मालेगांव बम ब्लास्ट केस में एनआईए की स्पेशल अदालत ने 17 साल के बाद फैसला सुनाया। फैसला आने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सात आरोपियों को जहां राहत महसूस हुई तो वहीं किसी के सीने पर सांप लोट गया। कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने हिन्दू और भगवा विरोध की कांग्रेसी परंपरा को बरकरार रखते हुए कहा कि ‘इसे भगवा आतंकवाद नहीं, सनातनी आतंक या हिन्दू आतंकवाद’ कहो। कांग्रेसी नेता के इस बयान पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा है कि भगवा आतंकवाद न था, न है और न होगा। बीजेपी और शिवसेना ने इसे सत्य की जीत करार दिया है।
दरअसल, मालेगांव बम धमाके के मामले में, जिसमें 6 लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 17 साल बाद, 31 जुलाई 2025 को मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट ने इस मामले में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। लेकिन कोर्ट के फैसले से कांग्रेस बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आती है। हो भी क्यों न! ये ब्लास्ट महाराष्ट्र में कांग्रेस के ही शासनकाल के दौरान हुआ था। कांग्रेस ने सवाल उठा रही है कि अगर ये लोग दोषी नहीं, तो फिर धमाके के असली गुनहगार कौन हैं?
चव्हाण ने कोर्ट के फैसले पर ही सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें पहले से ही शक था कि इस मामले में नतीजा यही निकलने वाला है। साथ ही उन्होंने एनआईए पर इस केस हो ही कमजोर करने का आरोप लगाया।
क्या था मालेगांव ब्लास्ट?
29 सितंबर 2008 को मालेगांव के भीकू चौक के पास एक मस्जिद के नजदीक मोटरसाइकिल पर रखा बम फटा। ये धमाका रमजान के महीने में हुआ, जब लोग नमाज के लिए जमा थे। इसकी टाइमिंग को लेकर शक था कि इसका मकसद हिंदू-मुस्लिम तनाव भड़काना था, क्योंकि नवरात्रि भी करीब थी। शुरुआती जांच महाराष्ट्र पुलिस ने की, लेकिन बाद में मामला महाराष्ट्र एटीएस और फिर 2011 में एनआईए को सौंप दिया गया।
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कौन थे आरोपी?
महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहीरकर, समीर कुलकर्णी, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी को आरोपी बनाया। इन पर आरोप था कि उन्होंने ‘अभिनव भारत’ नाम के संगठन के जरिए इस धमाके की साजिश रची। एटीएस ने दावा किया कि मोटरसाइकिल, जिस पर बम रखा गया, प्रज्ञा ठाकुर की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला।
कोर्ट का फैसला
17 साल तक चली सुनवाई के बाद एनआईए कोर्ट के जज एके लाहोटी ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने माना कि न तो मोटरसाइकिल की मालकियत साबित हुई और न ही पुरोहित के पास आरडीएक्स होने या बम बनाने का कोई सबूत मिला। सभी आरोपियों को यूएपीए, आईपीसी की धाराओं और एमसीओसीए के तहत बरी कर दिया गया। कोर्ट ने ये भी कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।
कांग्रेस को कोर्ट पर विश्वास नहीं
फैसले के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सवाल उठाया, “अगर ये लोग दोषी नहीं, तो धमाके किसने किए? 6 लोग मरे, सैकड़ों घायल हुए, फिर गुनहगार कौन है?” कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मृतकों के लिए दुख जताने की बजाय सियासी बयानबाजी करनी शर्मनाक है। सावंत ने जांच एजेंसियों की नीयत पर भी सवाल उठाए।
बीजेपी और शिवसेना की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “आतंकवाद न भगवा था, न है, न होगा।” उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे ‘सत्य की जीत’ बताया और कांग्रेस से माफी मांगने को कहा। बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने इसे कांग्रेस की ‘हिंदू आतंकवाद’ थ्योरी का पतन बताया। उन्होंने कहा कि ये सब वोटबैंक की सियासत थी।

















