ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स: पीड़िताओं की आवाज दबाने के लिए विवादास्पद प्रदर्शन
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ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स: पीड़िताओं की आवाज दबाने के लिए विवादास्पद प्रदर्शन

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स के खिलाफ पीड़िताओं की आवाज और Fighting For Fair Trials के विवादास्पद प्रदर्शन ने नस्लवाद और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर बहस छेड़ दी है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jul 7, 2025, 11:32 am IST
inविश्व, सोशल मीडिया
UK Grooming Gang

मुस्लिम नेताओं के साथ प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स को लेकर जब से पीड़िताओं ने अपनी आवाज उठानी आरंभ की है, तब से लोगों को एक ऐसे काले अध्याय की काली दुनिया का और गहराई से पता चला, जिसे जानता तो लगभग हर कोई था, मगर कोई प्रमाण नहीं था। पीड़िताओं ने सामने आकर अपनी कहानियाँ बताईं तो दुनिया अवाक रह गई कि लड़कियों के साथ ऐसा भी हो सकता है।

पीड़ित लड़कियों पर नस्लीय टिप्पणी

उन्हें उनकी नस्लीय पहचान के कारण बाजारू औरत कहा जा सकता है, उन्हें यह कहा जा सकता है कि “गोरी लड़कियां तो होती ही इसलिए हैं!” तो वहीं उन्ही पर प्रशासन ने “चाइल्ड प्रोस्टीट्यूट” का तमगा लगा दिया था। असंख्य लड़कियों की हत्याएं हुईं और जब पीडिताओं के अभिभावक मुस्लिम समुदाय के पास मदद के लिए पहुंचे तो उन्हें निराशा हाथ लगी।

हमने अपने लेखों में तमाम स्रोतों के माध्यम से बताया है कि ग्रूमिंग गैंग्स की जड़ें अस्सी के दशक से नहीं बल्कि पचास के दशक से ही ब्रिटेन मे फैल रही हैं। यह बहुत ही भयावह है कि समाज की लड़कियों के साथ फुसलाकर बलात्कार ही न हो, बल्कि उन्हें बहुत ही सुनियोजित तरीके से जिस्मफरोशी और नशीली दवाइयों और चोरी आदि के जाल में फंसा दिया जाए।

ग्रूमिंग गैंग के मुद्दे को एलन मस्क ने भी उठाया

यह कांड तक और चर्चा में आया जब एलन मस्क ने इस वर्ष के आरंभ में इस संबंध में एक्स पर लिखा था। और फिर इसके बाद पीड़िताओं को साहस मिला और एक्स पर जो कहानियां सामने आईं उन्होनें लड़कियों की पीड़ा के उस संसार को एकदम नग्न रूप से खोलकर रख दिया, जिस पर अभी तक कथित लिबरल मीडिया बात  करने से कतराता था और जिस पर बात करने से इस्लामोफोबिया का ठप्पा लग जाता था।

इसे भी पढ़ें: BRICS-2025: कौन हैं वो 11 देश जिन्हें ट्रंप ने दी 10% एक्स्ट्रा टैरिफ की धमकी

Fighting For Fair Trials का विवादास्पद प्रदर्शन

हाल ही में ब्रिटेन की सरकार ने इस विषय पर एक जांच करने की बात की है। और जैसे-जैसे पीड़िताओं का डर समाप्त हो रहा है, वे सामने आ रही हैं। मगर अब एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। ब्रिटेन में एक संगठन है, Fighting For Fair Trials, इसने ड्यूसबरी में 5 जुलाई को एक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन इसलिए हुआ था कि ग्रूमिंग गैंग्स के मामले में निष्पक्ष ट्रायल हो।

संगठन का दावा और बैनर

इसका जो पोस्टर साझा किया गया था, उसमें कहा गया कि मीडिया जिस प्रकार ‘एशियन ग्रूमिंग गैंग्स” का प्रयोग कर रही है, उसके कारण ‘समुदायों में विभाजन बढ़ रहा है।“

और संगठन यह दावा करता है कि वह “ग्रूमिंग के लिए गलत तरीके से फँसाए गए लोगों” के पक्ष में है और “नस्लवाद के विरोध में है!”

