रूस-यूक्रेन युद्ध में एक और नया मोड़ आ गया है। अब अमेरिका ने रूस के करीब खुले तौर पर अपनी दो परमाणु पनडुब्बियों को तैनात कर दिया है। इस कदम के जरिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रूस को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल ये कदम सिर्फ चेतावनी के लिए है। हालांकि, ट्रम्प इस बात को भूल गए हैं कि वो रूस है, कोई यूक्रेन या ईराक नहीं।
क्या है पूरा मामला?
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, मामला कुछ यूं है कि ट्रम्प ने यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए रूस को 50 दिन का अल्टीमेटम दिया था। लेकिन जब रूस ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो उन्होंने इसे घटाकर 10-12 दिन कर दिया। साथ ही धमकी दी थी कि अगर रूस ने शांति की दिशा में कदम नहीं उठाए, तो वह रूस और उसके तेल खरीदने वाले देशों, जैसे चीन और भारत, पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाएंगे। जवाब में, मेदवेदेव ने सोशल मीडिया पर ट्रम्प को चेतावनी दी कि रूस कोई कमजोर देश नहीं है और उनके पास सोवियत युग की परमाणु हड़ताल की क्षमता है। मेदवेदेव ने कहा, “हर नया अल्टीमेटम युद्ध की ओर एक कदम है, न कि रूस और यूक्रेन के बीच, बल्कि अमेरिका के साथ।”
ट्रम्प का जवाब और पनडुब्बी की तैनाती
मेदवेदेव के बयान को ट्रम्प ने गंभीरता से लिया और तुरंत दो परमाणु पनडुब्बियों को “उचित क्षेत्रों” में भेजने का आदेश दिया। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “शब्द बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और अनजाने में बड़े परिणाम ला सकते हैं। मैं उम्मीद करता हूँ कि ऐसा न हो।” बाद में व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, “हमें अपने लोगों की सुरक्षा के लिए ऐसा करना पड़ा। रूस के पूर्व राष्ट्रपति ने धमकी दी थी, और हम इसे हल्के में नहीं ले सकते।” हालांकि, ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये पनडुब्बियाँ परमाणु हथियारों से लैस हैं या सिर्फ परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हैं। अमेरिकी सेना की नीति के अनुसार, ऐसी तैनाती की जगह को गुप्त रखा जाता है ताकि “रणनीतिक अस्पष्टता” बनी रहे।
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यूक्रेन युद्ध और बढ़ता तनाव
ट्रम्प का यह कदम यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ते तनाव का हिस्सा है। रूस ने हाल ही में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिसमें कीव में 31 नागरिकों की मौत हो गई। ट्रम्प ने इन हमलों को “घृणित” बताया और कहा कि यह युद्ध “बाइडेन की गलती” है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इस महीने रूस ने 20,000 सैनिक खोए, जबकि यूक्रेन के नुकसान भी भारी हैं। ट्रम्प ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को रूस भेजने की बात कही, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम अभी तक नहीं दिखा। दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शांति की बात तो की, लेकिन कोई ठोस रियायत देने से इनकार कर दिया।
मेदवेदेव की भूमिका
2008 से 2012 तक रूस के राष्ट्रपति रहे मेदवेदेव अब पुतिन के करीबी सहयोगी हैं। वह सोशल मीडिया पर पश्चिमी देशों और नेताओं के खिलाफ आक्रामक बयान देने के लिए जाने जाते हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उनके बयान क्रेमलिन की सोच को दर्शाते हैं। ट्रम्प और मेदवेदेव के बीच यह सोशल मीडिया युद्ध अब सैन्य स्तर पर पहुंच गया है, जो स्थिति को और जटिल बना रहा है।
अमेरिका का यह कदम कोई नया नहीं
हालांकि, रूसी क्षेत्र के पास परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती कोई नई बात नहीं है। अमेरिका पहले से ही रूसी क्षेत्र के पास अपनी परमाणु पनडुब्बियों को तैनात रखता है। हां, ये पहली बार है, जब खुले तौर पर ट्रम्प ने परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती का ऐलान किया है।

















