मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से थूक जिहाद की घटना सामने आई है। मिसरोद क्षेत्र से वायरल हुए वीडियो में एक व्यक्ति को पानी की बोतल में थूकता है और फिर वही पानी फलों पर छिड़कता है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो आते होते ही हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों ने इसे “थूक जिहाद” करार देते हुए आरोप लगाया कि यह कृत्य न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि खाद्य स्वच्छता नियमों का भी घोर उल्लंघन है। हिन्दू जागरण मंच एवं विहिप के कार्यकर्ता मिसरोद थाने और संबंधित फल दुकान पर भी पहुंचे। मिसरोद पुलिस ने वीडियो की लोकेशन की पुष्टि कर ली है और दो संदिग्ध दुकानदारों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घटना की सटीक तारीख और वीडियो की तकनीकी सत्यता की पुष्टि बाकी है।
हिंदू संगठनों ने इसे सुनियोजित साजिश कहा
हिंदू संगठनों का कहना है कि यह “लव जिहाद”, “ड्रग्स जिहाद” और “लैंड जिहाद” की तरह ही एक सुनियोजित हिन्दू समाज के विरुद्ध सामाजिक षड्यंत्र का हिस्सा है। जो वीडियो सामने आया है, उसमें हेलमेट पहने व्यक्ति को साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे वह बाएं हाथ में माला लिए हुए है। दाएं हाथ में पकड़ी बोतल में मुंह लगाता है और उसमें थूकता है। इसके बाद वह बोतल एक दूसरे व्यक्ति को देता है, जो उसी पानी को कई ठेलों पर रखे फलों पर छिड़कता है।
इस संबंध में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के मध्य भारत प्रांत सह मंत्री जितेंद्र चौहान ने कहा, “यह सिर्फ धार्मिक अपमान नहीं है, बल्कि हमारी सेहत के साथ खुला खिलवाड़ है। पुलिस को ऐसे लोगों को तुरंत जेल भेजना चाहिए और लाइसेंस रद्द करना चाहिए। इसके साथ ही भोपाल शहर के सभी फल वालों की जांच होनी चाहिए जोकि विशेष समुदाय से हैं, उन्हें समझाया जाए कि वे ऐसा न करें।” उन्होंने कहा कि “खाद्य पदार्थों में इस तरह की हरकत महामारी फैला सकती है। प्रशासन को दुकानों पर नियमित निरीक्षण और सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य करना चाहिए। ऐसे अपराधियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई इस तरह की हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।”
खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य का खतरा
एडवोकेट आशुतोष कुमार झा का कहना है कि यह दुष्कृत्य न केवल नैतिक अपराध है, बल्कि Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत गंभीर कानूनी अपराध भी है। इससे बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है। अगर पुलिस जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषियों पर बीएनएस की धारा 153ए (धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना), 270 (संक्रमण फैलाने योग्य लापरवाही), और खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज होने चाहिए, जिनमें कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉ. विनोद बलेचा का कहना है कि थूक के जरिए कई खतरनाक रोगाणु जैसे ट्यूबरक्लोसिस (टीबी), हेपेटाइटिस, फ्लू वायरस और कोविड-19 तक फैल सकते हैं। फलों पर थूक मिला पानी छिड़कना सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है। “यह केवल धार्मिक मामला नहीं, बल्कि गंभीर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी भी है,” वे कहते हैं। पुलिस ऐसे मामलों में सख्ती दिखाए साथ ही जो इस प्रकार का कृत्य कर रहे हैं, उन्हें भी समझाए कि वे ऐसा नहीं करें। यह सभी के स्वास्थ्य के साथ सीधे खिलवाड़ करना है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों पोस्ट इस वीडियो के बारे में शेयर किए गए। #ThookJihad, #BoycottFruitShops और #FoodSafety जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूजर्स ने पुलिस को टैग करके तुरंत गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
'थूक जिहाद': भोपाल में फल विक्रेता की शर्मनाक हरकत pic.twitter.com/mGFHnfuIAM
— sonelal.kushwaha (@KushwahaK45286) August 11, 2025
पहले भी आए कई मामले
भारत के कई राज्यों में पहले भी “थूक मिलाने” के आरोप लगे हैं, चाहे वह मिठाई, रोटी, या अन्य खाद्य पदार्थ हों। हर बार यह बहस छिड़ी है कि ऐसे मामलों को व्यक्तिगत अपराध मानना चाहिए या संगठित षड्यंत्र। भोपाल की यह घटना उस बहस को फिर से जिंदा कर रही है। यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि एक जटिल सामाजिक-धार्मिक-स्वास्थ्य संकट है। यदि कानून का इस्तेमाल सख्ती से नहीं किया गया तो यह पैटर्न दोहराया जा सकता है। साथ ही, प्रशासन के लिए यह एक अवसर है कि वह खाद्य सुरक्षा कानूनों को गंभीरता से लागू करे और सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए पारदर्शी जांच करे।भोपाल का यह मामला याद दिलाता है कि आस्था, कानून और स्वास्थ्य, तीनों की रक्षा एक साथ करना जरूरी है।

















