मालेगांव बम धमाका: कांग्रेस ने रचा हिंदू आतंकवाद का फर्जी नैरेटिव
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मालेगांव बम धमाका: कांग्रेस ने रचा हिंदू आतंकवाद का फर्जी नैरेटिव

मालेगांव बम धमाके 2008 में साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपियों को एनआईए कोर्ट ने बरी किया। साध्वी ने इसे हिंदुत्व की जीत बताया। महाराष्ट्र एटीएस पर गवाह ने सीएम योगी आदित्यनाथ और आरएसएस नेताओं का नाम लेने के लिए दबाव का आरोप लगाया।

Written byमृदुल त्यागीमृदुल त्यागी
Jul 31, 2025, 01:47 pm IST
inविश्लेषण
Malegaon Bomb Blast

फोटो साभार: टीवी 9 भारतवर्ष

मालेगांव बम धमाके में साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपियों को एनआईए कोर्ट ने बरी कर दिया है। साध्वी प्रज्ञा ने इसे हिंदुत्व की जीत बताया है। वहीं, हिंदू आतंकवाद का फर्जी कथ्य गढ़ने के लिए कांग्रेस ने जो पाप किए, वे भी उघड़ चुके हैं। मालेगांव ब्लास्ट मामले में अभियोजन के गवाह ने सनसनीखेज दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अन्य अधिकारियों का नाम लेने के लिए उस पर महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस ने दबाव डाला था।

मामले की सुनवाई के दौरान एक नया मोड़ भी सामने आया था। एनआईए कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक गवाह ने महाराष्ट्र एटीएस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा वरिष्ठ प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार, देवधर और काकाजी जैसे अधिकारियों—नेताओं के नाम लेने पर भी मजबूर किया गया था। गवाह की मानें तो उसके परिवार को प्रताड़ित भी किया गया था, जिसके बाद उसने योगी आदित्यनाथ का नाम लिया था। गवाह ने कोर्ट को बताया था कि विस्फोट के बाद उसे 7 दिनों तक एटीएस कार्यालय में रखा गया था और उसके बाद एटीएस ने उसके परिवार के सदस्यों को प्रताड़ित करने और उन्हें फंसाने की धमकी दी थी।

मालेगांव बम धमाका

गौरतलब है कि मुंबई से करीब 200 किलोमीटर दूर मालेगांव कस्बे में 29 सितंबर, 2008 की रात करीब 9 बजकर 35 मिनट पर एक मस्जिद के निकट शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के सामने एलएमएल मोटरसाइकिल में एक बम विस्फोट हुआ था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। धमाके के बाद 30 सितंबर, 2008 को मालेगांव के आजाद नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ था। इस बम ब्लास्ट को हिंदू आतंकवाद की शक्ल देने की कोशिश की जाने लगी। ये मामला आतंक से जुड़ा था, इसलिए तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार के आदेश के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले की जांच अपने पास ली और 21 अक्टूबर 2008 को एफआईआर में यूएपीए और मकोका की धारा लगाई।

इसे भी पढ़ें: Malegaon Verdict: कौन लौटाएगा वो 17 साल? क्या ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द गढ़ने वाली कांग्रेस देगी 100 करोड़ हिंदुओं को जवाब?

जांच के दौरान 20 जनवरी 2009 को महाराष्ट्र एटीएस ने पहली चार्जशीट दायर की, जिसमें 11 लोगों को गिरफ्तार और तीन को फरार दिखाया गया था। मालेगांव ब्लास्ट मामले में एटीएस ने कुल 220 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए थे, जिनमें से यह 15वां गवाह अपनी गवाही से पलट गया।

क्यों निशाना बनीं साध्वी प्रज्ञा ?

साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक गांव में हुआ था। उनका असली नाम प्रज्ञा सिंह ठाकुर है। उनके पिता आयुर्वेद के चिकित्सक थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। साध्वी का झुकाव बचपन से ही आध्यात्म की ओर था। उनके पिता गीता पढ़ते थे, तो प्रज्ञा साथ बैठतीं। इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि लेने के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आने के बाद उन्होंने सन्यास ले लिया। वह शानदार वक्ता हैं। उस समय उनके भाषण शैली ने उन्हें मशहूर बना दिया। राजनीतिक कार्यक्रमों में भी उनकी मांग होने लगी। कुछ ही समय में साध्वी प्रज्ञा को भाजपा के स्टार प्रचारक का ओहदा मिल गया। महिलाओं के बीच उनकी गहरी पैठ बन गई। जिस तरीके से वह इस्लामिक आतंकवाद, तुष्टीकरण और कश्मीर में बैठे राष्ट्रद्रोहियों पर प्रहार करती थीं, यह सब कांग्रेस की आंख में खटकने लगा। उनकी हिंदू अपील इतनी बड़ी हो गई थी कि दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेसी नेता उनसे निजी खुन्नस रखने लगे थे।

