ईरान में इस्लामिक कट्टरता के नए युग का आगाज सा हो रहा है, जहां अपने राजनीतिक विरोधियों की हत्या को इस्लाम में जायज बताया जा रहा है। इजरायल के साथ 12 दिन के युद्ध में मुंह की खाने के बाद ईरान के कट्टरपंथी मौलवी इतने चिढ़े हुए हैं कि अब इस्लामिक कट्टरपंथी मौलाना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या की बात कर रहे हैं। इसी क्रम में तेहरान में 2000 से अधिक मौलवी इकट्ठा हुए और उन्होंने ट्रम्प का खून बहाने को मजहबी तौर जायज करार दिया।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मजहबी तंत्र में ट्रम्प के खिलाफ बयानबाजी तेज हो गई है। इसको लेकर शुक्रवार को कोम मदरसा की ओर से जारी किए गए बयान में मौलवियों ने एक स्वर में कहा कि अब से क्रांतिकारी धैर्य और संयम का वक्त खत्म हो गया है। अब से ट्रम्प का खून और संपत्ति इस्लाम में हलाल होगा। मौलवियों ने कहा कि कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेना हर मुसलमान और स्वतंत्रता प्रेमी पुरुष और महिलाओं के लिए आवश्यक है।
ट्रम्प को बताया क्रूर अपराधी
ईरानी मौलवियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को एक क्रूर अपराधी करार दिया और कहा कि अब देश चुप नहीं रहेगा, बल्कि बदला लेगा। उल्लेखनीय है कि सुलेमानी की बगदाद में हत्या का आदेश 2020 में अपने पहले कार्यकाल में ही ट्रम्प ने ही दिया था। इस दौरान एक प्रस्ताव भी पास किया गया, जिसमें मदरसा छात्रों के साथ ही देशभर के मौलवी शामिल थे। इसमें तेहरान के जुमे की नमाज़ के नेता अहमद ख़ातमी, एक्सपीडिएंसी काउंसिल के सदस्य मोहसेन अराकी और गार्जियन काउंसिल के सदस्य मेहदी शबज़ेंदार शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इन सभी की नियुक्ति अली खामेनेई ने की थी।
बेंजामिन नेतन्याहू की हत्या की कर चुके हैं मांग
गौरतलब है कि इससे पहले इजरायल के साथ 12 दिन के युद्ध में ईरान की बुरी हालत हो गई थी। उसके बाद भी ईरानी मौलवियों ने नेतन्याहू की हत्या की मांग की थी।

















