हिंदू धर्म के संरक्षक, आदिवासियों के उद्धारक, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती कौन थे?
July 13, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत उत्तराखंड

हिंदू धर्म के संरक्षक, आदिवासियों के उद्धारक, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती कौन थे?

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जन्म ओडिशा राज्य में हुआ था। प्रारम्भ से ही उनका झुकाव आध्यात्म और त्याग की ओर था। वह शंकराचार्य परंपरा से जुड़े और संन्यास ग्रहण कर "सरस्वती" उपाधि से विभूषित हुए।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Aug 23, 2025, 10:45 am IST
in उत्तराखंड
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती आधुनिक भारत के उन महान संतों में से एक थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन हिंदू धर्म, जनजातीय समाज और भारतीय संस्कृति के संरक्षण और उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनका जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और देशभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। वह न केवल एक संत थे बल्कि एक समाज सुधारक, शिक्षक और धर्म रक्षक भी थे।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जन्म ओडिशा राज्य में हुआ था। प्रारम्भ से ही उनका झुकाव आध्यात्म और त्याग की ओर था। वह शंकराचार्य परंपरा से जुड़े और संन्यास ग्रहण कर “सरस्वती” उपाधि से विभूषित हुए। साधु जीवन अपनाने के उपरांत उन्होंने अपना समूचा जीवन ओडिशा के आदिवासी एवं वंचित समाज के बीच बिताया। उन्होंने आदिवासी अंचलों में अनेक आश्रम, गुरुकुल और विद्यालय स्थापित किए। उनके प्रयासों से हजारों आदिवासी बच्चे संस्कारवान शिक्षा प्राप्त कर समाज के मुख्यधारा से जुड़े। उन्होंने आदिवासी समाज को उनके मूल धर्म, संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का कार्य किया।

उनका स्पष्ट मत था कि आदिवासी हिंदू धर्म का अभिन्न अंग हैं और उन्हें अपनी जड़ों से विचलित नहीं होना चाहिए। स्वामी जी ने गौरक्षा के लिए अनेक प्रयास किये। उनके आश्रमों में गौशालाएँ थीं जहाँ गायों की सेवा और सुरक्षा की जाती थी। उन्होंने नशीली दवाओं के दुरुपयोग, बुराइयों और अंधविश्वासों के खिलाफ अभियान चलाया।आदिवासी समाज को स्वच्छ, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उनका योगदान ऐतिहासिक है। स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती ने आदिवासी समाज में हिन्दू पर्व-त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान और संस्कारों को पुनः जीवित किया। उन्होंने भगवद्गीता, रामायण, महाभारत आदि के पठन-पाठन की परंपरा को बढ़ावा दिया। स्वामी लक्ष्मणानन्द का प्रभाव इतना गहरा था कि ओडिशा के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में हिन्दू समाज का पुनर्जागरण हुआ। उनकी प्रेरणा से आदिवासी समाज धर्मांतरण के षड्यंत्रों से जागरूक हुआ। उन्होंने समाज को एकता, आत्मगौरव और धर्मनिष्ठा का पाठ पढ़ाया।

23 अगस्त 2008 को जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जब स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती अपने आश्रम में भजन-कीर्तन कर रहे थे, तभी नृशंस षड्यंत्र के तहत उनकी हत्या कर दी गई। इस क्रूर घटना ने सम्पूर्ण राष्ट्र को झकझोर दिया। उनका बलिदान केवल ओडिशा या आदिवासी क्षेत्र के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण हिन्दू समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। स्वामी लक्ष्मणानन्द का सम्पूर्ण जीवन हिन्दू समाज की सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने जंगल-जंगल घूमकर आदिवासी भाई-बहनों में यह भावना जगाई कि वे हिन्दू संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। उनकी सेवा से लाखों लोगों का जीवन परिवर्तित हुआ। स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती जी का जीवन साधना, सेवा, त्याग और राष्ट्र-धर्म रक्षा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने जिस आदिवासी समाज को शिक्षा, संस्कार और धर्म की ज्योति दी, वही आज उन्हें “आदिवासी संत” और “धर्मरक्षक” के रूप में स्मरण करता है। उनका बलिदान हमें यह स्मरण कराता है कि जब-जब धर्म पर आघात होगा, तब-तब ऐसे संत समाज को नई दिशा देंगे।

Topics: Protection of ReligionUttarakhand NewsHinduIndian Culturetribal societyUttarakhand Latest NewsSwami Lakshmanananda Saraswati
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून-ऋषिकेश हाईवे पर बड़ा बदलाव! 754 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, एलीफेंट अंडरपास भी बनेंगे

प्रतीकात्मक तस्वीर

बद्री-केदार मंदिर के चढ़ावे पर बड़ा विवाद, FIR दर्ज; जांच शुरू

प्रतीकात्मक तस्वीर (AI generated image)

थाईलैंड में खुदाई के दौरान मिले 2,100 साल पुराने भारतीय सोने के छल्ले, ब्राह्मी लिपि ने बढ़ाई इतिहासकारों की उत्सुकता

आरोपी गिरफ्तार

हरिद्वार में नकली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़, ₹50 हजार की जाली करेंसी और उपकरण बरामद

प्रतीकात्मक तस्वीर

नंदा देवी राजजात की तैयारियां अंतिम चरण में, डीएम ने यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं का लिया जायजा

नशामुक्त भारत के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम, गायत्री परिवार के साथ मिलकर चलाएगी देशव्यापी अभियान

Load More

ताज़ा समाचार

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय सड़क संपर्क विकसित करना हमारी प्राथमिकता: नितिन गडकरी

क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना? 21 से 60 साल तक की महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 2500 रुपये; जानिये कैसे मिलेगा ये लाभ

कर्नाटक में गिरफ्तार हुई पाकिस्तानी महिला और उसका बेटा

कर्नाटक में पाकिस्तानी महिला और उसका बेटा गिरफ्तार, फर्जी पहचान से बनवाए राशन कार्ड और वोटर आईडी

अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर फहराती धर्म ध्वजा

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में निकली सीईओ की वेकेंसी

शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

CM शुभेंदु अधिकारी ने की घोषणा-पश्चिम बंगाल में रथयात्रा समितियों को मिलेगी 5-5 लाख की सरकारी सहायता

अयोध्या में स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज और श्री कृष्ण मोहन मीडिया को उन वस्तुओं को दिखाते हुए, जिनके बारे में कहा गया कि वे गायब हैं।

असहज अवश्य किन्तु आस्था अडिग

US-Iran War: अमेरिका ने ईरान में मचाई तबाही, पहली बार US फाइटर प्लेन, एरियल ड्रोन और वन-वे अटैक सी ड्रोन से हमला

supreme court

जानिये राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? अब अगली सुनवाई 20 जुलाई को

बंगाल में 136 साल पुरानी मस्जिद में नमाज पर रोक, CM शुभेंदु अधिकारी ने बताया ऐसा क्यों हुआ? पूरा मामला जानिये

अंतरराष्ट्रीय फिजिक्स ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने जीते 5 स्वर्ण पदक

अंतरराष्ट्रीय फिजिक्स ओलंपियाड में भारत ने सभी 5 स्वर्ण जीते, संयुक्त रूप से विश्व में पहला स्थान, पीएम मोदी ने दी बधाई

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies