बिहार में SIR प्रक्रिया पर सवाल: मृतकों के नाम पर भी भरे जा रहे फॉर्म
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बिहार में SIR प्रक्रिया पर सवाल: मृतकों के नाम पर भी भरे जा रहे फॉर्म

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट में विवाद। मृतकों के नाम पर फॉर्म, धांधली के आरोप और पारदर्शिता पर सवाल।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jul 27, 2025, 07:43 am IST
in भारत
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सवाल उठे हैं। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने धांधली का आरोप लगाया है। दावा है कि बिना दस्तावेजों और मतदाताओं की मौजूदगी के फॉर्म भरे जा रहे हैं, यहाँ तक कि मृत लोगों के नाम पर भी। इस मुद्दे ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है और आम लोगों में भी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

मृतकों के नाम पर फॉर्म, कैसे हो रहा खेल?

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) बिना मतदाता की सहमति के फॉर्म भर रहे हैं। कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर फॉर्म जमा किए गए। कुछ लोगों को तो यह मैसेज भी मिला कि उनका फॉर्म जमा हो गया, जबकि उन्होंने कोई फॉर्म भरा ही नहीं। यह स्थिति न सिर्फ पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों पर भी सवाल उठाती है। सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल भी उठा कि इतने कम समय में इतने बड़े पैमाने पर यह प्रक्रिया कैसे पूरी हो रही है, और क्या यह मतदाताओं को वोटिंग से वंचित करने की साजिश तो नहीं?

सुप्रीम कोर्ट में क्या है बहस का मुद्दा?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉय माल्या बागची की बेंच कर रही है।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि SIR प्रक्रिया में नागरिकता साबित करने का बोझ मतदाताओं पर डाला जा रहा है, जो कि गैर-कानूनी है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग का काम नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय का है। कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को क्यों नहीं स्वीकार किया जा रहा, जबकि ये आम लोगों के पास आसानी से उपलब्ध हैं। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि जब बिहार में 87% लोग आधार कार्ड रखते हैं, तो इसे प्रूफ के तौर पर क्यों खारिज किया जा रहा है?

इसे भी पढ़ें: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण : वह प्रयोग जिससे भारतीय रेलवे ने रच दिया इतिहास!

समय और प्रक्रिया पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने SIR की टाइमिंग पर भी चिंता जताई। कोर्ट का कहना था कि जब बिहार में विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने हैं, तो इतने कम समय में इतनी बड़ी प्रक्रिया क्यों शुरू की गई? जस्टिस धूलिया ने कहा कि अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो उसके पास अपील करने का समय भी नहीं बचेगा। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि बिहार में करीब 7.9 करोड़ मतदाताओं को दोबारा अपनी पात्रता साबित करने को कहा गया है, जो अभूतपूर्व है। खासकर गरीब, प्रवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल साबित हो रही है, क्योंकि उनके पास जरूरी दस्तावेजों का अभाव है।

विपक्ष का हंगामा, जनता में भ्रम

विपक्षी दलों, खासकर RJD, कांग्रेस और CPI(ML) ने इस प्रक्रिया को ‘बैकडोर NRC’ करार दिया है। उनका कहना है कि यह गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों को वोटिंग से वंचित करने की साजिश है। बिहार में बाढ़ और प्रवास के मौसम में यह प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है। कई जगहों पर BLOs द्वारा फॉर्म स्वीकार न करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। लोग डर रहे हैं कि अगर उनका नाम वोटर लिस्ट से हट गया, तो उनकी राशन और पेंशन जैसी सुविधाएँ भी छिन सकती हैं।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने अपनी दलील में कहा कि SIR का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध करना है। आयोग का दावा है कि बिहार में 18 लाख मृतकों के नाम, 26 लाख ऐसे लोग जो दूसरी जगह चले गए, और 7 लाख लोग जिनके वोट दो जगह दर्ज थे, उनकी पहचान की गई है। आयोग ने यह भी कहा कि 1 अगस्त से 1 सितंबर तक मतदाताओं को अपनी गलतियों को सुधारने का मौका दिया जाएगा। लेकिन विपक्ष और याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त पारदर्शिता के की जा रही है।

Topics: धांधली आरोपSIR disputerigging allegationsSupreme Courtसुप्रीम कोर्टचुनाव आयोगElection Commissionबिहार मतदाता सूचीBihar Voter ListSIR विवाद
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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