असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि असम के कुछ जिलों में हालात ऐसे हैं कि एक-एक गांव में 30,000 लोगों के बीच केवल 100 सनातन धर्म के लोग रहते हैं। ऐसे हालात में, यदि ये परिवार कानूनी प्रक्रिया के तहत हथियार का लाइसेंस लेना चाहें, तो उन्हें यह सुविधा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सरमा ने साफ कहा- “सनातन धर्म की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। अगर कोई हिंदू परिवार कठिन परिस्थितियों में रह रहा है और कानून के अनुसार हथियार का लाइसेंस लेना चाहता है, तो सरकार उसका पूरा समर्थन करेगी।” सीएम सरमा ने स्पष्ट किया कि शस्त्र लाइसेंस देने की नीति किसी को डराने या धमकाने के लिए नहीं है, बल्कि यह केवल आत्मरक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में हिंदू परिवार अल्पसंख्यक हैं और खतरे का सामना कर रहे हैं, वे कानून के दायरे में रहकर हथियार का लाइसेंस ले सकते हैं।
असम में कुछ ऐसे ज़िले हैं, जहाँ एक गाँव में 30,000 लोगों के बीच केवल 100 सनातन धर्म के लोग रहते हैं। क़ानूनी प्रक्रिया के तहत, यदि ऐसे परिवार चाहें तो उन्हें Arms Licence मिल सकता है। सनातन धर्म की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। pic.twitter.com/cvJIdfafsn
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) August 10, 2025
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि मई 2025 से एक नई नीति लागू की गई है, जिसका मकसद सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्वदेशी लोगों की सुरक्षा करना है। खासकर वहाँ, जहाँ बांग्लादेशी मूल के मुस्लिम लोग बहुसंख्या में हैं। इसके तहत इच्छुक लोग हथियार के लाइसेंस के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। पूरी जांच और सत्यापन के बाद ही लाइसेंस दिया जाएगा। हिमंत बिस्वा सरमा 2021 में मुख्यमंत्री बने थे। तब से उन्होंने अपराध और उग्रवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार की जानकारी के हिसाब से, पिछले 3 साल में 200 से ज्यादा बार पुलिस की मुठभेड़ हुई है।
कई मामलों में विपक्ष ने इन एनकाउंटर पर सवाल उठाए, लेकिन असम सरकार का कहना है कि यह अपराध और आतंक को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा है। सीएम सरमा का मानना है कि असम को ड्रग्स माफिया, पशु तस्करी और आतंकी नेटवर्क से मुक्त करने के लिए जरूरी है कि अपराधियों के मन में कानून और पुलिस का डर हो। इसी वजह से वह सार्वजनिक मंचों से भी पुलिस को कठोर कार्रवाई का संदेश देते रहते हैं।

















