नई दिल्ली । केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राज्यसभा में चर्चा में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कहा- पहलगाम में हमारे देश के नागरिकों को धर्म पूछकर और चुन-चुन कर उनके परिवार के सामने मारा गया, मैं उन सभी दिवंगत नागरिकों के परिवार के साथ अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब पाकिस्तान ने गोलीबारी की, तो इसमें कुछ नागरिक हताहत हुए, उन नागरिकों के परिवारजनों के प्रति भी हम गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं।
सुरक्षा बलों और प्रधानमंत्री को साधुवाद
गृहमंत्री ने कहा- ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव… इन दोनों के लिए जिन सुरक्षा बलों ने भारत का सम्मान बढ़ाया है, उन सभी को हम हृदयपूर्वक बहुत-बहुत साधुवाद देना चाहता हूं। मैं पीएम श्री नरेन्द्र मोदी जी का भी बहुत बहुत अभिनंदन करना चाहता हूं, जिन्होंने देश की 140 करोड़ जनता की जो इच्छा थी, उसके अनुरूप सटीक जवाब देने की दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई।
आतंकवादियों को भागने से रोकने के सख्त कदम
गृहमंत्री ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आतंकवादियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए कि वे देश छोड़कर भाग न सकें। परिणामस्वरूप, हमले के 100 दिन बाद, अपराधियों का पता लगाकर उन्हें मार गिराया गया।
ऑपरेशन महादेव की बड़ी सफलता
गृहमंत्री ने सदन को बताया कि ऑपरेशन महादेव के तहत, हमारे सशस्त्र बलों ने तीन आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया। उनमें से, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक कमांडर सुलेमान की पहचान पहलगाम हमले के दौरान गोलीबारी करने वाले व्यक्ति के रूप में हुई। लश्कर का एक अन्य कमांडर हमजा अफगानी और लश्कर से जुड़ा वरिष्ठ आतंकवादी जिबरान भी मारे गए आतंकवादियों में शामिल थे।
लश्कर-ए-तैयबा की संलिप्तता उजागर
गृहमंत्री ने बताया कि साक्ष्य स्पष्ट रूप से पहलगाम हमले की साजिश रचने में लश्कर-ए-तैयबा की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।
विपक्ष के वॉकआउट पर गृहमंत्री का कटाक्ष
विपक्ष के वॉकआउट पर केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा- मुझे मालूम है कि ये लोग (विपक्ष) क्यों भाग रहे हैं। ये इसलिए भाग रहे हैं क्योंकि इतने सालों तक अपनी वोटबैंक के चक्कर में आतंकवाद को रोकने के लिए इन्होंने कुछ नहीं किया… इसलिए ये लोग ये डिबेट सुन ही नहीं सकते हैं।
उन्होंने कहा- मैं आज इस सदन के माध्यम से श्री चिदंबरम से पूछना चाहता हूं कि आप किसको बचाना चाहते थे- पाकिस्तान को, लश्कर ए तोयबा को, आतंकवादियों को… आपको शर्म नहीं आती। लेकिन जिस दिन उन्होंने (चिदंबरम) सवाल पूछा, उसी दिन हर हर महादेव हो गया। उसी दिन तीनों आतंकवादी ढेर हो गए। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी की ये मानसिकता पूरी दुनिया के सामने चिदंबरम जी ने उजागर कर दी।
कांग्रेस पार्टी की मानसिकता को देश की जनता देख रही है। इनकी प्रायरिटी देश की सुरक्षा नहीं है, राजनीति है। इनकी प्रायरिटी आतंकवाद को समाप्त करना नहीं है, अपनी वोटबैंक है। इनकी प्रायरिटी हमारी सीमा की सुरक्षा करना नहीं है, तुष्टिकरण की राजनीति है।
आतंकवाद से मुक्त होकर रहेगा कश्मीर
उन्होंने कहा- मैं आज इस सदन से संदेश देना चाहता हूं कि कश्मीर आतंकवाद से मुक्त होकर रहेगा। आतंकवादियों और इस हमले की साजिश रचने वालों की कल्पना से भी बढ़कर उनको बड़ी सजा दी जाएगी। आतंकियों के बीच बची-खुची जितनी भी भूमि है उसको मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीय इस बात के लिए एकजुट हैं कि आतंक के आकाओं की कमर तोड़ दी जाएगी।
