उत्तराखंड, जिसे देवभूमि कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऊँचे पहाड़ों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है लेकिन अधिकतर लोग मसूरी, नैनीताल, या ऋषिकेश जैसी प्रसिद्ध जगहों पर ही घूमने जाते हैं। अगर आप बजट में ट्रैवल करना चाहते हैं और भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत और अनछुई जगह की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड की ये ऑफबीट डेस्टिनेशन आपके लिए परफेक्ट हैं।
चोपता
अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं, तो चोपता आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं। यह जगह तुंगनाथ और चंद्रशिला ट्रैक के लिए जानी जाती है। यहाँ से हिमालय की चोटियों का शानदार नजारा देखने को मिलता है। यहां बजट में होमस्टे और कैंपिंग की सुविधा उपलब्ध है। गर्मियों में मौसम सुखद और सर्दियों में बर्फबारी का आनंद लिया जा सकता है।
कांथी
कांथी गांव टिहरी जिले में स्थित है और अब भी मुख्यधारा की टूरिज्म से दूर है। यह जगह खासकर प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए आदर्श है। यहां ठहरने के लिए गांव के होमस्टे किफायती दामों पर उपलब्ध हैं और स्थानीय भोजन भी बहुत स्वादिष्ट होता है।
खिर्सू
पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित खिर्सू एक शांत और बेहद खूबसूरत जगह है। यहां से त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली जैसी हिमालय की चोटियां साफ दिखाई देती हैं। यहां घूमना बेहद सस्ता है और स्थानीय लोग बहुत ही मेहमाननवाज होते हैं। ये जगह खासकरसोलो ट्रैवलर्स के लिए परफेक्ट है।
मुनस्यारी
मुनस्यारी, पिथौरागढ़ जिले में स्थित है और पंचाचूली ग्लेशियर का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह जगह एडवेंचर ट्रैकर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां रहने और खाने की लागत भी कम है और आप लोकल होमस्टे में रुक कर पहाड़ी जीवनशैली को करीब से जान सकते हैं।
लोहाघाट
चंपावत जिले में बसा लोहाघाट एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध स्थल है। यहां आप बाणासुर किला, मायावती आश्रम और अभयारण्य जैसी जगहें देख सकते हैं। यह जगह कम भीड़ और कम खर्च के कारण सुकून की तलाश करने वालों के लिए बढ़िया है।
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क्यों चुनें ऑफबीट डेस्टिनेशन?
ऑफबीट जगहों पर शांति और प्रकृति का सच्चा आनंद लिया जा सकता है। गांवों और होमस्टे में रुककर आप असली पहाड़ी संस्कृति और जीवनशैली को नज़दीक से देख सकते हैं। ऑफबीट जगहों पर मेडिकल और नेटवर्क की सुविधा सीमित हो सकती है, इसलिए पहले से तैयारी रखें। ट्रैवल लाइट करें और जरूरी सामान जैसे दवाइयां, टॉर्च और पावर बैंक साथ रखें। स्थानीय लोगों का सम्मान करें और प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं।

















