उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में एक गांव का नाम पहले ‘खूनी’ था, जिसे अब बदलकर ‘देवीग्राम’ रख दिया गया है। गांव के लोगों की यह मांग थी कि पुराने नाम से गांव की छवि खराब होती है, इसलिए नाम बदला जाए। इस मांग को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया और केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा। केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद, उत्तराखंड सरकार के राजस्व विभाग ने इस नाम परिवर्तन की अधिसूचना जारी कर दी है।
राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह फैसला जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गांव के लोग कई वर्षों से इस नाम को बदलवाने की कोशिश कर रहे थे। उनका मानना था कि ‘खूनी’ नाम गांव की छवि को खराब करता है और नई पीढ़ी पर इसका गलत असर पड़ता है। गांव की ग्राम प्रधान इंदिरा जोशी ने बताया कि यह मांग कई दशकों से की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने पूरा कर दिया है। पूरे गांव में इस फैसले को लेकर खुशी का माहौल है और सभी लोगों ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार का आभार जताया है।
नाम बदलने की प्रक्रिया- उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था। केंद्र से अनुमति मिलने के बाद, राज्य सरकार ने राजस्व विभाग के माध्यम से विधिवत अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नाम बदलने से पहले से चल रही किसी भी कानूनी प्रक्रिया या दस्तावेजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सभी कानूनी कार्यवाही पहले की तरह ही वैध मानी जाएगी। इस विषय की जानकारी अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद अजय टाम्टा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से साझा की। उन्होंने लिखा, “जन-जन की भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए, आज पिथौरागढ़ क्षेत्र में स्थित ग्राम ‘खूनी’ का नाम परिवर्तित कर ‘देवीग्राम’ किए जाने की अधिसूचना प्रदेश सरकार ने जारी कर दी है।”
नाम ‘खूनी’ कैसे पड़ा- ‘खूनी’ गांव के नाम को लेकर कोई आधिकारिक ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन गांव के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों के बीच दो प्रमुख कहानियां प्रचलित हैं। पहली कहानी के अनुसार, अंग्रेजों के शासनकाल में जब अंग्रेज इस गांव में आए, तो गांव वालों के साथ उनका संघर्ष हुआ। ग्रामीणों ने मिलकर उनका विरोध किया और कथित रूप से कई अंग्रेज सिपाहियों को मार गिराया। इसी कारण इस गांव को ‘खूनी’ नाम से पुकारा जाने लगा। दूसरी कहानी यह है कि पहले इस गांव का नाम ‘खोली’ था। जब अंग्रेज यहां आए तो वे इस नाम को सही ढंग से उच्चारित नहीं कर पाए और ‘खोली’ को ‘खूनी’ कहने लगे। धीरे-धीरे यह नाम प्रचलित हो गया और आधिकारिक रूप से भी इस्तेमाल होने लगा।
‘देवीग्राम’ नाम क्यों- गांव का नया नाम ‘देवीग्राम’ रखा गया है। नाम बदलने की घोषणा के बाद गांव में जश्न का माहौल है। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटीं और सरकार के इस फैसले की सराहना की।

















