दुनियाभर में अपनी दादागीरी दिखाने की कोशिश कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आगे भारत ने झुकने से इंकार कर दिया है। 60 से अधिक देशों पर टैरिफ के जरिए हमला कर रहे ट्रम्प की हरकतों ने तीन महाशक्तियों को और अधिक करीब लाने का काम किया है। वैश्विक राजनीति में मची हलचलों के बीच खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही चीन जाएंगे, जबकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आने की तैयारी में हैं।
यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर दबाव डाल रहे हैं। कुछ लोग इसे भारत, रूस और चीन (RIC) की तिकड़ी का ट्रंप के खिलाफ एक रणनीतिक कदम मान रहे हैं।
SCO की बैठक में शामिल होने जाएंगे PM मोदी
खबरों के मुताबिक, पीएम मोदी इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेने चीन जाएंगे। यह उनकी सात साल बाद पहली चीन यात्रा होगी। 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई थी। लेकिन हाल ही में BRICS समिट में मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद रिश्तों में कुछ गर्मजोशी दिखी। इस दौरे में मोदी और शी के बीच द्विपक्षीय बातचीत की भी संभावना है। SCO समिट 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में होगी, जहां पुतिन भी मौजूद होंगे। कुछ सूत्रों का कहना है कि मोदी इससे पहले जापान भी जा सकते हैं।
पुतिन का भारत आगमन
दूसरी तरफ, रूस के राष्ट्रपति पुतिन इस साल के अंत तक भारत आने वाले हैं। यह जानकारी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मॉस्को में दी। डोभाल अभी रूस दौरे पर हैं और वहां रूस से तेल खरीद और S-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी जैसे मुद्दों पर बात हो रही है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से गहरी दोस्ती है, और पुतिन का यह दौरा इसे और मजबूत कर सकता है।
ट्रंप का दबाव और RIC की रणनीति
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 50% टैरिफ लगा दिया है। वे चाहते हैं कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे, ताकि यूक्रेन युद्ध में रूस पर दबाव बढ़े। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी नीतियों पर अडिग रहेगा। कुछ लोग मानते हैं कि भारत, रूस और चीन मिलकर RIC फॉर्मेट में कोई रणनीति बना सकते हैं, जिससे ट्रंप के दबाव का जवाब दिया जा सके। हालांकि, अभी तक इसे आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता
भारत अपनी विदेश नीति में स्वायत्तता पर जोर देता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के रूस और अन्य देशों के साथ रिश्ते स्वतंत्र हैं और इन्हें किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। ट्रंप के टैरिफ के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखने और अपनी आर्थिक नीतियों को मजबूत करने का फैसला किया है।
















