एक और मुस्लिम देश निकाल रहा दूसरे मुस्लिम देश के 20 लाख 'घुसपैठिए', उतर रहा मुस्लिम ब्रदरहुड का मुलम्मा!
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एक और मुस्लिम देश निकाल रहा दूसरे मुस्लिम देश के 20 लाख ‘घुसपैठिए’, उतर रहा मुस्लिम ब्रदरहुड का मुलम्मा!

मुस्लिम ब्रदरहुड की बातें करने वाले इस्लामवादी इस पर मुंह सिले हुए हैं कि मुस्लिम देश दूसरे मुस्लिमों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Aug 19, 2025, 02:55 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
हजारों अफगानी भीषण गर्मी में बिना पर्याप्त संसाधनों के ईरान-अफगानिस्तान सीमा पर बदहवास से पड़े हैं (File Photo)

हजारों अफगानी भीषण गर्मी में बिना पर्याप्त संसाधनों के ईरान-अफगानिस्तान सीमा पर बदहवास से पड़े हैं (File Photo)

कट्टर इस्लामी जिन्ना के देश पाकिस्तान के बाद अब एक अन्य मुस्लिम देश ने उन मुसलमानों को अपने यहां से बाहर करने की घोषणा की है जो बिना इजाजत उनके यहां घुस आए थे, या जिनके पास उस देश में रहने के सही कागज नहीं हैं। ये देश है इस्लाम की शिया धारा के अनुयायियों का देश, ईरान। एक मोटे आंकड़े के अनुसार, ईरान में 60 लाख अफगानी जमे बैठे हैं। इसीलिए ईरान के गृह मंत्री ने साफ शब्दों में कह दिया है कि इन अफगानियों को देश से बाहर जाना ही होगा। ईरान सरकार की ओर से हुई यह घोषणा क्रियान्वयन की दृष्टि से टेढ़ी खीर जरूरी साबित होगी लेकिन अब ईरान यह ‘बोझ’ और उठाने को तैयार नहीं है। मुस्लिम ब्रदरहुड की बातें करने वाले इस्लामवादी इस पर मुंह सिले हुए हैं कि मुस्लिम देश दूसरे मुस्लिमों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है। यह मुद्दा क्षेत्र के राजनीति समीकरणों, मानवाधिकार, सुरक्षा और शरणार्थी नीति से जुड़ा हुआ है।

अफगानिस्तान में साल 2021 में तालिबान के एक बार से सत्ता पर ​काबिज होने के बाद उस देश में अस्थिरता और भय का माहौल बना था। उन दिनों अफगानिस्तान के विभिन्न शहरों के जो दृश्य दुनिया ने अपनी आंखों से देखे थे, वे बेचैन करने वाले थे। लाखों अफगानी नागरिकों ने जान बचाने के लिए पड़ोसी देशों—विशेषकर ईरान और पाकिस्तान—में शरण ली थी। ईरान में इस वक्त लगभग 60 लाख अफगानी रह रहे हैं। इनमें से कई बिना वैध दस्तावेजों के हैं, जो अवैध प्रवासी या ‘घुसपैठिए’ की श्रेणी में आते हैं।

ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने कल यह घोषणा की है कि पहले चरण में ऐसे 20 लाख अफगानी नागरिकों को देश से वापस भेजा जाएगा। पहले उन लोगों को वापस भेजा जाएगा, जो बिना कानूनी अनुमति के ईरान में आए हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, केवल 15 दिन में 5 लाख से अधिक अफगानी नागरिकों को ईरान से सीमा पार भेजा जा चुका है

स्वाभाविक ही, ईरान ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित ठहराया है। हाल ही में इस्राएल के साथ हुए संघर्ष के बाद ईरान ने आंतरिक सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। ईरान सरकार में अफगानी शरणार्थियों को लेकर आशंका है कि इनमें से कुछ कट्टरपंथी तत्वों से जुड़े हो सकते हैं या देश की स्थिरता पर उलटा असर डाल सकते हैं।

इसके अलावा, ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और मुद्रास्फीति से जूझ रही है। ऐसे में लाखों शरणार्थियों का बोझ उठाना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्वाभाविक ही, मानवाधिकार संगठनों ने इस निर्णय पर गंभीर चिंता जताई है। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति—राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी और महिलाओं के अधिकारों पर प्रतिबंध—ऐसी नहीं है कि वहां वापस लौटने वाले उसके अपने ही नागरिकों का जीवन सुरक्षित रह सके। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, केवल 15 दिन में 5 लाख से अधिक अफगानी नागरिकों को ईरान से सीमा पार भेजा जा चुका है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, निकाले गए हजारों अफगानी भीषण गर्मी में बिना पर्याप्त संसाधनों के ईरान-अफगानिस्तान सीमा पर बदहवास से पड़े हैं। वहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है, हेरात जैसे इलाकों में स्थिति तो और भी खराब है।

ईरान ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई अप्रवासी-विरोधी नहीं है, बल्कि कानून के तहत की जा रही है। सरकार ने भरोसा दिया है कि निर्वासन की प्रक्रिया पूरी मानवीयता बरतते हुए की जाएगी। राष्ट्रीय प्रवासन संगठन इस प्रक्रिया की निगरानी करेगा।

हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर लोगों को निकाले जाने की प्रक्रिया में यह पक्का करना मुश्किल होता है कि उन सभी के साथ भलमनसाहत वाला व्यवहार हो। कई अफगानी तो वर्षों से ईरान में रह रहे हैं, वहां नौकरी—पेशे में लगे हैं, उनके बच्चे वहीं की पैदाइश हैं। ऐसे में उन्हें अचानक निर्वासित करने की प्रक्रिया का सामाजिक स्तर पर विरोध भी हो रहा है।

दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी ईरान के इस कदम पर चिंता जताई है। अफगानिस्तान पहले से ही खाद्य संकट, बेरोजगारी और आतंकवाद से जूझ रहा है। यदि लाखों लोग एक साथ वापस लौटते हैं, तो देश की स्थिति और बिगड़ सकती है। इससे वहां अस्थिरता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी संकट और गहरा हो सकता है।

Topics: अफगानिस्तानIranrefugeesप्रवासीPakistanafghanistantalibanईरान
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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