देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में कुछ ऐसे परिजीवी हैं जो कि सुबह उठते ही कतारबद्ध होकर सरकार की आलोचना का काम शुरू कर देते हैं। उत्तरकाशी में धराली जल प्रलय के दस मिनट बाद ही शुरू हुए रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद इन वामपंथी परिजीवियों ने सरकार को सांसदों को विधायकों को कोसने का काम शुरू कर दिया।
वामपंथी परजीवी का झूठ
एक परिजीवी ने तो दिल्ली में बैठ कर जल प्रलय के यहां की रोड के लिए काटे गए छह हजार से अधिक पेड़ो को ठहरा दिया और सरकार को कोसना शुरू कर दिया। जबकि सच ये है कि उत्तरकाशी से गंगोत्री तक रोड फोर लाइन चौड़ी ही नहीं की गई, न ही कोई पेड़ काटे गए। बीजेपी सरकार ने उत्तरकाशी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए तीन बड़ी जल विद्युत योजनाएं साठ प्रतिशत काम होने के बावजूद रोक कर ठंडे बस्ते में डाल दी।
कभी जोशीमठ तो कभी केदारनाथ तो कभी ऑल वेदर रोड जैसे विषयों पर शोर शराबा मचाने वाले वामपंथी परिजीवियों ने तिब्बत चीन तक सड़क पहुंचाने का विरोध किया और स्वयं दिल्ली दूर बीजिंग पास का नारा बुलंद किया। धराली की घटना के बाद जिस तरह से इन वामपंथी परिजीवियों ने धामी सरकार के प्रति, लोगों में नकारात्मक माहौल पैदा करने की कोशिश की है उससे साबित हो गया कि ये केवल सुबह उठ कर सरकार को कोसना ही जानते हैं। ये कभी धामी सरकार को तो कभी केंद्र की मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करके सवालों के जवाब अपने अनुसार चाहते हैं। जबकि सरकारों के अपने अपने काम करने के तरीके हैं।
सेना-सरकार की बुराई तक सिमटी वामपंथी सोच
इनमें से शायद ही कोई ऐसा परिजीवी होगा जो कि घटना स्थल तक पहुंचा होगा। सड़कों के टूटजाने के बावजूद सरकार ने जिसतरह से भारतीय सेना और आईटीबीपी की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए उसकी तारीफ के दो शब्द यदि ये कह देते तो शायद सैनिकों का मनोबल और स्थानीय लोगों का हौंसला बढ़ जाता। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिसतरह से मौके पर पहुंच कर स्थानीय लोगों के बीच उनका दुख दर्द बांटा, इन्हें उसमें भी खोट नजर आया। इन्हें सांसद महारानी माला लक्ष्मी को लेकर भी शिकायत है और इन्हें पूर्व मंत्री और सांसद अजय भट्ट को लेकर भी शिकायतें नजर आती है।
इन परिजीवियों को सुरक्षित हालात में गंगोत्री में रह रहे तीर्थ यात्रियों को नहीं निकालने पर भी शिकायत नजर आई, जबकि दो दिन मौसम खराब था और सड़के दुरुस्त नहीं थी। 7 अगस्त को जब मौसम खुला तो सीएम धामी स्वयं सुबह छह बजे से ही यात्रियों को हर्षिल और गंगोत्री से निकालने का काम हेलीपेड पर नजर आए आठ हेलीकॉप्टर उत्तरकाशी से उड़ान भर रहे थे जबकि चिनूक हेलिकॉप्टर को गंगोत्री में भेजा गया। दोपहर तक सैकड़ों तीर्थयात्रियों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित स्थान पर उतार कर ऋषिकेश के लिए रवाना भी कर दिया गया।
ग्लेशियर की झीलों पर भी बांट रहे ज्ञान
कुछ परिजीवियों ने नदियों किनारे भवन बनाने के लिए सरकार को कोसा तो कुछ ने ग्लेशियर की झीलों को लेकर ज्ञान देना शुरू किया। हकीकत ये भी है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने ही नदी किनारे 500 फुट तक किसी भी निर्माण के प्रतिबंध को हटाया था और नदियों के किनारे नए बने भवानी की बाढ़ आ गई। बाहर से आए लोगों को नदी गाड़-गधेरो किनारे मलिन बस्तियां बसाने और उनके नियमितीकरण की वोटबैंक की राजनीति भी कांग्रेस और वामपंथियों ने ही की और अब यदि सरकार इन्हें हटाती है तो इन्हें गरीब का हक और अन्य मानव अधिकार के मुद्दे नजर आते हैं। सरकार ने भू कानून लागू किया तो इन्हें तकलीफ इस लिए हो गई कि हमसे क्यों नहीं पूछ कर किया ?
संवेदनशील सीमांत क्षेत्र में उड़ाए ड्रोन
सरकार को हमेशा कोसने वाले एक मीडिया समूह ने आपदा के बाद सीमांत क्षेत्र भटवाड़ी में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाकर दृश्य फिल्माए, यही कृत्य यदि किसी अन्य चैनल या संस्था ने किया होता तो यही परिजीवियों ने सोशल मीडिया में सरकार को घेर दिया होता।
बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान:
“आपदाओं में सभी को एकजुट होकर रेस्क्यू में लगना चाहिए राज्य की छवि खराब करने वाले इन तत्वों पर तरस आता है।”
मुख्यमंत्री धामी का बयान:
जब जब राज्य में संकट आया है तब ऐसे तत्व सक्रिय होजाते है। इनकी नकारात्मक सोच के बीच सरकार और रेस्क्यू एजेंसियां बेहतर कार्य कर रही है। प्राकृतिक आपदाएं उत्तराखंड में आती है और हम सभी धैर्य और हौंसले से इनका सामना करते है।
















