार हो गये और इन्होंने समाज को गुमराह कर लगातार वन विभाग से परमिट लिया। यह लोग परमिट लेकर उच्चदाम में उसे रहदारी को भेजते हैं तथा बाहरी वन गुज्जरों को उत्तराखंड ला रहे हैं।
रुद्र सेना का आरोप है कि सैकड़ों बीघा जमीन मुस्लिम वन गुज्जरों को दी गई। राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि जो हमारे क्षेत्र के निवासी नहीं है बल्कि घुमंतु मुस्लिम वन गुज्जर थे उन्हें अवैध रूप से जमीन दी गई है। तत्काल पूरी जमीन जौनसार बावर को सौंपी जाए। कालसी जनता दरबार में जिलाधिकारी देहरादून के जनता दरबार में भी लिखित शिकायत रुद्रसेना द्वारा दी गयी थी, उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड हिमाचल के संघटन मंत्री भानूप्रताप ने कहा कि लंबे समय से हम इस मुद्दे को विभिन्न विभागों के सामने रख चुके हैं, लेकिन अधिकारी कार्यवाही करने के लिए राजी नहीं हैं। हम बड़े कदम की ओर बढ़ रहे हैं।

















