दीनदयाल शोध संस्थान की साधारण सभा में अखिल भारतीय कार्य समिति का पुनर्गठन किया गया है। प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल में गठित होने वाली नई समिति के लिए संस्थान के साधारण सभा की बैठक में अध्यक्ष की कमान मध्य क्षेत्र संघचालक एवं रायपुर के प्रख्यात ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ पूर्णेंदु सक्सेना के हाथों में सौंपी गई है। इनके अलावा प्रधान सचिव के रूप में नागपुर के श्री निखिल मुंडले एवं संगठन सचिव के नाते श्री अभय महाजन को पुनः जिम्मेदारी दी गई है। कोषाध्यक्ष के लिए श्री वसंत पंडित चुने गए हैं।
चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान की वार्षिक साधारण सभा की बैठक 25 एवं 26 जुलाई को लोहिया सभागार दीनदयाल परिसर चित्रकूट में संपन्न हुई। यहीं पर नई कार्यसमिति में उपाध्यक्ष श्री उत्तम बनर्जी सतना, श्री अतुल जैन, श्री राम अवतार विंजराजका, डॉ अनुपम मिश्र एवं सचिव के रूप में इंदौर से श्री राजेश महाजन, श्री मनुवीर अग्रवाल, श्री भूपेंद्र मालिक, श्री अपराजित शुक्ल को चुना गया हैं। इसके अलावा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमिताभ वशिष्ठ एवं महा प्रबंधक डाॅ अनिल जायसवाल को बनाया गया है।
बैठक में नवीन कार्यकारिणी के चुनाव के लिए निवर्तमान अध्यक्ष श्री वीरेंद्रजीत सिंह द्वारा नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ पूर्णेन्दु सक्सेना, ऑर्थोपेडिक सर्जन रायपुर का नाम अध्यक्ष पद हेतु प्रस्तावित किया जिसका अनुमोदन सर्वसम्मति से सभी ने किया। उसके बाद सबकी सहमति मिलने के बाद चुने गए अध्यक्ष डॉ पूर्णेन्दु सक्सेना द्वारा अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई।
12 पदाधिकारी समेत 70 लोग
नई टीम में 12 पदाधिकारियों सहित 70 लोगों को शामिल किया गया है। जिसमें प्रबंध समिति सदस्यों में 22 लोगों को तथा पदेन सदस्यों में 12 लोग, विशेष सदस्य के रूप में 13 लोग तथा साधारण सभा के सदस्यों के रूप में 23 लोगों को नई टीम में शामिल किया गया है। नई टीम का यह कार्यकाल 2025 से 2030 तक 5 वर्षों के लिए रहेगा। सभी ने पूरी निष्ठा व लगन से संस्थान की कार्य पद्धति के अनुरूप काम करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के संपर्क अधिकारी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री सुरेश सोनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्थान के साथ जुड़ने वाले लाखों लोग हैं, लेकिन पदाधिकारी कुछ ही होते हैं। नए लोग आते हैं, पुराने लोग जाते हैं यह क्रम चलता रहता है। सब पूरी ऊर्जा के साथ पुनः खड़े हों, एक आइडियल हमारा काम खड़ा हो। जब परिस्थितियां बदलती हैं तो उस अनुरूप हमें अपने कार्यों का पुनर्मूल्यांकन करने की जरूरत महसूस होती है। साथ ही कुछ एक कार्यों में समय अनुकूल परिवर्तन करने की आवश्यकता लगती है। हमें भी परिस्थिति अनुरूप नये परिवेश में अपने आपको ढ़ालने का प्रयास करना होगा। नवीन दायित्व के साथ नई टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
सहयोगियों की भूमिका अहम: डॉ पूर्णेंन्दु सक्सेना
अध्यक्ष डॉ पूर्णेन्दु सक्सेना ने नई टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सबके सहयोग के बगैर कोई भी कार्य दक्षतापूर्वक चलाना संभव नहीं होता है। ग्राम विकास की दिशा में, कौशल विकास की दिशा में दीनदयाल शोध संस्थान का नवाचार किस तरह हो सकता है। इस दिशा में संस्थान के क्या शोध हो सकते हैं और नवाचार की दिशा में आगे बढ़े। नानाजी के प्रयोगों को यथावत रखते हुए उसमें युगानुकूल नवाचार की दिशा में नए लोगों के अनुभवों का लाभ हमें मिलेगा यही अपेक्षा रखते हैं।

















