गाजा से पहले भारत: बॉम्बे हाईकोर्ट का संदेश और लोकतंत्र की प्राथमिकताएं
June 28, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

गाजा से पहले भारत: बॉम्बे हाईकोर्ट का संदेश और लोकतंत्र की प्राथमिकताएं

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) गाजा में इजरायली कार्रवाई का विरोध कर रही थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति सुरक्षा व विदेश नीति के कारण नहीं दी।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Jul 27, 2025, 01:31 pm IST
in भारत
बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) गाजा में इजरायल की सैन्‍य कार्रवाई का लगातार विरोध कर रही है, लेकिन जब उसने मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी तो मुंबई पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा और विदेश नीति के संभावित प्रभावों के चलते अनुमति देने से इंकार किया। इसके बाद सीपीआई-(एम) बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने पहुंची है और अभिव्‍यक्‍ति एवं लोकतंत्र का हवाला दिया। लेकिन, उसे न्‍यायालय से भी सख्‍त टिप्पणी का सामना करना पड़ा।

यह सच है कि आलोचना और विरोध लोकतंत्र की आत्मा हैं। परंतु यदि विरोध की दिशा भ्रमित हो जाए, और यदि वह केवल प्रदर्शन मात्र बनकर रह जाए, तो वह न तो लोकतंत्र की रक्षा करता है, ना ही जनता की सेवा। आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत के भीतर, गाँव-शहरों में जो समस्याएं दिन-प्रतिदिन विकराल रूप ले रही हैं, उन पर ध्यान केंद्रित किया जाए। न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने इस याचिका को खारिज करते हुए जो शब्द कहे, वे केवल कानूनी वक्तव्य नहीं हैं, उन्‍हें प्रत्‍येक भारतवासी द्वारा गंभीरता से लेने की जरूरत है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी क्या है?

वास्‍तव में कोर्ट का कहना आज के संदर्भ में राष्ट्रीय चेतना की एक पुकार है। न्‍यायालय ने कहा, “देश में पहले से ही समस्याओं की कोई कमी नहीं है। ग़ाज़ा और फिलिस्तीन की चिंता करने से पहले अपने देश को देखिए। यह देशभक्ति नहीं है। देशभक्त बनिए।” न्यायालय की यह टिप्पणी सीधी और तीखी थी, लेकिन उसकी आवश्यकता उतनी ही गहरी है। कोर्ट का स्पष्ट मत था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर प्रदर्शन देश की विदेश नीति पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं। भारत की विदेश नीति एक संतुलित, तटस्थ और कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाती है, जहां प्रदर्शन जैसी गतिविधियां एकतरफा सन्देश दे सकती हैं, विशेषकर तब जब वे सरकार की आधिकारिक नीति से मेल नहीं खातीं।

इसके साथ ही बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि हमारे देश में कचरा प्रबंधन, प्रदूषण, जल निकासी की विफलताएं, शहरी बाढ़, सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी कई समस्‍याएं आज भी हैं, वास्‍तव में इन सब पर ध्यान देना अधिक प्रभावशाली और समाजोपयोगी कार्य है।

राजनीति और कूटनीति की लक्ष्मण रेखा

देखा जाए तो हाईकोर्ट का यह संकेत अत्‍यधिक महत्वपूर्ण है, “आप नहीं जानते कि इससे कितनी धूल उड़ सकती है। यह फिलिस्तीन या इज़रायल की दिशा में जा सकती है। आप क्यों ऐसा करना चाहते हैं?” यह प्रश्न केवल सीपीआई (एम) से नहीं, हम सब से भी न्‍यायालय का है। हर उस व्यक्ति, समूह और दल के लिए है जो “विदेशी मुद्दों पर प्रदर्शन” को अपने विचारधारात्मक अस्तित्व का आधार बना चुके हैं। देशप्रेम की सबसे बड़ी पहचान यह नहीं कि आप किसके लिए सड़क पर उतरे, बल्कि यह है कि आप अपने देश की सच्चाइयों और पीड़ाओं को कितनी प्राथमिकता देते हैं।

न्यायालयों के पूर्व के निर्णय

इसके साथ ही न्‍यायालयों द्वारा पहले भी दिए गए निर्णयों को भी देखना चाहिए। कोलकाता हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 में विदेशी मुद्दों पर राजनीतिक प्रदर्शनों को सीमित करने के लिए राज्य को दिशानिर्देश जारी करने की सलाह दी थी। प्रयागराज हिंसा (2022) के दौरान भी देखने को मिला था कि कैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जब प्रदर्शन देश में तनाव को बढ़ा सकता हो, तब प्रशासन को यह अधिकार है कि वह प्रदर्शन की अनुमति न दे।

सीएए विरोध पर दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा

दिल्ली हाईकोर्ट, 2021 में, सीएए विरोध के दौरान यह स्पष्ट कहा था कि प्रदर्शन का अधिकार असीम नहीं है और यदि उससे सार्वजनिक व्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है तो प्रशासन को इसे नियंत्रित करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले में भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन नागरिकों के अन्य अधिकारों को बाधित करता है।

सुप्रीम कोर्ट का उदाहरण देखें

एक उदाहरण बाबरी ढांचे के समर्थन में प्रदर्शन के संदर्भ में ध्‍यान आता है, तब भी सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर प्रदर्शन को लेकर दी गई अपनी राय में साफ बताया था कि भले ही प्रदर्शन शांतिपूर्ण हों, फिर भी ये कहीं भी तनाव का कारण बन सकते हैं, ऐसे में उन पर रोक टोक को न्यायोचित ठहराया गया था। इसी प्रकार के अनेकों मामले राज्‍य भर में हैं, जहां न्‍यायालय ने प्रदर्शन करने से सीधे-सीधे रोक दिया था।

