देहरादून । ऐसे नाम भी बदले जाते हैं। गांवों के, शहरों के और देशों के नाम अलग अलग समय पर अलग अलग कारणों/ आधारों पर रखे या बदले जाते हैं। यह प्रक्रिया इन दिनों भी जारी है और चर्चा में भी है। लेकिन चर्चा कुछ ही नामों की होती है। एक दिलचस्प नाम परिवर्तन पिछले दिनों उत्तराखंड सरकार ने किया। पिथौरागढ़ जिले में एक गांव का नाम था खूनी। यह नाम जब भी रखा गया, तब इसके पीछे जो भी तर्क रहा हो, लेकिन आज ये नाम अच्छा नहीं लगता।
रिटायर अधिकारी ने उठाया जिम्मा
इससे हिंसा की बू आती है। तो नई पीढ़ी को लगता था कि यह नाम बदलना चाहिए। वे अपने स्तर पर बहुत समय से इस अभियान में जुटे थे। लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। इस गांव से निकले ललित मोहन जोशी, जो ओएनजीसी में वरिष्ठ पद से रिटायर हुए हैं, उन्होंने कागजी कार्रवाई को अपने हाथ में लिया, वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिले।
देवीग्राम नाम से जाना जाएगा ग्राम
सीएम धामी , चूंकि भावना को समझते हैं, इसलिए उन्होंने भी इसे तेजी से आगे बढ़ाया। गृह मंत्रालय से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करवाई। अंत में मेहनत रंग लाई और नतीजे के तौर पर यह आदेश सामने है। अब यह गांव “देवीग्राम” नाम से जाना जाएगा।
नाम से उत्पन्न होती थी असहजता
वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह कहते है खूनी नाम बहुत पहले बदला जाना चाहिए था, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लिया और ये एक अच्छा और नेक काम हुआ क्योंकि जब भी स्थानीय लोग कहीं दस्तावेजों में अपने गांव का नाम लिखते तो पढ़ने वाले भी असहज हो जाते थे।

















