सुप्रीम कोर्ट बनाम इलाहाबाद हाई कोर्ट की जंग: जानिए क्या है पूरा मामला?
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सुप्रीम कोर्ट बनाम इलाहाबाद हाई कोर्ट की जंग: जानिए क्या है पूरा मामला?

जस्टिस प्रशांत कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट में टकराव; 13 जजों ने आदेश लागू न करने की मांग की।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Aug 8, 2025, 08:54 am IST
inभारत
Supreme court Allahabad High court conflict

प्रतीकात्मक तस्वीर

हाल ही में एक अभूतपूर्व घटना में, इलाहाबाद हाई कोर्ट के 13 जजों ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई है। यह मामला जस्टिस प्रशांत कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें उन्हें आपराधिक मामलों से हटाने और रिटायरमेंट तक कोई आपराधिक केस न सौंपने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले ने न केवल इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों के बीच असहजता पैदा की, बल्कि उन्होंने इस आदेश को लागू न करने की मांग के साथ फुल कोर्ट बैठक बुलाने की अपील की है। यह घटना भारतीय न्यायपालिका में एक दुर्लभ और गंभीर स्थिति को दर्शाती है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या था?

4 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट की एक डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन शामिल थे, ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार के एक आदेश की कड़ी आलोचना की। जस्टिस प्रशांत ने एक मामले में आपराधिक कार्यवाही को मंजूरी दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने दीवानी विवाद का मामला माना। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “न्याय का मजाक” करार देते हुए कहा कि यह आदेश या तो “बाहरी प्रभाव” या “कानून की अज्ञानता” के कारण हो सकता है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली को निर्देश दिया कि जस्टिस प्रशांत को आपराधिक मामलों से हटाकर एक वरिष्ठ जज के साथ डिवीजन बेंच में बैठाया जाए और रिटायरमेंट तक उन्हें कोई आपराधिक केस न दिया जाए।

13 जजों का विरोध

इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट के 13 जजों ने 7 अगस्त 2025 को मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली को एक पत्र लिखा। इस पत्र को जस्टिस अरिंदम सिन्हा ने व्यक्तिगत रूप से शुरू किया और 12 अन्य जजों ने इस पर हस्ताक्षर किए। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 24 से 26 को लागू न करने की मांग की गई, जिसमें जस्टिस प्रशांत के खिलाफ टिप्पणियां और निर्देश शामिल थे। जजों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के पास हाई कोर्ट पर प्रशासनिक नियंत्रण (एडमिनिस्ट्रेटिव सुपरिंटेंडेंस) का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस प्रशांत को बिना नोटिस दिए या उनका पक्ष सुने “आधारहीन” और “कठोर” टिप्पणियां कीं, जो सुप्रीम कोर्ट के ही पुराने फैसले, अमर पाल सिंह बनाम उत्तर प्रदेश (2012), के खिलाफ है। इस फैसले में कहा गया था कि जजों पर टिप्पणी करते समय संयम बरतना चाहिए, खासकर जब वे अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद न हों।

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फुल कोर्ट बैठक की मांग

जजों ने अपने पत्र में फुल कोर्ट बैठक बुलाने की मांग की, जिसमें पूरे हाई कोर्ट के जज शामिल हों। उनका कहना था कि इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चर्चा होनी चाहिए और यह तय करना चाहिए कि इसे लागू नहीं किया जाए। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के “लहजे और तेवर” पर भी नाराजगी जताई गई। यह पत्र इलाहाबाद हाई कोर्ट नियम, 1952 के अध्याय III, नियम 9 के तहत प्रसारित किया गया, जो जजों को सामूहिक रूप से अपनी बात रखने की अनुमति देता है।

सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई

13 जजों के इस विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। यह सुनवाई 8 अगस्त 2025 को जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की बेंच के सामने होगी। कुछ सुप्रीम कोर्ट जजों का मानना है कि इस मामले में सख्ती के बजाय नरमी बरती जा सकती थी, और यह बात मुख्य न्यायाधीश को भी बताई गई है।

मामला क्या था?

यह पूरा विवाद एक कंपनी, ललिता टेक्सटाइल, और शिखर केमिकल्स के बीच व्यापारिक लेनदेन से शुरू हुआ। ललिता टेक्सटाइल ने शिखर केमिकल्स को 52,34,385 रुपये का धागा सप्लाई किया, जिसमें से 47,75,000 रुपये का भुगतान हो गया, लेकिन बाकी राशि बकाया थी। ललिता टेक्सटाइल ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक शिकायत दर्ज की, जिसे जस्टिस प्रशांत ने रद्द करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे दीवानी मामला मानते हुए जस्टिस प्रशांत के फैसले को गलत ठहराया।

Topics: Supreme Courtसुप्रीम कोर्टAllahabad High Courtइलाहाबाद हाई कोर्ट
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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