  • इस प्रदर्शन में लोग हाथों में बैनर आदि लेकर खड़े हुए थे और उनमें लिखा था कि एक नस्लवादी सिस्टम में, सत्य चुप रहता है।
  • एक ने लिखा था कि ‘किसी को भी त्वचा के रंग के आधार पर दंड नहीं मिलना चाहिए।“
  • एक पर लिखा था कि “सत्य मायने रखता है, झूठे तरीके से दोषी ठहराए जाने के खिलाफ!”
  • सबसे रोचक एक प्लेकार्ट था। उसमें लिखा था कि “निर्दोष आदमी भी पीड़ित हैं।‘

संगठन के खिलाफ लोगों में गुस्सा

सोशल मीडिया पर लोगों के मन में इस प्रदर्शन को लेकर गुस्सा है। क्या कोई उन पीड़िताओं के दर्द की कल्पना भी कर सकता है, जो उन्हे इस प्रदर्शन से हो रही होगी? पीड़िताओं को ही दोषी ठहराया जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे लोगों को शर्म भी है अपने कामों पर? क्या इन लोगों को यह अहसास भी है कि इन लोगों ने आखिर क्या किया है?”

जीबीन्यूज के पत्रकार चार्ली पीटर्स ने बताया कि Fighting For Fair Trials नामक संगठन की स्थापना इरफान खान की बहन ने की थी, जिन्हें बलात्कार और जान से मारने की धमकी देने के तीन अपराधों के लिए 12 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। वह 20 से अधिक शिकारियों के एक समूह का हिस्सा था, जिन्हें वेस्ट यॉर्कशायर में आठ युवा लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार और तस्करी के बाद 346 साल की जेल हुई थी।“

इसी पोस्ट के अनुसरण में उन्होनें एक और पोस्ट लिखी, जिसमें लिखा कि समूह के समर्थकों को पहले भी इन मुकदमों को नस्लवादी बताने और पीड़ितों के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के लिए उजागर किया गया था। समूह के सोशल मीडिया प्रोफाइल में ग्रूमिंग गैंग्स के प्रति समर्थन ही समर्थन ही है, जिसमें कहा गया है कि यह ग्रूमिंग गिरोहों के बारे में “सच्चाई” साझा कर रहा है।“

पीड़ित लड़कियों को कहा-गंदी कुतिया

डेली मेल ने 29 अप्रैल को इस समूह के विषय में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी और जिसमें कहा था कि प्रदर्शन करने वाले समूह ने कहा कि ये मुकदमे कि ग्रूमिंग गैंग्स मुकदमे नस्लवादी हैं और पीड़ित “गंदी कुतिया! और बीमार गायें हैं!” चैनल 4 की डाक्यमेन्ट्री के हवाले से इस समूह की यह हैरान करने वाली सच्चाई डेली मेल ने लिखी थी।

एक वीडियो में, जिसे उस प्रदर्शन में दिखाया जाना था, उसमें कई लोगों की बातें थीं। इसमें यहाँ तक कहा गया कि रोशडेल वाली घटना एकदम झूठ है। कोई भी ग्रूमिंग गैंग नहीं है। एक महिला को जज के बारे में यह कहते हुए सुना गया कि “जज एक नंबर का बेवकूफ है!” एक महिला ने कहा कि “लोगों को कत्ल करने की सजा कम मिलती है और इसमें ज्यादा मिलती है। अधिकतर पीड़िता झूठी हैं।“

इस समूह को चैनल 4 की डाक्यमेन्ट्री में भी स्थान मिला था, जिसमें इसके सदस्यों ने साफ कहा था कि कोई भी ग्रूमिंग गैंग नहीं है और अधिकतर पीड़िता झूठी हैं!”

सोशल मीडिया पर इस प्रदर्शन को लेकर गुस्सा है और लोग यह कह रहे हैं कि विश्वास नहीं होता कि कोई इतना भी निर्लज्ज हो सकता है!

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