भारत के सुशासन मॉडल में तेजी से उभरते ओडिशा की नई भूमिका को लेकर ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा आयोजित सुशासन संवाद : ‘ओडिशा की उड़ान’ का आयोजन आज (28 जुलाई, 2025) ताज विवांता, भुवनेश्वर में किया गया। कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ‘चुनौतियां और संकल्प’ विषय पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर के साथ बातचीत की। इस मौके पर पाञ्चजन्य के एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) ‘जय’ को भी दिखाया गया। एआई जय एक कछुआ है। खास बात ये है कि ये जय भगवान जगन्नाथ से प्रेरित हैं।
आपने अपनी यात्रा पंचाय़त से शुरू की थी। आपकी इस यात्रा को गढ़ने में, आगे बढ़ने में और आपकी राजनीतिक दृष्टि को आकार देने में पंचायत ने कैसी भूमिका निभाई?
राजनीति में जब कोई भी आता है और जब कोई भी काम सबसे पहले आता है, उसकी भित्तभूमि और मिनिमम योग्यता, इसी आधार पर मैंने राजनीति में प्रवेश किया। मैं स्टूडेंट था, पढ़ाई कर रहा था, वहीं से मैं राजनीति में आया और पंचायत के चुनाव में आ गया। मुझे ब्लॉक अध्यक्ष बनने के लिए खड़ा किया गया। लेकिन, मैंने देखा कि ब्लॉक अध्यक्ष बनने के लिए पीएस मेंबर का चुनाव जीतना होगा। चुनाव हुआ और मैं हार गया। ये मेरा पहला चुनाव था। उसके बाद पंचायत चुनाव मेरा दूसरे इलेक्शन रहा।
ये बात 1997 की है। उसी दौरान मैं शिशु मंदिर का शिक्षक भी रहा। उसी दौरान पंचायत इलेक्शन हुआ, मैंने समीक्षा की कि मैं क्यों हारा। जिस प्रकार से महाभारत में भीम पहली बार हारते थे और फिर वे दूसरी बार नहीं हारे। इसी आधार पर मैंने वो चुनाव भी जीता। बाद में लोगों की सलाह पर मैं भाजपा में गया। संयोग से भाजपा से मुझे टिकट मिला और मैं जीता। सीएम मांझी ने कहा कि पंचायत चुनाव मेरी भित्ति भूमि था। मैं 26 साल में ही विधायक बना। चूंकि मैं जमीनी स्तर से चुनकर आया हूं, इसलिए मेरी लोगों के लिए काम करने की इच्छा थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी की विचारधारा से प्रभावित होकर मैंने तेजी से काम किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इसलिए निश्चित तौर पर डबल इंजन की सरकार पर लोगों ने भरोसा जताया है। चुनाव के दौरान मुझे नहीं पता था कि मैं सीएम बनने जा रहा हूं। हां मुझे इस बात का भरोसा था कि चार बार का विधायक होने के नाते एक मंत्री जरूर बनूंगा। लेकिन मैं सीएम बनूंगा, ये मन में नहीं था। जनता की सेवा ही मेरा परम धर्म था। लेकिन, जनता के लिए काम करते-करते मैंने सीएम की योग्यता हासिल कर ली, ये मुझे पता ही नहीं था।
इस एक वर्ष के कार्यकाल में पिछली सरकार की किन कमियों को दूर करना आपकी प्राथमिकता में रहा है? अगर आपने कोई बड़ा कदम लिया है तो वो कौन सा कदम है?
चुनाव के पहले हमारे शीर्ष नेतृत्व ने जो मेनिफेस्टो संकल्प पत्र तैयार किया था। उसमें कई बड़े कार्य करने के वादे किए गए थे और मैं उसी के आधार पर कार्य कर रहा हूं। 24 साल तक प्रदेश में नवीन पटनायक की सरकार रही। 24 तक उन्होंने ओडिशा के लोगों के विकास, उनकी भलाई, और ओडिशा की अस्मिता के लिए काम करना तो दूर, उन्होंने उड़िया लोगों को पहचाना तक नहीं। हमारे मेनिफेस्टो में स्पष्ट लिखा है कि उड़िया अस्मिता को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का कार्य उड़िया में नहीं हो रहा था।
अधिकारियों को भी उड़िया से रखा दूर
सीएम मोहन चरण माझी ने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक ने उड़िया भाषा की उपेक्षा की थी। उनके पास जो अफसर थे, वे उनसे कहते थे कि अगर उड़िया बोलोगे तो तुम्हारा समय समाप्त हो जाएगा।
क्या मुख्यमंत्री को उड़िया से काटने का काम उनके सलाहकारों ने किया था?
आपने ये सोच लिया है तो बात सच भी हो सकती है।
इन्वेस्टमेंट के मोर्चे पर क्या काम हुआ है?
