हाल ही में दो अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोतों आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस तमाल की ऐतिहासिक कमीशनिंग के साथ ही भारतीय नौसेना की ताकत में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। यह न केवल देश की सैन्य शक्ति में वृद्धि का प्रतीक है बल्कि स्वदेशी रक्षा तकनीक, वैश्विक रक्षा सहयोग और रणनीतिक सोच के एक संगम का परिचायक भी है। इन दोनों बहुउद्देश्यीय युद्धपोतों की कमीशनिंग के साथ ही भारत की समुद्री ताकत, रणनीतिक परिपक्वता और आत्मनिर्भर सैन्य दृष्टिकोण को जबरदस्त मजबूती मिली है। यह न केवल एक सैन्य प्रगति है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी नवाचार की दिशा में एक उल्लेखनीय मील का पत्थर भी है। दोनों युद्धपोतों आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस तमाल ने नौसेना की समुद्री शक्ति को बहुआयामी बना दिया है, जो अब वायु, सतह, पनडुब्बी और साइबर-इलैक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे सभी मोर्चों पर निर्णायक भूमिका निभाने में सक्षम हो गई है।
‘आईएनएस उदयगिरि’ प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित सात स्टील्थ युद्धपोतों की श्रृंखला का दूसरा जहाज है, जिसे मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तैयार किया है। इसे केवल 37 महीनों के भीतर निर्माण और ट्रायल के बाद नौसेना को सौंपा गया है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र की निर्माण गति, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता की अभूतपूर्व मिसाल है। इसका लगभग 75 प्रतिशत भाग पूरी तरह से स्वदेशी है, जिसमें भारत की 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों ने योगदान दिया है। यह युद्धपोत पुराने आईएनएस उदयगिरि का आधुनिक और अधिक सशक्त संस्करण है, जिसने 31 वर्षों तक देश की सेवा की थी। अब नया आईएनएस उदयगिरि, पूरी तरह से आधुनिक हथियारों, सेंसर्स और युद्धक प्रणालियों से सुसज्जित होकर पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों से मुकाबला करने में सक्षम है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया, जो इसके पूर्णतः स्वदेशी होने का प्रमाण है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ क्षमताएं हैं, जो इसे रडार, सोनार और अन्य इलैक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों से छुपाए रखने में सहायक हैं। इसकी बाहरी संरचना विशेष रडार-प्रतिरोधी सामग्री से निर्मित है, जिससे शत्रु के रडार पर इसकी पहचान करना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसके अलावा युद्धपोत में आधुनिक रडार-एब्जॉर्बेंट कोटिंग, एनक्लोज्ड मस्त और सिग्नेचर मैनेजमेंट तकनीकों का भी उपयोग किया गया है।
आईएनएस उदयगिरि में सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, मीडियम रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 76 मिमी की ओटो मेलारा मुख्य नौसैनिक तोप, 30 मिमी की रैपिड फायर गनें और 12.7 मिमी की एंटी-एयरक्राफ्ट गनें तैनात हैं। इसके पनडुब्बी रोधी युद्धक अभियानों के लिए इसमें हल्के टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर और टोएड एरे सोनार सिस्टम जैसे एडवांस्ड एंटी-सबमरीन हथियार भी लगे हुए हैं। इसकी ड्राइव प्रणाली में कॉम्बाइंड डीजल एंड गैस (सीओडीओजी) तकनीक का प्रयोग किया गया है, जिसमें उच्च गति के लिए गैस टर्बाइन और सामान्य गश्त के लिए डीजल इंजन शामिल हैं। इस संयोजन से यह युद्धपोत 30 नॉट (लगभग 55.5 किमी/घंटा) की गति तक पहुंच सकता है। इसके अलावा कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर सिस्टम, इंटीग्रेटेड प्लेटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीएमएस) और इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम (आईबीएस) जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म संचालन तंत्र इसके प्रभावशाली प्रदर्शन में योगदान करते हैं। इसके सेंसर्स और निगरानी प्रणाली की बात की जाए तो युद्धपोत में मल्टी-फंक्शन एक्टिव इलैक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (एईएसए) रडार, इंटीग्रेटेड अंडरवॉटर सेंसर सूट, इलैक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ईएसएम) तथा इलैक्ट्रॉनिक काउंटर मेजर्स (ईसीएम) शामिल हैं, जो इसे किसी भी संभावित खतरे की पहले से पहचान और उस पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाते हैं। इसके अलावा इसमें हेलीकॉप्टर डेक और हंगर की व्यवस्था है, जिससे यह नौसेना के बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टर जैसे एमएच-60 रोमियो या सी किंग को भी तैनात कर सकता है।