फंसाया गया लोगों को

29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हो गए थे। जुमां की नमाज के वक्त मस्जिद में एक मोटरसाइकिल में रखे बम में ये विस्फोट हुआ था। मालेगांव धमाका मामले में साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपियों को अप्रैल 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। मालेगांव ब्लास्ट के बाद कांग्रेसनीत यूपीए की सरकार ने एक साजिश रची। इस्लामिक आतंकवाद से देश को बचा पाने में नाकाम हो चुकी कांग्रेस सरकार ने भगवा आतंकवाद का नारा गढ़ा। मालेगांव धमाके के असली अपराधियों को छोड़ दिया गया।

जुल्म की कहानी, खुद साध्वी के शब्दों में

10 अक्टूबर 2008, जी हां यही तारीख थी, जहां से यह साध्वी कांग्रेस के भगवा आतंकवाद के भ्रमजाल का मुख्य चेहरा बन गईं। पहले साध्वी प्रज्ञा को सूरत बुलाया गया और वहां से मुंबई पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (एटीएस) ले गई। 11 अक्टूबर से पुलिसिया कहर की अंतहीन कहानी शुरू हुई। एटीएस के इंस्पेक्टर अरुण खानविलकर ने प्रज्ञा को हिरासत में लिया। वही खानविलकर 2010 में सट्टे में पैसा लेते हुए गिरफ्तार हुआ। बहरहाल, 13 दिन तक प्रज्ञा को अवैध हिरासत में रखा गया। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश किया और 11 दिन का रिमांड लिया। कुल 24 दिन-रात लगातार टार्चर किया गया। रात दिन पिटाई होती थी। कोई वक्त नहीं था पिटाई का। साध्वी के शब्दों में- मुझे मारते-मारते मेरे फेफड़े की झिल्ली फट गई। मैं बेहोश हो गयी। फिर मुझे 5 दिन के लिए अस्पताल ले जाया गया। जब होश आया तो देखा कि उनके शरीर से सारा भगवा वस्त्र गायब थे। उसकी जगह उनको एक फ्राक पहनाया गया था। मुझे वेंटिलेटर और ऑक्सीजन पर रखा गया। मैं जरा ठीक हुई थी, पुलिसिया जुल्म फिर शुरू हुआ। पुलिसकर्मी झूले की तरह पटकते थे। जिससे सिर जमीन में टकराता था। इसी दौरान मेरी रीढ़ की हड्डी टूट गयी। मुझे जबरदस्त तरीके से बेल्टों से पीटा जाता था।

आगे पढ़ेंगे तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे

साध्वी के शब्दों में मेरे साथ मेरे एक शिष्य को भी गिरफ्तार करके लाया गया था। पहले उसे बुरी तरह मारा गया। इसके बाद खानविलकर ने मेरे सामने लाकर बुरी तरह पीटा। फिर उसे मेरे सामने लाकर उसे बेल्ट दिया और कहा मार अपने गुरु को। जब वह हिचकिचाया तो मैं बोली मारो मुझे। शिष्य ने मजबूरी में मारा तो जरूर मुझे, लेकिन शिष्य का हाथ सख्त कैसे होता। तब खानविलकर ने शिष्य से बेल्ट छीनी और शिष्य को बेरहमी से मारते हुए बोला ऐसे मारा जाता है। इसके बाद छह सात पुलिसकर्मियों ने एक घेरा बनाया और बारी-बारी से मुझे बेल्टों से पीटने लगे। ठाणे के पुलिस कमिश्नर ने तो उस वक्त मुझे तब तक बेल्टों से पीटा कि जब तक वो थक नहीं गया और मैं गिर नहीं पड़ी। उस दौरान सिर्फ एक महिला पुलिसकर्मी थी, जिसने सिर्फ एक डंडा मुझे मारा।

अश्लीलता की हद

साध्वी के मुताबिक- एक दिन कुछ पुरुष‎ कैदियों के साथ मुझे खड़ा करके अश्लील और गन्दा आडियो सुनाया जा रहा था। मेरे शरीर पर इतनी मार पड़ी थी कि मेरे लिए खड़े रहना मुश्किल था। मैंने कहा कि मैं बैठ जाऊँ तो पुलिस वाले बोले कि शादी में आई है क्या कि बैठ जायेगी। मेरी आँख बंद होने लगी और मैं अचेत हो गई। उस वक्त जब एक कैदी ने पुलिसवालों से कहा कि साध्वी हैं, इनको अश्लील ऑडियो मत सुनवाइये तो उस पुलिस ने बेरहमी से उस कैदी की पिटाई की।

कैसे होती थी पिटाई

साध्वी ने बताया कि मेरे दोनों हाथों को सामने फैलवाकर एक चौड़े बेल्ट से मारते थे। मेरे दोनों हाथ सूज जाते थे। अंगुलियां भी काम नहीं करती थीं, तब गुनगुना पानी लाया जाता था। मैं अपने हाथ उसमें डालती कुछ आराम होता तो मुझे कागज हाथ में पकड़वाकर हाथों को दीवारों पर पटकवाया जाता था। जब उंगलियां हिलने-डुलने लगती थीं, तो फिर से उसी तरीके से मुझे पीटा जाता था।