महिलाओं का सशक्तिकरण करने के सुभद्रा योजना शुरू की गई। इस योजना के तहत अब तक हमने एक करोड़ 2 लाख से अधिक महिलाओं को 10, 000 दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लखपति दीदी योजना को ध्यान में रखते हुए सुभद्रा योजना के तहत एक साल में महिलाओं को इतना सशक्त बनाया। हमें 17,000,00 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का टार्गेट दिया गया था। इस एक साल के अंदर ही हमने 16 लाख 60 हजार महिलाओं को हमने लखपति दीदी बना दिया है। इस मामले में हम देश में नंबर वन पर हैं।
सरकार में रोजगार के मुद्दों को कितनी प्राथमिकता मिलती है?
हमारी सरकार आने के बाद ही हमने रोजगार पर काम शुरू कर दिया था। पीएम मोदी ने जो सोचा है कि वो 2047 तक विकसित भारत बनाएंगे। इसके लिए हम लोगों की वित्तीय स्थिति को सुधारेंगे। इसके तहत हम इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएंगे और समाज के गरीब वर्गों को साथ लेकर गरीब, महिला और किसान आदि के लिए स्कूल, बिजली, पानी सड़क की व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है। पीएम मोदी ने जनधन योजना, जनजातीय गौरव दिवस पर पिछड़े और वनवासी समाज को बहुत काम भी दिया।
प्रथम वर्ष में ही 28,000 लोगों को नौकरी दी
हमें अपने मेनिफेस्टो के अनुसार, ये तय किया था कि खाली पड़े डेढ़ लाख पदों पर हम नियुक्ति करेंगे। इसके तहत पहले साल में हमने 28,000 लोगों को नौकरी दी। ये सरकारी स्तर पर नंबर हैं। इसके अलावा 40,000 और लोगों को रोजगार देने के लिए तैयारियां चल रही हैं। विभिन्न प्राइवेट क्षेत्रों में हमने 30,000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है। इसी आधार पर हमने अब तक 60,000 लोगों को नौकरियां दी हैं। अगले एक साल के अंदर हम बड़े स्तर पर लाखों युवाओं को रोजगार देने के लिए काम कर रहे हैं। अभी भी हम कई क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।
निवेश को ओडिशा में लाने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति या योजना बनाई है?
शिल्पायन करने के लिए हमने जो निवेशकों के लिए जो पॉलिसी तैयार की है वो इतनी अच्छी है जिससे कोई निवेशक राज्य में आए। हम लोग इसेंटिव भी अच्छा दे रहे हैं। ओडिशा में संभावनाओं की कमी नहीं है। पीएम मोदी भी यह कह चुके हैं। भारत विकसित बनेगा तो इसमें पूर्वी भारत का अहम योगदान होगा। उड़ीसा एक ऐसा क्षेत्र है, जहां प्राकृतिक खनिजों की कमी नहीं है। यहां खनिजों के मामले में 35 फीसदी है। बाक्साइट हो या ग्रेनाइट सब उड़ीसा में है। 517 किलोमीटर का हमारे एक कोस्टल बेल्ट है। इस पर हम 6-7 पोर्ट बनाने का काम कर रहे हैं। हमारे पास जो निवेशक आने वाले थे और नहीं आए थे, सत्ता में आने के बाद इसी साल जनवरी में हमने एक कॉन्क्लेव किया था। उसमें पीएम मोदी भी आए थे। उन्होंने कहा था कि ये मोदी की गारंटी है आप ओडिशा में निवेश करो।
17 लाख करोड़ का प्रस्ताव राज्य को मिला
हमें 17 लाख करोड़ रुपए का प्रस्ताव अब तक मिल चुका है। इसमें से 13 लाख करोड़ रुपए का एमओयू साइन किया जा चुका है। इसके साथ ही 13 लाख जॉब देने का आश्वासन कंपनियों ने भी दिया है। मैं पिछली बार जब सीएम की मीटिंग दिल्ली गया था तो पीएम मोदी को मैंने बताया था कि अब तक 78,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का ग्राउंड ब्रेकिंग हो गया है। इसमें से 1,10000 से अधिक लोगों को नौकरी मिलेगी। देशभर के राज्यों में जितना निवेश आया था, उन सभी का 40 फीसदी निवेश अकेले ओडिशा में आया है।
आपकी सरकार ने भ्रष्टाचारियों पर बड़ी कार्रवाई की है?
भ्रष्टाचार हमारा चुनावी मुद्दा भी था। बीते 24 साल राज्य को ब्यूरोक्रेट्स ने चलाया। इस कारण से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। सत्ता में आने के बाद मैंने देखा कि भ्रष्ट लोग अच्छे पदों पर हैं। मैंने इस मामले में इंटेलीजेंस से पूछा। हमने चपरासी से लेकर आईएएस अफसर तक को जेल भेजा। अब तक 300 भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा जा चुका है। भ्रष्ट कोई भी हो, उसे मैं छोड़ने वाला नहीं हूं।

खनन माफिय़ाओं को लेकर क्या किया?
