उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने पावर कारपोरेशन के अभियंताओं और कर्मचारियों को कई बार चेतावनी दी मगर उसके बाद भी जब कार्य प्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो अब कड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। अभी तक एक अधीक्षण अभियंता और एक अवर अभियंता को निलम्बित किया गया है और एक कर्मचारी को बर्खास्त किया गया है।
कुछ दिनों पहले ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने सभी अधिकारियों को मऊ जनपद में एक जनसभा के दौरान मंच से कहा कि “अब तीन साल का समय बीत गया है। कई बार विनम्रता पूर्वक बताया गया मगर कुछ लोग सुधरने को तैयार नहीं हैं। अब कार्रवाई करने का समय आ गया है।” गत 23 जुलाई को विभाग की बैठक में भी ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल समेत अन्य अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि “मैं यहां पर दुखी होकर आया हूं। लगातार चेतावनी देने के बाद भी सुधार नहीं हो रहा है। पावर कारपोरेशन कोई दुकान नहीं है कि जो पैसा देगा, उसी को बिजली देंगे और जो पैसा नहीं देगा उसको बिजली देने से मना कर देंगे। जिसके पास पैसा नहीं है, उसको भी बिजली देना पड़ेगा। छोटे बकायेदारों की बिजली तुरंत न काटी जाए।”
इसके बाद एक अधीक्षण अभियंता की घनघोर लापरवाही सामने आई। गत 27 जुलाई को बस्ती जनपद के उपभोक्ता भरत पांडेय, सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर ने उनके क्षेत्र में सुबह 10 बजे से विद्युत आपूर्ति नहीं होने की शिकायत प्रशान्त सिंह अधीक्षण अभियन्ता, विद्युत वितरण मण्डल बरती से दूरभाष पर की परन्तु प्रशान्त सिंह जो बस्ती मण्डल में अधीक्षण अभियन्ता के पद पर कार्यरत थे। उनके द्वारा कहा गया कि उन्हें बेकार में फोन मिलाया है। आप अपनी शिकायत 1912 हेल्पलाइन नम्बर पर दर्ज कराएं एवं प्रशांत सिंह द्वारा अपनी वार्तालाप में उपभोक्ता से अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। अधीक्षण अभियंता ने तमाम तरह के राजनीतिक संपर्कों का भी हवाला दिया और बार-बार यही दोहराया कि शिकायत तो टोल फ्री नम्बर पर ही करनी होगी। तभी कुछ हो पायेगा।
इस वार्तालाप का ऑडियो वायरल होने के बाद ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने संज्ञान लिया। कुछ ही देर में प्रबंध निदेशक ने अपने आदेश में लिखा कि “शासन की ओर से 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के अतिरिक्त उपभोक्ता द्वारा फोन पर की गई शिकायत को संबंधित अधिकारी द्वारा शीघ्र निस्तारित किये जाने हेतु स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किये गये हैं। उस क्षेत्र के अधीक्षण अभियन्ता होने के कारण उनका दायित्व था कि वह उपभोक्ता की शिकायत सुनते हुए उसका निस्तारण किये जाने हेतु उपभोक्ता को आश्वस्त करते, परन्तु उनके द्वारा शिकायत नहीं सुनने एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किये जाने के कारण विभाग की छवि धूमिल हुई। प्रशांत सिंह का यह कृत्य कदाचार की श्रेणी में आता है। प्रशांत सिंह अपने कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्वों में लापरवाही बरतने के प्रथम दृष्टया दोषी पाये गये हैं। अतएव इनके विरूद्ध प्रथम दृष्टया अनुशासनात्मक कार्यवाही किये जाने का मामला बनता है। प्रशान्त सिंह अधीक्षण अभियन्ता, विद्युत वितरण मण्डल बत्ती को अग्रेतर जांच एवं अनुशासनिक कार्यवाही किए जाने हेतु तत्काल प्रभाव से निलंबित करता हूं।”
गत 1 अगस्त को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की हुसैनगंज स्थित हेल्पलाइन नंबर 1912 के कंट्रोल रूम पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बहराइच से आए एक उपभोक्ता की शिकायत को फोन का स्पीकर आन करके सुना। शिकायत मिलने पर एक कर्मचारी को बर्खास्त किया गया। गत 4 अगस्त को सीतापुर जनपद में अवर अभियंता ने ट्रांसफार्मर जल जाने के कई दिन बाद भी उसको नहीं बदलवाया। इसके बाद गर्मी से त्रस्त जनता ने राज्यमंत्री सुरेश राही से मिलकर समस्या बताई। राज्य मंत्री सुरेश राही स्वयं मौके पर गए और वहीं से उन्होंने अवर अभियंता से बात की। अवर अभियंता ने बेहद गैर जिम्मेदार तरीके से उनसे बात की। उसके बाद राज्य मंत्री ने जनता के साथ मिलकर ट्रांसफार्मर उतरवाया। इसके बाद उन्होंने ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा से बात की। इस प्रकरण के संज्ञान में आने के बाद ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने सीतापुर जिले के विद्युत विभाग के हरगांव के अवर अभियंता रमेश मिश्रा को निलंबित कर दिया।