Kargil Vijay Diwas: बलिदानियों को नमन कर रहा राष्ट्र, पाक आतंकियों की घुसपैठ से 1999 में ऐसे मिली जीत
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Kargil Vijay Diwas: बलिदानियों को नमन कर रहा राष्ट्र, पाक आतंकियों की घुसपैठ से 1999 में ऐसे मिली जीत

आज ही के दिन साल 1999 में भारतीय सेना के वीर सपूतों ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते हुए हराया था। 84 दिनों के इस संघर्ष में पाकिस्तान को हमारे वीर सैनिकों ने चारों खाने चित कर दिया था। उन्हीं वीरों की स्मृति में देश उन बलिदानियों को आज नमन कर रहा है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Jul 26, 2025, 10:13 am IST
in भारत

Kargil Diwas 2025: देश कारगिल विजय दिवस के बलिदानियों को नमन कर रहा है। उनके शौर्य और साहस की गाथा को याद कर रहा है। बलिदान की उन कहानियों को अपनी स्मृतियों में संजो रहा है। राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने कारगिल विजय दिवस के वीरों को याद किया है। उनके बलिदान को नमन किया है। राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा है कि आज का दिन भारतीय सेना के वीर जवानों की असाधारण वीरता, साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारलिग विजय दिवस की देश को शुभकामनाएं देते हुए लिखा है कि मातृभूमि के लिए मर मिटने का सैनिकों का जज्बा आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि यह अवसर हमें मां भारती के उन वीर सपूतों के अप्रतिम साहस और शौर्य का स्मरण कराता है जिन्होंने देश के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

आज ही के दिन साल 1999 में भारतीय सेना के वीर सपूतों ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते हुए हराया था। 84 दिनों के इस संघर्ष में पाकिस्तान को हमारे वीर सैनिकों ने चारों खाने चित कर दिया था। उन्हीं वीरों की स्मृति में देश उन बलिदानियों को आज नमन कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी वीर सपूतों के बलिदान को नमन किया। उन्होंने लिखा ‘कारगिल विजय दिवस पर, मैं उन वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी देश के सम्मान की रक्षा में असाधारण साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। कारगिल युद्ध के दौरान उनका सर्वोच्च बलिदान हमारे सशस्त्र बलों के अटूट संकल्प की चिरस्थायी याद दिलाता है। भारत उनकी सेवा का सदैव ऋणी रहेगा।’ आइए पाकिस्तान को इस युद्ध में हराने की 84 दिनों की कहानी जानते हैं.

देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की ढेरों शुभकामनाएं। यह अवसर हमें मां भारती के उन वीर सपूतों के अप्रतिम साहस और शौर्य का स्मरण कराता है, जिन्होंने देश के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मातृभूमि के लिए मर-मिटने का उनका जज्बा हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। जय…

— Narendra Modi (@narendramodi) July 26, 2025

26 जुलाई यानी आज कारगिल युद्ध को 26 साल पूरे हो गए हैं। 3 मई 1999 ही वो दिन था जिस दिन भारतीय सेना को पाकिस्तान की घुसपैठ की जानकारी मिली थी। कुछ स्थानीय चरवाहों ने भारतीय सेना के लोगों को इसके बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद आतंकियों और भारतीय सेना के बीच यह संघर्ष 84 दिन चला। 26 जुलाई 1999 को भारत को जीत मिली और पाकिस्तान के मंसूबे नाकाम हो गये।

दरअसल पाकिस्तान के घुसपैठ की जानकारी मिलते ही 5 मई, 1999 को सेना को घुसपैठ वाले इलाके में भेजा गया। आतंकियों ने सेना के पांचों जवानों को मार दिया। सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के शव से बर्बरता भी की गई। घुसपैठिए लेह-श्रीनगर हाईवे पर कब्जा कर लेना चाहते थे। इसके जरिए वह लेह को बाकी हिन्दुस्तान से काट देना चाहते थे। लेकिन भारतीय सेना ने उनके इरादों पर पानी फेर दिया और पाकिस्तान की एक भी चाल सफल नहीं होने दी।

9 मई को कारगिल जिले में पाकिस्तानी सेना का तोप का गोला गिरा और भारत के गोला बारूद डीपो को उड़ा दिया। 10 मई, 1999 को द्रास, काकसर, बटालिक सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा गया। 15 मई, 1999 के बाद कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से सेना को भेजा गया। 26 मई को भारतीय वायुसेना ने घुसपैठियों पर जमकर बमबारी की। 27 मई को दो भारतीय लड़ाकू विमानों को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया। फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता को पाकिस्तान ने युद्धबंदी बना लिया।

वहीं, स्क्वॉड्रन लीडर अजय अहूजा ने सर्वोच्च बलिदान दे दिया। 31 मई, 1999 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का बयान आया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। 4 जुलाई को भारतीय सेना ने टाइगर हिल्स पर तिरंगा फहराया। करीब 11 घंटे तक लगातार चली लड़ाई के बाद भारतीय सेना ने इस अहम पोस्ट पर अपना कब्जा जमाया। 5 जुलाई को भारतीय सेना ने द्रास सेक्टर पर कब्जा जमाया। 7 जुलाई को बाटलिक सेक्टर में जुबर पहाड़ी पर भारतीय सेना ने फिर से कब्जा कर लिया। 7 जुलाई को ही एक अन्य ऑपरेशन के दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा ने सर्वोच्च बलिदान दिया।

11 जुलाई को भारतीय सेना ने बाटलिक सेक्टर की सभी पहाड़ियों की चोटियों को अपने कब्जे में ले लिया।12 जुलाई को युद्ध हारते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारत के सामने बातचीत की पेशकश की। 14 जुलाई को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को भारतीय क्षेत्र से पूरी तरह से खदेड़ दिया और सभी इलाकों को वापस हासिल कर लिया। 26 जुलाई को भारत ने कारगिल युद्ध को जीतने की घोषणा कर दी। इस तरह पाकिस्तान एक बार फिर से चारों खाने चित हो गया और उसके नापाक मंसूबे असफल हो गये।

Topics: Kargil Vijay Diwas 2025Kargil War TimelineKargil Diwas 2025Kargil Martyrs Tribute
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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