खनन क्षेत्र हो, सरकारी योजनाएं हों या कोई अन्य क्षेत्र करप्शन करने वाले लोगों को लगता है कि ये उनका धर्म है। ऐसे लोगों को लगता है कि करप्शन से उनका स्टेटस बढ़ता है। लेकिन, जेल जाने के बाद उन्हें उनकी गलती का आभास होता है। निश्चित तौर पर मैं ऐसे लोगों को छोड़ने वाला नहीं हूं।
उत्तर ओडिशा और दक्षिण ओडिशा विकास परिषद को लेकर आइडिया क्या है? इसमें चुनौतियां क्या हैं और आपका फोकस क्या रहने वाला है?
ओडिशा में अलग-अलग एक अंचल है। जहां, पिछड़ा वर्ग, वनवासी और अन्य समुदाय के लोग रहते हैं। यहां जात-पात जैसी कोई चीज नहीं है। लेकिन, यहां वनवासी समुदाय की जनसंख्या 23 फीसदी है। एससी या हरिजन 16 फीसदी से अधिक हैं। इन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करना एक बहुत बड़ा चैलेंज है। इसी आधार पर उत्तर-दक्षिण ओडिशा का विकास अच्छे से नहीं हो सका। पश्चिमी ओडिशा के लिए एक वेस्टर्न ओडिशा डेवलपमेंट काउंसिल बहुत दिनों से बना हुआ है।
हमने मेनिफेस्टो में बोला था कि हम हर क्षेत्र में निश्चित तौर पर फोकस करेंगे। उत्तर उड़ीसा डेवलपमेंट काउंसिल के लिए टास्क फोर्स गठित कर दी गई हैं। साउथ उड़ीसा के लिए भी काउंसिल गठित करने के लिए टास्क फोर्स गठित कर दिया गया है।
ओडिशा टैक्स-2025 क्या है?
2036 में ओडिशा की स्थापना के 100 साल पूरे हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने जनता से प्रस्ताव मांगा था। 3,20000 से अधिक प्रस्ताव हमारे पास आए। इन प्रस्तावों की स्क्रुटनी का जिम्मा हमने एआई को दे दिया। एआई ने हमें 2036 के लिए 36 प्रोग्राम दिए। इसे दो चरण में पूरा किया जाएगा।
कन्वर्जन से निपटने के लिए आप क्या करने वाले हैं?
कन्वर्जन बहुत ही गलत बात है। हमारी नजर इस पर है। ये अभी भी राज्य में हो रहा है। इसे रोकने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। एक बार जब हमारा प्रसाशन सख्त हो जाएगा तो निश्चित तौर पर हम इसे रोक सकते हैं। मुझे लग रहा है कि हम इसे समय के साथ रोक पाएंगे।
जब तक जातिगत जनगणना नहीं हो जाती है, तब तक कन्वर्जन को बंद कर दिया जाए?
जो भी लोग ऐसा कर रहा हैं, इसे छुपाया नहीं जा सकता। क्योंकि कोई बात अधिक दिनों तक छुपी तो नहीं रह सकती। हम इन सब पर काम कर रहे हैं। समय आने पर हम नकारात्मक काम करने वाले सभी लोगों को नाकाम कर देंगे।
जब ओडिशा की बात होती है तो दो सेक्टर खनन और टेक्सटाइल्स सामने आते हैं, इन दोनों क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार को कैसे जोड़ा जाएगा? और पर्यावरण की चिंताओं का कैसे ध्यान रखेंगे?
जब खनन होगा तो निश्चित रूप से पर्यावरण को हानि होगी। खनन और पर्यावरण दोनों पर बात करना थोड़ा सा कठिन है। लेकिन, इसी कठिनाई से निपटने के लिए हमने पॉलिसी तैयार की है। हम इन जगहों पर वैल्यु एडिशन करने जा रहे हैं। पर्यावरण के साथ विकास भी साथ होगा, इसी के आधार पर हम कार्य कर रहे हैं। हमारे यहां, कोयला, मैगनीज, बाक्साइट, क्रोमाइट जैसे खनिज हैं। हमने 16 सेक्टरों को चिह्नित किया है, जिससे पर्यावरण को हानि नहीं होगी।
पुरी जगन्नाथ के चार द्वारों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को खोले जाने को आप कैसे देखते हैं?
कोरोना के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ के द्वार को बंद कर दिया गया था। लेकिन, इस संकट के बीतने के बाद भी उसे नहीं खोला गया। हमारी सरकार आने के तुरंत बाद हमने चारों द्वारों को खोलने के प्रस्ताव पास करा दिया। इसके अलावा 500 करोड़ रुपए का कॉर्पस फंड रहेगा।
