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि “अवर अभियंता द्वारा अविवेकपूर्ण व्यवहार बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। अवर अभियंता की जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता और अपने कार्य में शिथिलता भी अक्षम्य है। मैंने माननीय मंत्री श्री राही जी से स्वयं बात करने के बाद चेयरमैन UPPCL और एमडी MVVNL को हिदायत दी है कि इस घटना में ऊपर से लेकर नीचे तक के प्रबंधन की गलती दिखती है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। सभी विद्युत कर्मियों को पुनः आग्रह एवं चेतावनी है कि जन भावनाओं की अनदेखी और जनता अथवा जनप्रतिनिधियों के साथ असभ्य व्यवहार के परिणाम गंभीर होंगे।”
ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने बताया कि प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेकर त्वरित और पारदर्शी निस्तारण करने को कहा गया है। 1912 सुविधा के मैनेजर और एमडी सहित संबंधित अधिकारियों को इस सुविधा को और भी प्रभावशाली बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिया गया है। यह मानवीय बातचीत के पूरक के रूप में तकनीक आधारित अच्छी व्यवस्था है। सबसे अनुरोध है कि इसका सदुपयोग करें। निर्बाध और निरंतर विद्युत आपूर्ति करने, विद्युत सेवाओं को बेहतर बनाने तथा उपभोक्ता संतुष्टि बढ़ाने के लिए और ऊर्जा विभाग के कार्यों को जनता के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु UPPCL एवं DISCOM तथा क्षेत्रीय अधिकारियों सहित पूरे प्रबंधन को मैंने अनेक बार लिखित और मौखिक निर्देश दिए हैं। कुछ ही समय के बिजली बिल के छोटे-छोटे बकाया होने पर या उपभोक्ता द्वारा तुरंत बिल जमा करने की तैयारी बताने पर भी कनेक्शन काट दिया जा रहा है। ऐसा करने वाले बिजली कर्मियों पर कार्यवाही की जायेगी।
कुछ लोगों का बिल बकाया होने पर पूरे फीडर या गाँव की लाइन न काटी जाय। उसमें आने वाले उन उपभोक्ताओं की क्या गलती है जो समय से बिल भर रहे हैं। ऐसे फीडर पर जला हुआ ट्रांसफार्मर नहीं बदलना या उच्चीकरण नहीं करना भी न्यायसंगत नहीं है। ट्रांसफार्मर बदलना और राजस्व वसूल करना दोनों प्रक्रिया अलग-अलग है। कई बार फीडर /ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने और बार-बार बिजली ट्रिप होने या लो वोल्टेज होने के बावजूद ट्रांसफार्मर का उच्चीकरण ये कहकर नहीं हो रहा कि ऑफिसियल लोड ज़्यादा नहीं है। या उस पर लाईन लॉस ज़्यादा है। बिजली चोरी रोकना हमारी प्राथमिकता है लेकिन उसके लिए अलग कार्यवाही की जायेगी। चोरी रोकने के लिए बिजली ही रोक देने की बात उचित नहीं है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ट्रांसफार्मर जलने के बाद कई दिन तक रिपोर्ट नहीं होता। अनेक कारणों के साथ इसलिए भी बदलने में विलंब होता है। ट्रांसफार्मर की उपलब्धि से लेकर उसे लगाने में विलंब के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। ग़लत बिल की शिकायतें विशेष चिंता का विषय है। इसके साथ कुछ कर्मियों के भ्रष्टाचार की भी शिकायतें आती रहती हैं। कंप्यूटर जनित बिल भी ग़लत हो रहे हैं। इन प्रक्रियाओं में हो रही त्रुटि पर पूर्ण विराम लगना आवश्यक है। रिपेयरिंग या मेंटेनेंस के नाम पर एक ही फीडर पर दिन में कई बार प्लांड शटडाउन लेने के कारण लोगों को बिजली ट्रिपिंग का सामना करना पड़ता है। यह अपने आप में अप्रिय है। साथ ही बिजली के संयंत्र भी खराब हो जाते हैं। इसलिए मेंटेनेंस कार्य करना आवश्यक हो तो सामान्य रोस्टिंग के समय किया जाय। अन्यथा किसी एक फीडर पर दिन में अधिक से अधिक दो बार: (एक बार सुबह और एक बार अपराह्न में) लोगों को पूर्व जानकारी देकर ही शटडाउन लिया जाय। कुशल एवं काम करने वाले संविदा कर्मियों की बड़ी संख्या को हाल में निकाल दिया गया है।
इतना ही नहीं अनेक स्थानों पर उनकी जगह पर मनमाने ढंग से नए और अकुशल कर्मी रखे गए हैं। यह बहुत ही गंभीर बात है। इसकी समीक्षा कर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी। 1912 टोल फ्री नंबर की व्यवस्था अधिकारियों के मानवीय बातचीत का पूरक है। विकल्प नहीं है। इसका अर्थ यह कदापि नहीं हो सकता कि अधिकारी फ़ोन ही न उठावें। इसे तुरंत ठीक करें। टोल फ्री नंबर 1912 एवं अन्य प्रकार से आ रही शिकायतों के निस्तारण हेतु UPPCL और DISCOM के स्तर पर भी डायरेक्टर लेवल अधिकारियों की ड्यूटी तीन शिफ्ट में लगाई जाय। विजिलेंस की टीम कुछ स्थानों में हो रही बड़ी और संगठित चोरी पर ही ध्यान केंद्रित करे।