वामपंथी दलों की आत्मा पहलगाम आतंकी हमले पर क्यों नहीं जागी

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि वामपंथी दल और अन्य इस प्रकार के आन्‍दोलनजीवी संगठनों की संवेदनाएं समान संवेदनशीलता वाले अन्‍य देश से जुड़े मुद्दों पर क्‍यों नहीं जागती है? कोई आज इनसे नहीं पूछा जाना चाहिए कि गलवान घाटी में भारतीय जवानों के बलिदान के वक्‍त इनकी संवेदना कहां गायब थी? जब पहलगाम में निर्दोष नागरिकों की हत्या हुई, तब आतंक के विरोध में ये आवाजें क्‍यों नहीं उठीं। इसके अलावा सीपीएम और अन्य संगठन भी ये समझ लें कि संविधान अनुच्छेद 19(1)(a) और (b) द्वारा दी गई स्वतंत्रता “यथोचित प्रतिबंधों” के अधीन है। संविधान का अनुच्छेद 19(2) स्पष्ट करता है कि यदि किसी अभिव्यक्ति से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो, भारत की संप्रभुता को खतरा हो या विदेशी कूटनीति पर प्रतिकूल असर हो तो उस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। अतः प्रदर्शन की स्वतंत्रता असीम नहीं थी, वह राष्ट्रहित से ऊपर नहीं हो सकती।

गाजा प्रेम से पहले कर्तव्यबोध जरूरी

अंत में कहना यही होगा कि भारत जैसे राष्ट्र में, जहां हर गली, हर मोहल्ला और हर राज्य किसी न किसी सामाजिक या प्रशासनिक समस्या से जूझ रहा है। वास्‍तव में वहां गाजा प्रेम से पहले भारत जागरूकता और कर्तव्यबोध अनिवार्य है। आज उक्त संदर्भ में बॉम्बे हाईकोर्ट की सलाह देश के लोकतांत्रिक विमर्श को केवल सजग ही नहीं बनाती, बल्कि एक नई नैतिकता का सूत्रपात करती है, जिसका कि सार्वभौमिक सत्‍य, सिद्धांत यही कहता है कि “पहले देश, फिर बाकी दुनिया।”

Topics: Gaza protestsIsraeli military action in GazaGaza protest in India 2025India's foreign policyCommunist Party of IndiaBombay High CourtMarxistIsrael palestine conflict
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

सोनिया गांधी

सोनिया गांधी का लेख मुस्लिम तुष्टिकरण और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति नफरत की परिणति?

प्रतीकात्मक तस्वीर

महाराष्ट्र में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई: सोशल मीडिया पर झूठी, भड़काऊ खबरें फैलाने वालों के खिलाफ मामला दर्ज

बांद्रा में अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

मुंबई: बांद्रा में अवैध मस्जिदों और मदरसे पर चला बुलडोजर, पुलिस पर पथराव

बांद्रा में घुसपैठियों पर हुई कार्रवाई

महाराष्ट्र: मुंबई में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बहुत बड़ी कार्रवाई, 700 अवैध झुग्गियों और निर्माण पर चला बुलडोजर

श्रीकृष्ण और हनुमान जी द्वारा दिखाए गए नैतिक कूटनीति के माध्यम से वैश्विक समुदाय के साथ भारत का जुड़ाव

supreme court

अदालतों में फैल रहा AI जनित फर्जी फैसलों का जहर, सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों और जजों को किया आगाह

Load More

ताज़ा समाचार

हरिद्वार: जेपी नड्डा बोले- अंगदान है मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य, दधीचि अंगदान संकल्प अभियान शुरू

कपिलदेव तिवारी (लोकतंत्र की बने आवाज)

जब जज ने कहा- इंदिरा गांधी से कह दो फैजाबाद में चाहें तो बम गिरा दें, मैं इन्हें जमानत दे रहा हूं

Today Weather

Today Weather: भीषण गर्मी से मिलेगी राहत! अगले कुछ घंटों में इन राज्यों में होगी तेज बारिश, IMD ने जारी किया अलर्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर

खाड़ी संकट के बावजूद FY27 में भारत की आर्थिक रफ्तार मजबूत, EY रिपोर्ट का अनुमान

Pakistan terror attack

पाकिस्तान: कराची रेंजर्स मुख्यालय पर आतंकी हमला, 4 जवान मरे; 6 आतंकी मारे गए

प्रतीकात्मक तस्वीर

खाड़ी में तनाव के बीच सप्लाई चेन बरकरार: तीन दिन में भारत संबद्ध जहाज होर्मुज से गुजरे, 15 अभी भी कतार में

Muzaffarpur Bihar Police officer Sword

मुजफ्फरपुर में मुहर्रम जुलूस में वर्दीधारी दारोगा मुस्तकीम खान ने की तलवारबाजी, SSP ने किया

प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली-उत्तराखंड में आतंकी हमले की धमकी, मंदिरों और सरकारी इमारतों पर अलर्ट

Iran Oman Hormuz strait Plan

ट्रंप का खतरनाक बयान – “ईरान को नक्शे से मिटा देंगे”, MOU बातचीत के बीच तनाव बढ़ा

आज का राशिफल

28 जून का राशिफल: नौकरी, व्यापार और पारिवारिक जीवन में कैसा रहेगा आपका दिन?

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies