गत जुलाई को कोच्चि (केरल) में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की राष्ट्रीय चिंतन बैठक आयोजित हुई। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि हम सब जिस शिक्षा से निकले हैं, वह शिक्षा औपनिवेशिक प्रभाव से ग्रस्त थी। आज भारतीय दृष्टि के आधार पर शिक्षा में नए विकल्प देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता स्वयं को योग्य बनाएं, अपना उदाहरण रखें और अन्यों को अपने जैसा बनाएं, इसलिए कार्यकर्ताओं का नियमित प्रशिक्षण जरूरी है। इन सभी के लिए समन्वय जरूरी है, समन्वय का दायरा व्यक्ति से विश्व तक होता है, हमें सबके साथ परस्पर मिलकर चलना है।
समन्वय रखने के लिए धैर्य चाहिए, दूसरों को समझने का स्वभाव चाहिए, अपनापन चाहिए। समन्वय से ही संगठन का विस्तार होता है। न्यास के सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि न्यास का लक्ष्य शिक्षा को एक नया विकल्प देना है। हम 2004 से देश, काल परिस्थिति के अनुरूप कार्य करते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं। हमें शिक्षा के सभी घटकों को जोड़ना है।
हमने शिक्षक, विद्यार्थी, शिक्षण संस्थानों को जोड़ा है। अब अभिभावकों को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। मातृभाषा में शिक्षा न्यास का प्रमुख विषय रहा है। अंग्रेजी माध्यम का भ्रम केवल नीति से नहीं, अपितु मानस से बदलने की बात है। इस विषय पर जन जागरण कर और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में इस विषय पर ज़ोर दिया गया है, हमें शिक्षा नीति का अध्ययन कर उसके क्रियान्वयन की पहल करनी है।
न्यास के सह संयोजक डॉ. राजेश्वर कुमार ने बताया कि बैठक में न्यास के 10 विषयों, 3 आयामों, 3 कार्य विभागों एवं 2 अभियानों की समीक्षा तथा आगामी वर्षों की योजना पर चर्चा हुई। सभी विषयों में संगठनात्मक व क्रियात्मक, दोनों आयामों पर योजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ‘एक राष्ट्र, एक नाम : भारत’ विषय को लेकर देशभर के शैक्षिक संस्थानों में जाएगा तथा अधिक से अधिक संस्थानों में इस विषय को लेकर प्रस्ताव पारित करवाने का प्रयास करेगा।
















