India Pakistan Partition : भारत विभाजन से पहले मेरा परिवार सीराजगंज, जिला मुल्तान (अब पाकिस्तान) में रहता था। उस समय मेरी आयु सात वर्ष थी। आज जब कोई विभाजन की बात करता है, तो रोना आता है। तब चारों तरफ अचानक कत्लेआम शुरू हो गया। कट्टरवादियों ने हिंदुओं से कहा कि यदि मुसलमान बन जाओगे, तो बच जाओगे।
इस डर से बहुत सारे हिंदू मुसलमान बन गए। मेरे परिवार वालों पर भी मुसलमान बनने का दबाव डाला गया, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। मुसलमान नहीं बनने वाले हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढ कर मारा गया। ऐसे में मेरे घर वाले भारत आने के लिए तैयार हो गए। पलायन से पहले की एक रात बहुत ही भयानक रही। मेरे दादा, ताया और चचेरे भाइयों को बेरहमी से मार डाला गया।
मेरी दादी और माता-पिता हम भाई-बहनों के साथ एक कमरे में दुबके रहे। पूरी रात दहशत में बीती। संयोग से सुबह अंग्रेजी फौज आई। फौजी एक ट्रक लेकर आए थे, जिसके चालक एक सरदार जी थे। फौजियों ने कहा, ‘जितने भी चढ़ सकते हो, चढ़ो। रास्ते में कोई गिर गया तो उसकी जिम्मेदारी उसी की होगी, फौज की नहीं।’ लोग ट्रक में ठुंस-ठुंसकर बैठ गए, कुछ किसी तरह लटक गए।
फौज ने हमें एक शिविर में छोड़ दिया। शिविर कहां था, वह मुझे याद नहीं। दो दिन तक शिविर में रहे। वहां पर हमने देखा कि एक सुंदर हिंदू लड़की को मुसलमान थानेदार घसीटते हुए ले जा रहा था। यह देखकर वहां मौजूद हिंदू गुस्से में आ गए। सभी ने मिलकर उसका विरोध किया, तो वह दुष्ट पुलिस वाला उसे छोड़कर चला गया।
तीसरे दिन सुबह हम लोग ट्रक से लाहौर की ओर बढ़े। रास्ते में लाल टोपी वाले मुसलमान सिपाहियों ने घेर लिया। ट्रक चालक सरदार जी उतरे और उनसे पूछा कि तुम लोग क्या चाहते हो! सिपाहियों ने कहा कि जितना भी कीमती सामान है, उसे दे दो तब आगे बढ़ो। अभी यह बात हो रही थी कि अचानक से सेना की गाड़ी आ गई और लाल टोपी वाले मुसलमान सिपाही भाग खड़े हुए। फौज की देखरेख में ही हम भारत की ओर बढ़े। दो दिन बाद हम लोग रोहतक पहुंचे। रोहतक में कुछ दिन रहे। इसके बाद प्रशासन ने कहा कि आप लोगों को बनीयानी गांव में जगह मिली है, वहीं जाएं। वहां खेती की जमीन मिली थी। शुरू के छह महीने तो बहुत परेशान रहे। 1956 में पिताजी हौजखास, नई दिल्ली आ गए ।

















