कांग्रेस पार्टी का देश के अलग अलग राज्यों से उखड़ता जनाधार पार्टी और इसके सहयागियों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। कांग्रेस पार्टी की वर्तमान में महज तीन राज्यों हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में सरकार है, जहाँ हिमाचल प्रदेश उत्तरी राज्य है, वहीं तेलंगाना और कर्नाटक दक्षिणी राज्य हैं। कांग्रेस पार्टी वर्तमान में केवल उन्हीं राज्यों में विपक्षी दल की भूमिका में है जहाँ कांग्रेस पार्टी का भाजपा से सीधा मुकाबला है। इन राज्यों में शामिल हैं राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल और असम।
अपने पदचिन्ह खोती कांग्रेस
कांग्रेस किसी भी राज्य जहाँ स्थानीय दल है, वहां वो दिनों-दिन अपने पदचिन्ह खोती जा रही है। दिल्ली और सिक्किम में विगत तीन विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस पार्टी अपना खाता तक खोलने में नाकाम रही। यह कांग्रेस पार्टी के लिए गहन मंथन का विषय है। दिल्ली में जहाँ कांग्रेस पार्टी ने शीला दीक्षित के नेतृत्व में 1998 से 2008 तक स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। वहीं अब विगत तीन विधानसभा चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पा रही है। इतना ही नहीं दिल्ली में 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी सभी सात लोकसभा की सीट जीतती है। जबकि, 2014 में किसी भी सीट को जीतना तो दूर दूसरे पायदान पर भी नहीं आ पाती। आंध्र प्रदेश में कांग्रेस राजशेखर रेड्डी के समय में अपने लोकप्रियता के उफान पर रहती है। लेकिन, उनके निधन और राज्य के विभाजन के बाद विगत दो लोकसभा और दो विधानसभा के चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाती है। 2004 और 2009 में कांग्रेस पार्टी को केंद्र की सत्ता में लाने में आंध्र प्रदेश के प्रदर्शन की सबसे अहम भूमिका थी।
कई राज्यों में खाता तक नहीं खोल सकी कांग्रेस
पश्चिम बंगाल में 2016 में 44 विधानसभा की सीट जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी, लेकिन 2021 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पूर्वोत्तर के राज्यों में कांग्रेस पार्टी की स्थिति और भी खराब है। मिजोरम में कांग्रेस पार्टी ने 2013 में 34 सीट जीतकर सरकार बनाई थी, लेकिन 2018 में महज 5 और 2023 में सिर्फ एक सीट ही सिमट कर रह गई। इसी प्रकार मेघालय में कांग्रेस ने 2018 में 23 सीटें जीतती है। वहीं 2023 में महज 5 सीट ही जीत पाती। अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी 2014 में 42 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाती है। वही 2019 में महज 4 और 2024 में सिर्फ 1 सीट पर ही सिमट जाती है।
राज्यों के तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन-


ज्ञातव्य _जम्मू कश्मीर में चुनाव लगातार नहीं हुए। मनोनीत विधायकों को नहीं शमिल किया गया है। सभी राज्यों के आखिरी विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के 671 विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके पहले के सभी राज्यों में कांग्रेस पार्टी के 903 विधायक निर्वाचित हुए थे। जबकि, उससे पूर्व के सभी राज्यों में कांग्रेस पार्टी के 922 विधायक निर्वाचित हुए थे। यह ग्राफ बताता हैं कि कांग्रेस पार्टी का हाल के दिनों में काफी तेजी से ह्रास हुआ है।
अगले साल 6 राज्यों में चुनाव
इस साल बिहार में और अगले साल 2026 में कुल छह राज्यों में विधानसभा के चुनाव आहूत हैं। कांग्रेस पार्टी की उम्मीद महज दो राज्यों असम और केरल पर टिक गई हैं। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस पार्टी मुख्य विपक्षी दल है। मगर इन दोनों राज्यों में कांग्रेस पार्टी की वर्तमान स्थिति के अनुसार मुख्य विपक्षी दल की भूमिका को बनाये रखने में भी मुश्किलात का सामना करना पड़ रहा है। जहाँ भाजपा केरल में सत्तारूढ़ गठबंधन को सीधे टक्कर देकर कांग्रेस पार्टी को त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल की तरह हासिये पर पहुंचाने पर तुली है, वहीं असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट कांग्रेस पार्टी से विपक्षी दल की भूमिका से बेदखल करने की और बढ़ती दिख रही है। असम में पंचायत चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी को गहरा झटका लगा है और विधानसभा के चुनाव तक पार्टी के लिए उससे उबरना मुश्किल लग रहा है। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी का पांच प्रदेशों पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली, नागालैंड और सिक्किम विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है।
















