ब्रिटेन में आप्रवासन संकट: ब्रिटेन में आप्रवासन को लेकर हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने देश में बहस छेड़ दी है। जीबी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड और वेल्स की जनसंख्या में पिछले एक साल में 7 लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले 75 सालों में दूसरी सबसे बड़ी वृद्धि है। इन आंकड़ों ने न केवल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आम लोगों के बीच चिंता भी बढ़ा दी है।
क्या कहते हैं आंकड़े
ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि जून 2024 तक इंग्लैंड और वेल्स की जनसंख्या 6.18 करोड़ हो गई है, जो पिछले साल के 6.11 करोड़ से 7,06,881 ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में 98% हिस्सा आप्रवासन का है, यानी 6,90,147 लोग विदेशों से आए, जबकि केवल 29,982 की वृद्धि जन्म-मृत्यु दर के अंतर से हुई। यह 1949 के बाद दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है, पहली 2022-23 में 8,21,210 की थी। यह “जनसंख्या विस्फोट” कई लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव
इतनी बड़ी संख्या में आप्रवासियों के आने से ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं दबाव में हैं। रिफॉर्म यूके के नेता नाइजल फराज ने इसे “जीवन की गुणवत्ता के लिए आपदा” बताया है। उनका कहना है कि यह बढ़ोतरी न केवल संसाधनों पर बोझ डाल रही है, बल्कि सामाजिक एकता को भी प्रभावित कर रही है। रिफॉर्म सांसद रिचर्ड टाइस ने भी चिंता जताई कि अनियंत्रित और कम कौशल वाले आप्रवास से अपराध दर और आवास संकट बढ़ रहा है।
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बदलती डेमोग्राफी
प्रोफेसर मैट गुडविन ने जीबी न्यूज़ पर इस स्थिति को “आप्रवासन संकट” करार दिया। उनका कहना है कि पहले जनसंख्या वृद्धि का कारण जन्म दर थी, लेकिन अब यह पूरी तरह आप्रवासन पर निर्भर है। जन्म दर में कमी और आप्रवासन में इजाफा ब्रिटेन के जनसांख्यिकीय ढांचे को बदल रहा है। उदाहरण के लिए, लंदन, बर्मिंघम और लीसेस्टर जैसे शहरों में “व्हाइट ब्रिटिश” आबादी अब अल्पसंख्यक हो चुकी है। यह बदलाव कई लोगों के लिए चिंता का कारण है, जो देश के सांस्कृतिक और सामाजिक भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
5 दिन और 1300 आप्रवासी
मई 2025 में सरकार ने आप्रवासन कम करने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। छोटी नावों से आने वाले अवैध आप्रवासियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है। जीबी न्यूज़ की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, केवल पांच दिनों में 1,300 से ज्यादा लोग इंग्लिश चैनल पार कर ब्रिटेन पहुंचे। यह स्थिति सरकार की “गैंग्स को तोड़ने” की नीति पर सवाल उठाती है।

