नौसेना में कमीशन किया गया दूसरा युद्धपोत ‘आईएनएस तमाल’ रूस में निर्मित तलवार श्रेणी के युद्धपोतों की श्रृंखला में आठवां और तुशील क्लास की दूसरी इकाई है, जिसे कालिनिनग्राद के यंतर शिपयार्ड में तैयार किया गया है। यह भारत-रूस रक्षा सहयोग की सुदृढ़ता का उदाहरण है, जहां 65 वर्षों में 51 से अधिक युद्धपोतों का निर्माण हुआ है। आईएनएस तमाल को भारत की पश्चिमी नौसेना कमान में सम्मिलित किया गया है और इसका आधार बंदरगाह कर्नाटक का करवार पोर्ट है, जो देश की सबसे सुरक्षित नौसेनिक बंदरगाहों में से एक है। आईएनएस तमाल का कुल वजन लगभग 3900 टन है और इसकी लंबाई 125 मीटर है। इसकी गति 30 नॉट तक जाती है और यह 4000 समुद्री मील की दूरी तक गश्त कर सकता है। इसके दो गैस टर्बाइन इंजन और दो डीजल इंजन, सीओडीओजी प्रणाली में कार्य करते हैं, जो इसे तीव्रता के साथ लंबी दूरी तक अभियान चलाने योग्य बनाते हैं।
इस युद्धपोत की प्रमुख विशेषता इसकी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली है, जो सतह से सतह पर अत्यधिक घातक और सटीक हमले में सक्षम है। ये मिसाइलें 290 से 450 किलोमीटर की दूरी तक वार कर सकती हैं और दुश्मन के जहाजों, समुद्री ठिकानों व तटीय लक्ष्यों को चंद सैकेंड में ही ध्वस्त कर सकती हैं। इसके अलावा आईएनएस तमाल में वर्टिकल लॉन्च सिस्टम आधारित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-सबमरीन रॉकेट लांचर, भारी टॉरपीडो और क्लोज-इन वेपन सिस्टम (सीआईडब्ल्यूएस) भी लगाए गए हैं, जो इसे हर दिशा से हमलों के प्रति सुरक्षित बनाते हैं। इस युद्धपोत की सर्विलांस और युद्ध नियंत्रण क्षमताएं भी अत्यंत उन्नत हैं। इसमें ईओ/आईआर (इलैक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रारेड) आधारित निगरानी प्रणाली, अत्याधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन रडार और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए एकीकृत फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। यह युद्धपोत भारत के तटीय क्षेत्रों और खुले समुद्र दोनों में सक्रिय संचालन के लिए सक्षम है।
आईएनएस तमाल का प्रतीक चिह्न ‘द ग्रेट बियर्स’ है, जो भारतीय पौराणिक पात्र जाम्बवंत और रूस के प्रतीक यूरेशियन ब्राउन बियर का प्रतीकात्मक समावेश है। इसका आदर्श वाक्य ‘सर्वदा सर्वत्र विजय’ इस युद्धपोत की आक्रामक, संकल्पबद्ध और अजेय भावना को दर्शाता है। यह केवल एक तकनीकी प्रतीक नहीं बल्कि भारत की समुद्री रणनीतिक आकांक्षाओं का दर्पण है। इस युद्धपोत का डिजाइन रूस के सेवेरनोये डिजाइन ब्यूरो और भारतीय नौसेना के विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है। इसकी 33 से अधिक प्रणाली भारत में विकसित की गई हैं, जिनमें ब्रह्मोस एयरोस्पेस, भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, टाटा समूह, केलट्रॉन जैसी कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस तरह यह युद्धपोत वैश्विक साझेदारी में भारत की तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस तमाल की तैनाती से भारतीय नौसेना की शक्ति में केवल संख्या की नहीं बल्कि गुणवत्ता की भी भारी वृद्धि हुई है। एक ओर जहां आईएनएस उदयगिरि पूरी तरह से स्वदेशी निर्माण और तकनीक पर आधारित है, वहीं आईएनएस तमाल विदेशी सहयोग से तैयार होते हुए भी भारतीय तकनीक और युद्ध प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है। इन दोनों जहाजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत न केवल रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से अग्रसर है बल्कि वह वैश्विक रक्षा सहयोग में भी अपनी तकनीकी शर्तें और पहचान स्थापित करने में सक्षम हो चुका है। इन दोनों युद्धपोतों की सक्रियता से भारतीय नौसेना की ‘ब्लू वॉटर’ क्षमता को नई परिभाषा मिली है, जिसमें वह अब केवल अपने तटीय क्षेत्रों की रक्षा तक सीमित नहीं बल्कि महासागरों के मध्य में जाकर निर्णायक रणनीतिक भूमिका निभा सकता है। इन युद्धपोतों की तकनीकी और सामरिक क्षमताएं भारतीय नौसेना को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित करती हैं, जो वैश्विक समुद्री समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस तमाल केवल युद्धपोत नहीं बल्कि भारत की रक्षा नीति, तकनीकी प्रगति, वैश्विक रणनीतिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता के सम्मिलन का एक प्रेरणादायक प्रतीक हैं। इन ‘समंदर के सिकंदरों’ के माध्यम से भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब केवल सुरक्षा की आवश्यकता से नहीं बल्कि शक्ति और संप्रभुता के दावे के साथ समुद्री सीमाओं की निगरानी और नियंत्रण के लिए पूरी तरह तैयार है। ये युद्धपोत अब केवल शांति के रक्षक नहीं बल्कि हर दिशा, हर परिस्थिति में ‘सर्वदा सर्वत्र विजय’ के संकल्प के साथ आक्रमण की हर चुनौती का जवाब हैं। समंदर के ये सिकंदर अब दुश्मनों के लिए केवल खतरा नहीं बल्कि चेतावनी बन चुके हैं कि भारत अब न केवल धरती पर बल्कि समुद्र में भी निर्णायक विजय के लिए तैयार है।

