पाकिस्तान के आतंकी शिविरों पर भारत का प्रहार
अमित शाह ने कहा- हमने उनके (पाकिस्तान) आतंकी शिविरों, आतंकी लॉन्चिंग पैड्स और आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर हमला किया, लेकिन उन्होंने (पाकिस्तान ने) इसे अपने देश पर हमला माना। 8 मई को पाकिस्तान ने भारत के आवासीय इलाकों और रक्षा प्रतिष्ठानों पर हमला किया। 9 मई को भारत की सेना ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस और रक्षा प्रतिष्ठानों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद, पाकिस्तान लड़ने की स्थिति में नहीं था। पाकिस्तान घुटनों के बल हमारे डीजीएमओ को फोन किया कि अब आप रहम करो और हमले बंद करो।
डोज़ियर से आगे बढ़कर सख्त जवाब
उन्होंने सदन को बताया कि पहले हर हमले के बाद सिर्फ डोज़ियर भेजा जाता था, कभी उनको जवाब नहीं दिया जाता था। ऐसे में वो क्यों डरते। लेकिन उनको जवाब देने का काम मोदी जी ने किया। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर किया… उनके अंदर खौफ पैदा हो गया और आज भी उनको पूरी तरह नींद नहीं आती।
अफजल गुरु और कांग्रेस की भूमिका पर सवाल
अमित शाह ने कहा- चिदंबरम जी के कार्यकाल में ही, जब तक वो गृहमंत्री से नहीं गए, अफजल गुरु को फांसी नहीं हुई। मुंबई हमले के बाद दिग्विजय सिंह ने कहा कि ये हमला तो आरएसएस ने कराया है… ये बोलकर ये लोग किसको बचा रहे थे? मैं आज दुनिया के सामने, देश की जनता के सामने गर्व से कहता हूं कि हिंदू कभी टेररिस्ट नहीं हो सकता।
जम्मू-कश्मीर में बदला हालात का परिदृश्य
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 2010 से 2015 के बीच 2,564 पथराव की घटनाएं हुई थीं। 2024 के बाद एक भी घटना नहीं हुई। ऑर्गेनाइज हड़ताल—जो पाकिस्तान में बैठे हुर्रियत के आका ऐलान करते थे और सालाना 132 दिन घाटी बंद रखते थे। तीन साल से एक भी हड़ताल का ऐलान नहीं हुआ है… अब उनमें हिम्मत नहीं है।
पोटा कानून और कांग्रेस का विरोध
गृहमंत्री ने कहा- कानूनी संरचना खड़ी करने के लिए पोटा का कानून लाने का कांग्रेस पार्टी ने विरोध किया। इन्होंने (कांग्रेस ने) पोटा कानून का विरोध किसको बचाने के लिए किया था? लेकिन अटल जी और भाजपा का संकल्प मजबूत था और पोटा कानून संयुक्त सत्र में पारित कर दिया गया। लेकिन कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में लिखा कि हम पहली ही कैबिनेट में पोटा का कानून रद्द कर देंगे और इन्होंने पहली ही कैबिनेट में पोटा का कानून रद्द भी कर दिया। कांग्रेस टेररिज्म का पोषण करने वाली पार्टी है। जबकि नरेंद्र मोदी सरकार आतंकवाद और घुसपैठ को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नेहरू की ऐतिहासिक भूलें
राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा- कल राहुल गांधी चीन-चीन चिल्ला रहे थे, लेकिन जब चीन की लड़ाई समाप्त हुई तब आपने (कांग्रेस) क्या किया? जब चीन की लड़ाई समाप्त हुई तब हमारा 38 हजार वर्ग किलोमीटर हिस्सा चीन को अक्साई चिन देने का काम कांग्रेस पार्टी और उनके नाना जवाहरलाल नेहरू ने किया।
उन्होंने कहा- उस समय (नेहरू जी के समय) अनौपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की ओर से सुझाव दिया गया कि चीन को संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध किया जाए, परंतु उन्हें सुरक्षा परिषद में नहीं, बल्कि उसकी जगह भारत को देना चाहिए। अगर नेहरू जी चाहते तो आज भारत सुरक्षा परिषद का सदस्य होता। आज मोदी जी को प्रयास करने की जरूरत नहीं पड़ती।
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