इधर सीनेट ने घोर विवादित ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ पास किया, राष्ट्रपति ट्रंप ने दस्तखत किए तो उधर फौरन कभी ट्रंप के करीबी रहे अब कट्टर विरोधी उद्योगपति एलन मस्क ने वादे के अनुसार ‘अमेरिकन पार्टी’ मैदान में उतार दी। बिना वक्त गंवाए ट्रंप ने एलन मस्क की इस नई राजनीतिक पार्टी पर तीखे बोल बोलते हुए इसे ‘मूर्खता’ करार दे दिया। मस्क के पूर्व दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह देश को बांटने और रिपब्लिकन वोटों को कमजोर करने की साजिश है। बेशक, मस्क के इस कदम पर ट्रंप का गुस्सा समझा जा सकता है।
एलन मस्क ने ‘अमेरिकन पार्टी’ की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका अब एक “यूनिपार्टी” बन चुका है जहां डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों ही आम जनता की आवाज़ को अनसुना कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह पार्टी उन लोगों के लिए एक विकल्प होगी जो पारंपरिक राजनीति से निराश हैं। अपनी अमेरिकन पार्टी के उद्देश्य के बारे में मस्क ने कहा कि यह दो-दलीय व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश है। इसका उद्देश्य तकनोलॉजी, उद्यमिता और स्वतंत्रता को प्राथमिकता देना है। साथ ही यह “बिग ब्यूटीफुल बिल” जैसे खर्चीले कानूनों का विरोध करेगी।
आखिर यह ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ नाम से बना कानून है क्या? ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन कांग्रेस द्वारा पारित किया यह कानून अमेरिका के इतिहास का एक बड़ा ‘खर्चीला बजट कानून’ बताया जा रहा है। मस्क का मुख्य विरोध भी इसी बात को लेकर है। इसके जरिए ‘मेडीएड’ और ‘स्नैप’ जैसे सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में कटौती हो जाएगी। साथ ही, टैक्स क्रेडिट में बदलाव और रक्षा और सीमा सुरक्षा पर जबरदस्त खर्च भी होने की उम्मीद है।

संभवत: मस्क ने इस बिल “देश को दिवालिया करने वाला” बिल बताया है। इसीलिए बिल पारित होने से पहले ही उन्होंने कह दिया था कि अगर यह बिल पास हुआ, तो वे अगले ही दिन नई पार्टी बना लेंगे, अपने समर्थकों के साथ किए अपने उसी वादे को पूरा करते हुए अमेरिकन पार्टी की लीक डाली गई है।
अमेरिका का राजनीतिक इतिहास देखें तो यह मुख्यत: दो प्रमुख पार्टियों—डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन—के इर्द-गिर्द ही रहा दिखता है। हालांकि, बीच बीच में तीसरी पार्टियों ने भी इसमें दखल दी है। जैसे, 1992 में रॉस पेरोट ने ‘इंडिपेंडेंट’ उम्मीदवार के रूप में 19 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, जो अब तक का किसी तीसरे राजनीतिक दल का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन कहा जा सकता है। ‘ग्रीन पार्टी’ और ‘लिबर्टेरियन पार्टी’ जैसे दलों ने भी कुछ हद तक अमेरिकी राजनीति पर असर डाला था। लेकिन उनके लिए राष्ट्रपति चुनाव जीतना दूर की कौड़ी रही।

दरअसल अमेरिका की चुनावी प्रणाली (जैसे, फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट) दो प्रमुख दलों को ही बढ़ावा देती आई है। ऐसे में राजनीति के विशेषज्ञों के मन में यही सवाल है कि क्या मस्क की पार्टी सफल होगी या जल्दी ही इसका बोरिया बिस्तर समेट लिया जाएगा? वैसे जनता में मस्क की पार्टी को लेकर उत्सुकता तो दिखी है। लेकिन साथ ही, इस नई पार्टी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। मस्क के पास संसाधन हैं और सोशल मीडिया पर उनका प्रभाव है, लेकिन उन्हें राजनीतिक अनुभव नहीं है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियां उन्हें “स्पॉइलर” यानी खेल बिगाड़ने वाले के रूप में देख रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर, यदि मस्क ‘टेक्नोक्रेटिक’ और उदारवादी एजेंडे को साफ साफ सामने रख पाए तो बेशक युवा और स्वतंत्र मतदाता उनकी ओर आकर्षित हो सकते हैं।
आम अमेरिकी मतदाताओं के मन में एक सवाल यह भी है कि मस्क की पार्टी कोई नई राजनीतिक धारा है या यह क्षणिक उत्तेजना का फल है? हो सकता है, मस्क की ‘अमेरिकन पार्टी’ अमेरिकी राजनीति में एक नई लहर ले आए लेकिन यदि वह केवल ट्रंप विरोध तक सीमित रहे तो यह डगर कठिन होगी। दरअसल, यह पार्टी उन मतदाताओं के लिए उम्मीद की किरण हो सकती है जो पारंपरिक राजनीति से उकता चुके हैं। लेकिन, सवाल फिर वही है कि क्या यह पार्टी अमेरिका की दो-दलीय व्यवस्था को तोड़ पाएगी? और इसका जवाब भविष्य के गर्त में है।

















