India-Pakistan Partition: एक शाम की बात है। मुझे छोड़कर घर के सभी लोग गुरुद्वारे गए हुए थे। अचानक मोहल्ले में धुआं उठने लगा और शोर मचा कि दुकानों में आग लगाई गई है। इसी बीच हमारे परिवार के सभी लोग गुरुद्वारे से घर आ गए। कहने लगे कि सामान बांधो। सुबह यहां से निकलना ही पड़ेगा। यहां रहना खतरे से खाली नहीं है। सब सामान बांध ही रहे थे कि मुसलमानों का झुंड आया और लूटपाट करने लगा। फिर हिंदू और सिखों को चुन-चुन कर मारा जाने लगा। वह रात बहुत ही भयावह थी। एक-एक पल काटना भारी पड़ रहा था।
आज भी मन को सालता है वो दर्द….
मोहल्ले के लोग कई दिनों तक डर के माहौल में रहे, फिर घर-बार छोड़कर रावलपिंडी पहुंचे। कुछ दिन यहां रहने के बाद हम दूसरी जगह चलते बने। और दुख सहते धीरे-धीरे जालंधर आ पाए। जब भी गांव का मंजर याद करते हैं तो दिल दहल उठता है। घर के साथ जीवन भर की सारी कमाई छोड़कर खाली हाथ पाकिस्तान से भारत आए। बहुत मेहनत करके सब खड़ा किया था। वह दर्द आज भी मन को सालता है।
कोई हमारी सुनने वाला नहीं था…
बंटवारे के समय मेरी शादी हो चुकी थी। उस समय हमारी दो लड़की और एक लड़का था। मेरा बड़ा और संपन्न परिवार था, लेकिन बंटवारे ने हम सबको दूर कर दिया। कई साल तक एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहे। हर तरीके से संकट था। कई बार जीवन बोझिल लगने लगता था। आज जब उन दिनों को याद करती हूं तो दिल भारी हो जाता है। हिन्दू और सिख समाज ने बड़ी पीड़ा झेली उस समय। पता नहीं कितनों को मार दिया, काट दिया। कोई हमारी सुनने वाला नहीं था।
चंद्रकला कपूर, हजारा, पेशावर

















