इसी साल 27 जुलाई को लंदन के ल्यूटन हवाई अड्डे से ग्लासगो जा रहे एक विमान में 41 वर्षीय भारतीय मूल के अभय देवदास नायक के द्वारा विमान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई तथा डेथ डे टू अमेरिका , डेथ डे टू ट्रम्प, अल्लाह हू अकबर के
नारे लगाए गए जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। कहा जा रहा है कि ये वही अभय देवदास नायक है जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा रहा है। इसके साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को बदनाम करने का षड्यंत्र रच रहा
है।
गिरफ्तार भी हो चुका है
अभय देवदास नायक छत्तीसगढ़ के बस्तर में अर्बन नक्सल के रूप में सक्रिय रहते हुए गिरफ्तार भी हुआ था। अब इसने लंदन के आसमान में उड़ान भरते विमान को बम से उड़ाने की धमकी दे डाली। इसी के साथ अब ये केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी बड़ा खतरा बन गया।
वामपंथ की आड़ में आतंक का खेल
सीपीआई (माओवादी) पार्टी के सक्रिय सदस्य अभय देवदास नायक को को दुष्प्रचार, डिजिटल कनेक्टिविटी, फंडिंग और युवाओं को सरकार के खिलाफ भड़काकर उन्हें हिंसा की ओर धकेलने का कार्य करता था। इसके हाथों में बंदूक की जगह लैपटाप होते थे, जिसके जरिए ये बंदूक की ही तरह हिंसा फैला रहा था। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरोप और खाड़ी देशों से भारत में माहौल बिगाड़ने के लिए फंडिंग की जाती थी। इसके खिलाफ छत्तीसगढ़ पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी किया था। ये बात 2018 की है। बाद में ये जब यूरोप से भारत लौटा तो 1 जून 2018 को इसे दिल्ली एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लिया गया।
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कौन है अभय नायक?
टेक्निकल एक्सपर्ट अभय़ नायक का प्रवक्ता होने के साथ ही उसकी आईटी सेल का चीफ भी है। इसके कुकर्म पहली बार तब सामने आए थे जब वर्ष 2013 में पुलिस को बस्तर के दरभा क्षेत्र से एक आईईडी मिला। वहीं से पुलिस को कुछ नक्सली साहित्य भी मिलते हैं। उनमें से एक पर्चे पर अभय और विकल्प नाम का जिक्र किया गया था। इसके अलावा साथ में दो मोबाइल नंबर 8763873894, 94487654345 और ईमेल आईडी [email protected] नाम की एक ईमेल आईडी भी मिली थी। जब पुलिस ने इसे खंगाला तो अभय नायक के नाम का खुलासा हो गया। पुलिस को पता चलता है कि उक्त ईमेल आईडी को इसी ने बनाया था। साथ ही ये नक्सल क्रांति नाम का एक ब्लॉग भी शुरू किया था। पुलिस को प्रतिबंधित सीपीआई (माओ) की सामग्री भी मिली थी।
मूल रूप से कर्नाटक के बंगलुरू का रहने वाला अभय देवदास नायक माओवादी विचारधाराओं के प्रचारक के तौर पर कार्य करता था। ये दक्षिण एशिया के सबसे बड़े माओवादी संगठन कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑन माओस्ट पार्टी एंड ऑर्गनाइजेशन ऑफ साउथ एशिया (COMPOSA) का एक्टिव मेंबर है ये।
भीमा कोरेगांव हिंसा से भी जुड़ें हैं तार
छत्तीसगढ़ में नक्सल अभियान से जुड़े एक तत्कालीन डीजी थे डीएम अवस्थी। उन्होंने खुलासा किया था कि पुणे में हुई भीमा कोरेगांव की हिंसा से भी इसका लिंक है। पुणे की पुलिस ने जिन आऱोपियों को गिरफ्तार किया था, उनसे इसके सीधे संबंध हैं। हालांकि, उसी दौरान अभय यूरोप चला गया था, लेकिन हिंसा से ठीक पहले यह कोरेगांव गया था। साथ ही 2017-18 के दौरान इसने 2 साल में 18 माओवाद और आतंकवाद प्रभावित देशों का दौरा किया था। इसने उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए पेरिस, नीदरलैंड, बेल्जियम, यूके मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कंबोडिया सिंगापुर समेत कई अन्य देशों से फंडिग इकट्ठी करने की कोशिश की थी। चूंकि ये कंपोसा का सक्रिय सदस्य था, इसलिए ये अक्सर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े देशों का दौरा करता था।
अभय नायक और वामपंथी नेटवर्क का गठजोड़
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद इसने खुलासा किया था कि ये कर्नाटक के राज्य समिति के सचिव रहे साकेत रंजन से प्रभावित था। इसके अलावा ये केरल की गोविंकुट्टी की पत्रिका पीपुल्स मार्च से भी प्रभावित था। उसी दौरान ये सीपीआई के भी संपर्क में आया था। वह साकेत रंजन की मौत के बाद 2006 से ब्लॉग साइट www.naxalrevolution.blogspot.com के लिए लिखता था।
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राष्ट्रविरोधी भावना को भड़का रहा था अभय नायक
बस्तर रेंज के आईजी रहे विवेकानंद सिन्हा बताते हैं कि जो भी दस्तावेज बरामद हुए हैं, उनसे ये सिद्ध होता है कि अभय नायक माओवादी विचारधारा का प्रचार करते हुए युवाओं का ब्रेनवाश कर उनमें राष्ट्र विरोधी भावना को भड़का रहा था। तकनीकी एक्सपर्ट होने के कारण अभय देवदास नायक ने राष्ट्रविरोधी भावना को के ढांचे को मजबूत किया।
वामपंथी/नक्सली के बचाव में उतरे कथित बुद्धिजीवी और छद्म नक्सली
पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (PUDR) ने अभय देवदास नायक की गिरफ़्तारी का विरोध किया है। ये दिखाता है कि किस प्रकार से एक प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े अभय देवदास नायक को बचाने के लिए छद्म सेक्युलर, वामपंथी एनजीओ उतर आए। कथित मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोग अभय की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन और पुलिस की कार्रवाई को अवैध करार दिया।
PUDR जैसे संगठन न केवल देश विरोधी तत्वों को संरक्षण दे रहे हैं, बल्कि ये यूएपीए जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों को कमजोर करने की कोशिशें कर रहे हैं।

















