सीमांत क्षेत्र के लोगों को यूं ही नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा की दूसरी पंक्ति कहा जाता, देशभक्ति इन लोगों में कूट-कूट कर भरी रहती है।इसी जज्बे के कारण पंजाब के फिरोजपुर जिले के ममदोट इलाके के निवासी 10 वर्षीय बाल युद्ध नायक श्रवण सिंह ने आपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के कंधे से कंधा मिला कर दुश्मनों से लोहा लिया। श्रवण सिंह ने तारा वाली गांव में तैनात सैनिकों की काफी मदद की थी।
श्रवण ने सैनिकों को पानी, बर्फ, चाय, दूध और लस्सी जैसी चीजें पहुंचाईं, जब वे पाकिस्तानी सेना के साथ गोलीबारी में उलझे थे। बच्चे की इस हिम्मत और उत्साह को देखते हुए भारतीय सेना की गोल्डन एरो डिवीजन ने श्रवण की पढ़ाई का खर्च उठाने की बात कही है। फिरोजपुर छावनी में आयोजित एक समारोह में वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने श्रवण को सम्मानित भी किया।
मौन नायकों की याद दिलाती है श्रवण की कहानी
उन्होंने कहा श्रवण की कहानी देश भर में मौजूद उन मौन नायकों की याद दिलाती है, जो मान्यता और समर्थन के हकदार हैं। ममदोट क्षेत्र में स्थित तारा वाली गांव का रहने वाला श्रवण का सपना बड़े होकर सेना में शामिल होने का है। ज्ञात रहे कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने 7 मई को तडक़े पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए थे। इन ठिकानों में जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके स्थित अड्डा शामिल था।
यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। आपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में जगह-जगह मोर्चाबंदी की थी और इसी एक मोर्चे पर बाल युद्ध सैनिक श्रवन सिंह ने अपने जौहर दिखाए थे।

















