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होम जीवनशैली

लोग हमारा अहित क्यों करते हैं? जानिए प्रेमानंद जी महाराज ने क्या कहा?

प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि संसार में कोई ऐसा जीव या वस्तु नहीं है जो हमारा अहित करने के लिए पैदा हुई हो।

Written byMahak SinghMahak Singh
Aug 3, 2025, 12:57 pm IST
inजीवनशैली
प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज ने एक महत्वपूर्ण सच्चाई समझाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि हमें यह पूरी तरह समझना चाहिए कि इस संसार में कोई भी व्यक्ति या वस्तु हमारे लिए नुकसान पहुँचाने के लिए जन्म नहीं लेती। ऐसा कोई भी प्राणी, कोई घटना, कोई परिस्थिति अपने आप में हमारी बुराई नहीं करती। जो भी कुछ हमारे साथ बुरा होता है, वह हमारी अपनी ही करनी, यानी हमारे कर्मों का परिणाम होता है।

कर्म का अर्थ होता है हमारे द्वारा किए गए कार्य, हमारे विचार, हमारे भाव, और हमारे द्वारा उठाए गए कदम। यह कर्म हमारे जीवन में विभिन्न रूपों में वापस आता है, कभी व्यक्ति के रूप में, कभी किसी घटना के रूप में, कभी किसी परिस्थिति के रूप में। इसलिए यह जरूरी है कि हम यह समझें कि हमारे साथ जो भी बुरा होता है, वह हमारे ही कर्मों की वजह से होता है।जब हम कहते हैं कि किसी व्यक्ति ने हमारा अहित किया, तो असल में वह व्यक्ति हमारे द्वारा पहले किए गए कर्मों का फल लेकर हमारे सामने आया होता है। वह व्यक्ति हमारे लिए एक परीक्षा की तरह है, जो हमारे कर्मों की सजा या परिणाम स्वरूप हमारे जीवन में आता है।

हमारा कर्म ही हमें दुख या खुशी देता है। अगर हमने कभी किसी के साथ छल किया, किसी का नुकसान पहुंचाया, या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई, तो हमारा यह कर्म भविष्य में किसी न किसी रूप में हमें वापस मिलता है। कभी वह रूप किसी व्यक्ति के रूप में आ सकता है जो हमसे छल करता है, कभी वह परिस्थिति के रूप में आती है जो हमें मुश्किलों में डाल देती है।इसका मतलब यह हुआ कि हमारे जीवन में जो भी विपत्ति आती है, वह हमारी अपनी गलतियों और कर्मों का फल होती है। इसलिए अगर हम अपने कर्मों को सुधार लें, तो हमें अपने जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है।

यह भी पढ़ें-

परीक्षा में फेल होने के डर से कैसे छुटकारा पाएं? जानिए प्रेमानंद जी महाराज से

दुनिया में कोई दूसरा हमारे अहित के लिए जिम्मेदार नहीं- प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि संसार में कोई ऐसा जीव या वस्तु नहीं है जो हमारा अहित करने के लिए पैदा हुई हो। इसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से हमारे लिए बुरा करने नहीं आता, बल्कि वह हमारी ही करनी का फल लेकर आता है।अगर हमें कोई नुकसान पहुंचाता है, तो हमें उस व्यक्ति को दोष देने के बजाय अपने कर्मों पर विचार करना चाहिए कि हमने किस कारण से ऐसा फल प्राप्त किया। इस दृष्टिकोण से हम न तो किसी पर क्रोध करेंगे, न ही दूसरों से नफरत करेंगे। बल्कि हम अपने कर्म सुधारने का प्रयास करेंगे ताकि भविष्य में हमें ऐसे परिणाम न भुगतने पड़े।

कर्म सुधारो, जीवन सुधरेगा- जब हमें यह समझ आ जाती है कि हमारा दुख और परेशानी हमारे अपने कर्मों के कारण है, तब हम जीवन को एक नई दिशा में ले जा सकते हैं। हम अपने विचारों और कर्मों में सुधार लाएं, अच्छे कार्य करें, दूसरों के साथ सद्भावना रखें, और सत्य, अहिंसा, और दया के मार्ग पर चलें।

Topics: Premanand Maharajप्रेमानंद महाराज से सवाल जवाबप्रेमानंद महाराज का सफलता पर प्रवचनप्रेमानंद महाराज का मेहनत और प्रयास पर प्रवचनQuestion and Answer with Premanand MaharajPremanand Maharaj sermon on successप्रेमानंद महाराजप्रेमानंद महाराज का प्रवचन
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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