हमास को इस बात का अहसास हो रहा होगा कि उसने इजरायल में 1200 लोगों का नरसंहार करके कितनी बड़ी गलती की थी। उसकी एक गलती ने इजरायल को पूरे गाजा को तहस-नहस करने का मौका दे दिया। अब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना मकसद खुले तौर पर स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने गाजा पट्टी पर पूरी तरह सैन्य कब्जे की बात कही है। अमेरिकी फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल गाजा को नियंत्रित करना चाहता है ताकि हमास का खात्मा हो और बंधकों को रिहा किया जा सके।
हालांकि, उनका यह भी कहना था कि इजरायल गाजा को हमेशा शासन नहीं करना चाहता, बल्कि इसे “दोस्ताना अरब देशों” को सौंपना चाहता है। अभी उनकी इस मंशा पर इजरायल के सिक्योरिटी कैबिनेट में चर्चा होनी है, लेकिन मानवीय संगठनों और बंधकों के परिवारों ने इस पर तीखी आपत्ति जताई है।
गाजा में अकाल के हालात
बेंन्जामिन नेतन्याहू के इस बयान का विरोध शुरू हो गया है। संयुक्त राष्ट्र और कई सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि गाजा में अकाल जैसी स्थिति है, जहां लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस साल अब तक 99 लोग भुखमरी से मर चुके हैं, और यह आंकड़ा शायद कम करके बताया गया है। गाजा की 22 लाख आबादी का बड़ा हिस्सा टेंट कैंपों में रह रहा है, और केवल 1.5% कृषि भूमि ही बची है। नेतन्याहू की कब्जे की योजना से लाखों लोगों का विस्थापन और बढ़ सकता है, जिससे मानवीय संकट और गहरा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे “विनाशकारी परिणाम” वाला कदम बताया है।
बंधकों की स्थिति और परिवारों का गुस्सा
7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले में 251 लोग बंधक बनाए गए थे, जिनमें से 49 अभी भी गाजा में हैं। इनमें से 27 को सेना ने मृत घोषित किया है। हाल ही में हमास ने दो बंधकों, रोम ब्रास्लाव्स्की और एव्याटर डेविड, के वीडियो जारी किए, जिनमें वे कुपोषण के शिकार और कमजोर दिख रहे थे। इन वीडियो ने इजरायल में हंगामा मचा दिया। बंधकों के परिवारों ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि उनकी सैन्य रणनीति बंधकों की जान को खतरे में डाल रही है। गुरुवार को, करीब 20 परिवारजन अश्केलोन के पास नावों पर सवार होकर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे, जहां उन्होंने बंधकों की तस्वीरों वाले पोस्टर लहराए और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। परिवारों का कहना है कि सैन्य दबाव के बजाय बातचीत ही बंधकों को सुरक्षित ला सकती है।
आईडीएफ के अधिकारी ही कर रहे विरोध
नेतन्याहू की योजना को उनके अपने सैन्य अधिकारियों से भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने चेतावनी दी है कि गाजा पर पूर्ण कब्जा इजरायल को “लंबे विद्रोह” और मानवीय जिम्मेदारियों के “काले गड्ढे” में धकेल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे बंधकों की जान को और खतरा होगा। इसके अलावा, इजरायल के सैन्य उपकरणों को रखरखाव की जरूरत है और सैनिक थक चुके हैं। नेतन्याहू की गठबंधन सरकार में शामिल कुछ दक्षिणपंथी नेता, जैसे वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच, गाजा में फिर से यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत कर रहे हैं।
इसे भी पढ़ें: भारत-ब्राजील व्यापार पर मोदी-लूला की अहम बातचीत, 20 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर बनी सहमति
अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिक्रियाएं
नेतन्याहू पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। कई देशों, जैसे जॉर्डन, ने उनकी योजना को खारिज किया है। जॉर्डन के एक अधिकारी ने कहा कि अरब देश केवल वैध फिलिस्तीनी संस्थानों के साथ काम करेंगे। संयुक्त राष्ट्र और सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि गाजा में सहायता की आपूर्ति बहुत कम है। उदाहरण के लिए, सोमवार को केवल 95 सहायता ट्रक गाजा में प्रवेश कर सके, जबकि जरूरत 600 ट्रकों की है। हाल ही में, जॉर्डन के एक सहायता काफिले पर यहूदी उग्रवादियों ने हमला किया, जिसकी निंदा हुई।
हमास और बातचीत की स्थिति
हमास ने नेतन्याहू के बयानों को “बातचीत के खिलाफ तख्तापलट” करार दिया है। उनका कहना है कि वे बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते इजरायल गाजा में स्थायी मानवीय गलियारे खोले और हवाई गतिविधियां रोके। दूसरी ओर, नेतन्याहू का दावा है कि हमास सहायता लूट रहा है और गाजा में भुखमरी का दुष्प्रचार कर रहा है।

















