धामी सरकार द्वारा विधानसभा में पारित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ विधायक एवं बसपा नेता हाजी मुहम्मद शहजाद ने कहा है कि यह विधेयक मुसलमानों पर शिकंजा कसने के लिए लाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि धामी सरकार जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन करने जा रही है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के अन्य धर्मों सिख, पारसी, बौद्ध, ईसाई और जैन को भी धार्मिक और आधुनिक शिक्षा देने के लिए प्रेरित करना है।
इसके लिए धार्मिक शिक्षण संस्थाओं को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता और प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कानून में अब मदरसों को स्कूलों में परिवर्तित किया जाएगा और उन्हें संबद्धता या मान्यता के लिए स्कूल के नियमों का पालन करना होगा। उक्त विधेयक के पारित होने पर बसपा विधायक ने धामी सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक मुसलमानों पर शिकंजा कसने के लिए लाया जा रहा है। इनमें ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो आपत्तिजनक हैं। विधायक शहजाद का कहना है कि धामी सरकार एक के बाद एक ऐसे फैसले ले रही है जो मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रहे हैं।
इस विधेयक को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि हाल ही में देवभूमि उत्तराखंड में 237 अवैध मदरसों को बंद किया गया, पंजीकृत या अवैध मदरसों में छात्रवृत्ति में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए और यह मुद्दा संसद में भी उठा और राज्य सरकार ने इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया है। तुष्टिकरण की राजनीति के लिए अब तक केवल मुसलमानों के लिए मदरसा बोर्ड का गठन किया गया, जबकि प्रदेश में जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख आदि धर्मों के भी शिक्षण संस्थान हैं, जिन्हें अल्पसंख्यक होने का लाभ नहीं मिल रहा था। हमारी सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के सभी वर्गों के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने का निर्णय लिया है। हमने एक समान शिक्षा की दिशा में कदम उठाया है और उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य होगा। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पारित हो चुका है, राजभवन से मंजूरी मिलते ही हम इस पर आगे काम करेंगे। हालांकि, मदरसा बोर्ड को खत्म करने को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में काफी हलचल मची हुई है। भाजपा इसे पुष्कर सिंह धामी का मास्टर स्ट्रोक मान रही है, जबकि कांग्रेस और बसपा को इस पर कड़ी आपत्ति है।

