चरित्र पर लांछन

साध्वी प्रज्ञा के शब्दों में- मुझे तोड़ने के लिए मेरे चरित्र पर लांछन लगाया। मेरे जेल जाने के बाद कैंसर की सूचना से यह सदमा मेरे पिताजी सहन नहीं कर पाए,  उनको पैरालिसिस हो गया और 40 दिन तक बिस्तर पर रहने के बाद वो इस दुनिया से चल बसे।

कांग्रेस का षडयंत्र

साध्वी ने कहा- भगवा के प्रति कांग्रेस द्वेष से भरी थी। फूटी आंख भी भगवा को नहीं देखना चाहती थी। भगवा को बदनाम करने का कांग्रेस ने एक सुनियोजित षडयंत्र तैयार किया था. राहुल गांधी के उपाध्यक्ष बनने के दौरान मंच से चिदम्बरम, दिग्विजय सिंह व सुशील शिंदे द्वारा बार-बार मेरा व भगवा आतंकवाद का नाम लेना ये साबित कर रहा था। एक बार अग्निवेश मुझसे मिलने जेल में आए और बोले कि आप सहयोग करो तो चिदंबरम और दिग्विजय हमारे मित्र हैं, मैं आपको छुड़वा दूंगा। मैंने कहा- मैं सत्य के साथ रहूंगी। अग्निवेश बोले कि फिर मैं उनसे जाकर क्या बोलूं। तो मैंने कहा कि अगर आपकी उनसे घनिष्ठता है और सच में छुड़ाना चाहते हो, तो चिदम्बरम से जाकर बोलो की ईमानदारी से जांच करवा लें तो आप मुझे बाहर ही पाएंगे। मैं निर्दोष हूं।

कितने फर्जी केस बनाए

हैदराबाद धमाका

मई, 2007 को हैदराबाद के चार मीनार इलाक़े के पास स्थित मस्जिद में बम विस्फोट हुआ। इसमें 9 लोग मारे गए थे और 58 लोग घायल हुए थे। शुरुआत में इस धमाके को लेकर जिहादी संगठन हरकत उल जमात-ए-इस्लामी यानी हूजी पर शक था। लेकिन कांग्रेस तो भगवा आतंकवाद का हौवा खड़ा करने में लगी थी। तीन साल के बाद यानी 2010 में पुलिस ने ‘अभिनव भारत’  नाम के संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया। स्वामी असीमानंद के अलावा इस संगठन से जुड़े लोकेश शर्मा,  देवेंद्र गुप्ता और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को धमाके का अभियुक्त बनाया गया। कोई सबूत ना होने पर कोर्ट ने सभी को बरी किया।

अजमेर शरीफ़ धमाका

11 अक्तूबर, 2007 को राजस्थान के अजमेर में रोज़ा इफ़्तार के बाद अजमेर शरीफ़ दरगाह परिसर के क़रीब बम धमाका हुआ। इस धमाके में तीन लोग मारे गए थे और 17 लोग घायल हुए थे। धमाके के तीन साल बाद राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री शांति धारीवाल ने षडयंत्र रचा। इस मामले में भी 8 मार्च, 2017 को स्पेशल एनआईए कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त रहे स्वामी असीमानंद और पाँच अन्य को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

सुनील जोशी की हत्या

संघ कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या मध्य प्रदेश के देवास में 29 दिसंबर, 2007 को की गई थी। जोशी की हत्या का मामला भी 2011 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया था। मकसद वही था, भगवा आतंकवाद का हौवा खड़ा करना। इसमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित हर्षद सोलंकी, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार, आनंदराज कटारिया, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और जितेंद्र शर्मा को आरोपी बनाया गया था। इन सभी पर हत्या, साक्ष्य छुपाने और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। लेकिन कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सहित सभी को फरवरी, 2017 में बरी कर दिया।

मालेगांव विस्फोट

महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के मालेगांव में 8 सितंबर 2008 को जुमे की नमाज़ के ठीक बाद कुछ धमाके हुए और इनमें 37 लोगों की मौत हुई। मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने इस मामले की जांच की और सात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। इसमें दो पाकिस्तानी नागरिकों का नाम भी था। लेकिन राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में एटीएस और सीबीआई के दावे ग़लत साबित हुए। एनआईए ने अपनी जाँच के अनुसार, चार लोगों को गिरफ़्तार किया जिनके नाम थे लोकेश शर्मा, धन सिंह, मनोहर सिंह और राजेंद्र चौधरी। इसी दौरान मालेगांव शहर के अंजुमन चौक तथा भीकू चौक पर 29 सितंबर 2008 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए जिनमें 6 लोगों की मौत हुई और 101 लोग घायल हुए थे।

रमज़ान के महीने में हुए इन धमाकों की शुरुआती जाँच महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस ने की। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात अन्य लोग अभियुक्त थे। बाद में इस मामले की जाँच की ज़िम्मेदारी एनआईए को सौंप दी गई थी। अप्रैल 2017 में बांबे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दे दी। अगस्त 2017 में कर्नल पुरोहित 9 साल बाद जेल से बाहर आए। दिसंबर 2017 में मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर से मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण क़ानून) हटा लिया गया है। और अब एनआईए कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया।

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