कर्नाटक के रायचूर जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हर किसी का दिल छू लेती है। यह कहानी है बिजनगेरा गांव में रहने वाली एक बुज़ुर्ग भिक्षुक महिला रंगम्मा। जो खुद बहुत ही सादा जीवन जीती हैं, लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा है।
मंदिर के लिए दिया जीवनभर की पूंजी- गांव में हाल ही में ग्राम देवता अंजनेय के मंदिर के लिए एक नया ध्वज स्तंभ लगाने की योजना बनाई जा रही थी। इसके लिए गांव में चंदा इकट्ठा किया जा रहा था। उसी समय, रंगम्मा जी अपने छोटे से टिन की छत वाले घर से बाहर आईं और मंदिर समिति को एक थैला पकड़ा दिया। जब समिति ने थैला खोला और उसमें रखे पैसों को गिनना शुरू किया, तो हर कोई चौंक गया। थैले में पूरे 1 लाख 83 हजार रुपये थे। यह वही पैसे थे जो रंगम्मा ने पिछले 30 सालों में धीरे-धीरे बचाए थे। उन्होंने पूरी श्रद्धा और प्रेम से यह रकम मंदिर को दान कर दी।
पहले भी कर चुकी हैं बड़ा दान- रंगम्मा पहले भी गांव के शिव मंदिर के लिए 3 लाख रुपये दान कर चुकी हैं। एक भिक्षुक महिला से ऐसे बड़े दान की उम्मीद नहीं होती, लेकिन उन्होंने दिखाया कि सच्ची अमीरी पैसे से नहीं, दिल से होती है। जब रंगम्मा ने मंदिर को दान दिया, तो उन्होंने बस इतना कहा- “भगवान करे मेरा हिस्सा भी बाकी सबके साथ हो।” उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए। गांव के लोगों ने कहा कि रंगम्मा जैसा दिल बहुत कम लोगों का होता है और उनका यह कदम सबके लिए एक प्रेरणा है।
खुद के लिए कुछ नहीं रखा- रंगम्मा एक बहुत ही सादा जीवन जीती हैं। उनका घर पक्का नहीं है, सिर्फ एक छोटा सा टिन का शेड है। खुद के लिए कोई सुविधा नहीं रखी, लेकिन भगवान और समाज के लिए उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी दान कर दी। वे रोज गांव में घूम-घूम कर भीख मांगती थीं और जो थोड़ा-थोड़ा पैसा मिलता, उसे धीरे-धीरे जमा करती रहीं।

















