नई दिल्ली: उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली में आई आपदा अभी बीती नहीं है। हफ़्ता बीत गया पर दर्द, संवेदनाएं, उम्मीद और आंसू धराली के हर पत्थर और मलबे में गूंज रही है। अपनों की तलाश, आस और उदासी के बादलों ने जहां पहाड़ की रंगत को फीका किया, वहीं सेना, आईटीबीपी (ITBP), एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के जवानों के जज़्बे और बहादुरी ने पहाड़ के सीने पर मलहम लगाया है। लापता लोगों की तलाश जारी है। सरकार और प्रशासन ने जैसी मुस्तैदी दिखाई है, वो तारीफ़ लायक है। दुष्प्रचार चाहे कितना भी हो, नेक नियती और ज़मीन पर दिखने वाले बचाव और राहत कार्यों के आगे वो टिक नहीं पाता है।
संवेदनाओं पर विचारधारा का टूलकिट चलाने वाले कौन?
कुछ लोगों, ख़ासकर वाम विचारधारा से जुड़ाव रखने वालों ने, पहाड़ियों के दर्द को प्रोपोगेंडा बनाया और उनकी संवेदनाओं पर विचारधारा की टूलकिट चलाकर आपदा में अवसर खोजने का कार्य किया। ये ऐसे लोग हैं जो झूठ फैलाने, दुष्प्रचार करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर एक तरफा प्रस्तुतिकरण के जरिए सरकार की छवि खराब करने के संगठित कार्य में जुटे हुए हैं। ऐसे लोग पत्रकारिता नहीं, दर्द और संवेदनाओं की आड़ में अपने विचारों और विचारधारा को थोपने का कार्य करते हैं। आपदा में अवसर खोजने वाले ऐसे तमाम लोगों ने एक तरफा तथ्यों के जरिए भ्रम फैलाने का कार्य किया है।

संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर निर्माण कार्यों में रोक के आदेश
धराली आपदा के बाद सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक्शन मोड में हैं। उन्होंने उच्च स्तरीय बैठक में अफसरों को निर्देश दिये हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करके सार्वजनिक व निजी निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, हिमस्खलन व अन्य प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों को जल्द से जल्द चिन्हित करें और इन जगहों पर किसी भी नई बसावट या निर्माण कार्य की अनुमति न दी जाए। मुख्यमंत्री धामी ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि आपदा से बचाव के लिए रोकथाम के उपायों को प्राथमिकता देने व संवेदनशील क्षेत्रों में जनहित को ध्यान में रख ठोस व प्रभावी कदम उठाये जाएं।
फिर बढ़ गया था खीर गंगा का जलस्तर, दहशत में आ गये थे लोग
वहीं, आपदा में लापता हुए लोगों का आंकड़ा बढ़ गया है। प्रशासन ने 42 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। जबकि एक लापता का शव बरामद हुआ है। वहीं, हर्षिल व आपदा प्रभावित धराली में फिर से खीर गंगा का जलसस्तर बढ़ा है जिससे लोगों में दहशत है। सोमवार को करीब डेढ़ घंटे हुए बारिश के कारण खीर गंगा का प्रवाह पुराने धराली गांव के घरों की ओर बढ़ने लगा था जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। जिसके बाद बारिश रुकने पर लोगों ने राहत की सांस ली।

वामपंथियों के प्रोपोगेंडे के बीच सेवाभाव से जुटा संघ
जहां वामपंथी आपदा में अवसर खोजते हुए दुष्प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं, राष्ट्रभाव और सेवा भाव के लिए समर्पित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक उत्तरकाशी में आपदा प्रभावितों की मदद में निस्वार्थ भाव से जुटे हुए हैं। गांव-गांव में पहुंचकर संघ के स्वयंसेवक पीड़ितों को राशन वितरित कर रहे हैं। आपदा पीड़ितों तक कपड़े, बर्तन और राशन सामग्री पहुंचाई जा रही है। जहां वाम विचारधारा वाले सामाजिक संगठन, उनके कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर आपदा को लेकर अपने कुंठित विचारों का प्रसार कर रहे हैं, वहीं संघ बिना शोर-शराबे के सबसे पहले धराली पहुंचा और स्वयंसेवकों ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मदद का हाथ आगे बढ़ाया। यही फर्क है सोशल मीडिया पर शब्दों के दुष्प्रचार और जमीन पर होने वाले कार्यों के बीच।

















