‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान’ के पांचवें सत्र ‘तेवर, तर्क और तरक्की’ में पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव की महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री नितेश नारायण राणे से बातचीत के अंश
आप ओडिशा में हैं, तो मराठी में बात करेंगे या उड़िया में या फिर हिंदी में..?
सबसे पहले, मराठी होने से पहले मैं एक हिंदू हूं और इसलिए इस हिंदू राष्ट्र में मेरी पहचान बनी है। जहां भी जाऊंगा, वहां हिंदी में बात करने में मुझे कोई तकलीफ नहीं है।
महाराष्ट्र में कुछ लोगों ने मराठी भाषा को मराठी अस्मिता का सवाल बना लिया है। आपके अनुसार यह अस्मिता का सवाल है या कुछ लोगों के राजनीतिक अस्तित्व का?
महाराष्ट्र में आएंगे तो मराठी आनी चाहिए, इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन उसके आड़ में यदि आप हिंदुओं को बांटने की कोशिश करेंगे या सिर्फ हिंदुओं को ही निशाना बनाएंगे, तो न हमारी महाराष्ट्र सरकार इसे सहन करेगी और न हम जैसे हिंदुत्वनिष्ठ। ईंट का जवाब पत्थर से देना हमें अच्छी तरह आता है। उनमें (ठाकरे बंधु) मराठी की शक्ति दिखाने की हिम्मत है तो किसी मुस्लिम मोहल्ले में जाकर क्यों नहीं कहते कि वे मराठी सीखें? क्यों नहीं कहते कि अजान मराठी में होनी चाहिए?
क्या आपकी पार्टी के रहते हुए लोगों को डरना चाहिए? क्या गैर-मराठियों को बाहर निकाल दिया जाएगा या यूपी और बिहारवासियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार होगा?
आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र जी के नेतृत्व में हमारी सरकार हिंदुत्व की सरकार है। हमारी सरकार के रहते हुए किसी भी हिंदू को महाराष्ट्र में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सामने वालों से निपटना हमें अच्छी तरह आता है। सरकार अपना काम करेगी। यदि कोई सरकारी भाषा नहीं समझेगा तो हमें अलग तरीके से बात करना भी आता है। लेकिन हम अपने हिंदू राष्ट्र में, महाराष्ट्र की भूमि पर किसी भी हिंदू की ओर गंदी नजर से देखने की इजाजत नहीं देंगे। हमें मालूम है कि गजवा-ए-हिंद के अंतर्गत कुछ लोग भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहते हैं, महाराष्ट्र में जिहाद फैलाना चाहते हैं।
आपने गजवा-ए-हिंद की बात की। आज सीमावर्ती राज्यों में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम तेजी से फैल रहे हैं। क्या महाराष्ट्र भी इस समस्या से जूझ रहा है। यदि हां, तो इससे कैसे निपटेंगे ?
समस्या हर जगह है। इनका लक्ष्य 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना है। ये लोग अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। कभी लव जिहाद, कभी लैंड जिहाद कर रहे हैं, तो घुसपैठ कर रहे हैं। शुरुआत में ये दोस्त बनकर सामने आते हैं, छोटी नौकरियां करने लगते हैं, फिर धीरे-धीरे मालिक बन जाते हैं। इनका उद्देश्य हर जगह अपनी हरी चादर फैलाना है। ये नाम बदलकर भी काम करते हैं। उदाहरण के लिए, किसी मंदिर के बाहर फूल की दुकान का नाम ‘जय श्रीराम फ्लावर वाला’ होगा, लेकिन अंदर अब्दुल बैठा होगा।
आपको नहीं लगता कि इतिहास में जिनको जगह नहीं मिली, उन्हें पाठ्यक्रम में लाया जाना चाहिए, न कि भाषा पर विवाद किया जाए ?
सभी चीजों को सुधारने के लिए ही देश की जनता ने नरेंद्र मोदी जी को सत्ता सौंपी ताकि हिंदू राष्ट्र को मजबूत किया जा सके। मुझे खुद को हिंदू कहने में कोई शर्म नहीं है। विधायक और मंत्री होने से पहले मैं हिंदू हूं। अगर इस देश में रहकर हिंदुओं की बात नहीं करूंगा, तो क्या पाकिस्तान जाकर करूंगा?
भाषा समरसता बनाए रखने के लिए क्या किया जाए ?
यह विवाद कुछ लोग चुनावी मुद्दा बनाने के लिए खड़ा करते हैं, आपने जिन दो भाइयों का जिक्र किया, उन्हें अपने अस्तित्व के लिए ऐसे मुद्दों की जरूरत है। लेकिन हमारा पूरा महाराष्ट्र और मुंबई हमेशा साथ रहा है। मराठी और अन्य भाषाओं के लोग अच्छे संवाद और संबंध रखते हैं। जब यह विवाद हुआ तो कई मराठी लोगों ने भी कहा कि हिंदुओं को इस तरीके से नहीं बांटना चाहिए। यह केवल एक परसेप्शन है कि बहुत तकलीफ है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। जैसे कि पहलगाम में जब आतंकियों ने हमला किया तो उन्होंने न भाषा देखी, न जात, सिर्फ हिंदू पूछकर गोली मारी। इसलिए हमें इन विवादों में फंसने की बजाय हिंदू बनकर एकजुट रहना होगा।















