India-Maldives Relations : जिन राष्ट्रपति मुइज्जू ने चलाया था 'इंडिया आउट कैंपेन' अब वही हुए मोदी के मुरीद
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India-Maldives Relations : जिन राष्ट्रपति मुइज्जू ने चलाया था ‘इंडिया आउट कैंपेन’ अब वही हुए मोदी के मुरीद

भारत की ओर से मालदीव को दिया जा रहे सहयोग से भारत की वैश्विक छवि मजबूत होती है। इससे संदेश जाता है कि भारत एक विश्वसनीय पड़ोसी, विकासशील देशों का संरक्षक और रणनीतिक स्थिरता का पक्षधर है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Jul 26, 2025, 11:45 am IST
in विश्व, विश्लेषण
एयरपोर्ट पर गले मिले मोदी और मुइज्जू

एयरपोर्ट पर गले मिले मोदी और मुइज्जू

अभी कुछ समय पहले तक भारत और मालदीव के राजनयिक संबंधों में एक बड़ी खाई बनी हुई थी, जो अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा से समाप्त हो गई है। दोनों शीर्ष नेताओं की ‘बॉडी लैंग्वेज’ से दिखा कि संबंधों में पहले से अधिक गर्मजोशी आई है। पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की लक्षद्वीप यात्रा को लेकर जिस प्रकार का विवाद मुइज्जू के दो तत्कालीन मंत्रियों ने खड़ा किया था उसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते सबसे नीचे के स्तर तक आ गए थे। लेकिन धीरे धीरे मालदीव को चीन के पाले में जाने की अपनी गलती का एहसास हुआ और भारत को उसने अधिक महत्वपूर्ण मानते हुए संबंधों को पटरी पर लाने के लिए घुटने टेके और अपनी गलती मानी। उसके बाद पहली बार, मोदी मालदीव के 60वें स्वतंत्रता समारोह में विशेष अतिथि के नाते दो दिन के लिए उस देश में हैं। समारोह आज होना है। इससे पहले, मोदी के स्वागत में राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के दूसरे सबसे अधिक समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री हैं और वे आगे भी इस पद को सुशोभित करते रहें, ऐसी कामना करते हैं। इस मौके पर मोदी ने कहा कि हमारे लिए दोस्ती सबसे पहले है। मोदी ने अपनी इस यात्रा के दौरान मालदीव को अनेक सौगातें दी हैं। इस अवसर पर भारत-मालदीव संबंधों के ऐतिहासिक, रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक पहलुओं पर विस्तार से नजर डालना समीचीन ही है।

एक छोटे द्वीपीय राष्ट्र मालदीव की हिंद महासागर में सामरिक स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण है। भारत और मालदीव के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध 1965 से चले आ रहे हैं जब मालदीव ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी। 1988 में भारत ने ‘ऑपरेशन कैक्टस’ के ज़रिए मालदीव में तख्तापलट की कोशिश को रोककर अपनी रणनीतिक प्रतिबद्धता दर्शाई थी। मोदी सरकार पड़ोसी देशों के ​प्रति एक विशेष अपनत्व का भाव रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने “पड़ोसी पहले” नीति को सक्रिय रूप से अपनाया है। इसी के तहत मालदीव को एक भरोसेमंद साझेदार माना गया है। दोनों देशों के बीच अनेक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय यात्राएं हुई हैं। पिछले एक साल में तीन मौकों पर विभिन्न अंतराष्ट्रीय मंचो पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू की भेंट हो चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी को मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री के रूप में सम्मान देना, भारत की निरंतरता और स्थायित्व को दर्शाता है। भारत ने मालदीव में रक्षा मंत्रालय भवन के निर्माण में सहयोग किया है। यह प्रतीक है कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग गहरा हो रहा है। इसके ज़रिए मालदीव की सैन्य संरचना को मज़बूती मिलेगी और भारत की क्षेत्रीय भूमिका और बढ़ेगी।

Landed in Malé. Deeply touched by the gesture of President Muizzu to come to the airport to welcome me. I am confident that India-Maldives friendship will scale new heights of progress in the times to come.@MMuizzu pic.twitter.com/GGzSTDENsE

— Narendra Modi (@narendramodi) July 25, 2025

इतना ही नहीं, भारत ने मालदीव को ऋण के रूप में एक बड़ी वित्तीय सहायता दी है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति मिलेगी। भारत ने हाल ही में मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की है। यह सहायता मालदीव में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं के लिए दी गई है, जैसे-सड़क और ड्रेनेज प्रणाली का निर्माण, सोशल हाउसिंग यूनिट्स—हुलहुमाले में 3,300 घरों का हस्तांतरण, रक्षा मंत्रालय भवन का निर्माण, मालदीव की सेना और आपात सेवाओं के लिए 72 भारी वाहन और उपकरण। इसके साथ ही भारत ने मालदीव की ऋण चुकौती शर्तों में भी राहत दी है, जिससे मालदीव की वार्षिक भुगतान राशि में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई है। मालदीव में अस्पताल, सड़कें, ब्रिज, जल शोधन संयंत्र जैसी परियोजनाएं भारत के सहयोग से ही विकसित की जा रही हैं।

मालदीव के रक्षा मंत्रालय भवन पर मोदी की तस्वीर

मोदी की इस यात्रा के दौरान अनेक द्विपक्षीय समझौते हुए हैं जिससे बहुस्तरीय सहयोग और व्यापक होगा। जैसे, रक्षा क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास, उपकरणों की आपूर्ति की बात है तो व्यापार के क्षेत्र में आयात-निर्यात, लघु और मध्यम उद्योग को समर्थन देना। शिक्षा के क्षेत्र में भारत छात्रवृत्ति और तकनीकी प्रशिक्षण देगा। पर्यटन में द्वीप पर्यटन का प्रचार और विनिमय होगा। सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी आगे बढ़ा जाएगा।

भारत के सामरिक और भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से मालदीव विशेष महत्व रखता है। भारत की ‘ब्लू वाटर स्ट्रेटेजी’ के लिए मालदीव महत्वपूर्ण है। इसे चीन के “स्ट्रिंग आफ पर्ल्स” रणनीति के जवाब के तौर पर भी देखा जा सकता है। भारत चाहता है कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे, वहां कोई बाहरी शक्ति अस्थिरता न पैदा करे। मोदी का यह कहना कि “हमारे लिए दोस्ती सबसे पहले है”, यह केवल एक भावनात्मक संदेश नहीं, बल्कि कूटनीतिक संकेत है कि भारत बिना शर्त सहायता करता है। उसका यह सहयोग किसी दबाव या प्रभुत्व जमाने की सोच की वजह से नहीं, “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से प्रेरित है।

बेशक, इस सहयोग से भारत की वैश्विक छवि मजबूत होती है। इससे संदेश जाता है कि भारत एक विश्वसनीय पड़ोसी, विकासशील देशों का संरक्षक और रणनीतिक स्थिरता का पक्षधर है। और इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व शैली, रणनीतिक सोच और मानवीय दृष्टिकोण ही है। इसके संदेह नहीं है कि मालदीव को आर्थिक और सैन्य रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। यह रिश्ता क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। भारत की भूमिका अब केवल एक मददगार पड़ोसी की नहीं, बल्कि एक उत्तरदायी शक्ति की है।

Topics: मालदीवModibilateraldiplomacyमोदीmuizzuforeign affairsIndia Maldives relationsभारत
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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